पाइल्स या भगंदर? बार-बार मवाद निकलने की समस्या को घरेलू नुस्खों से न टालें; जानें एक्सपर्ट की राय
शरीर के निजी हिस्सों से जुड़ी किसी परेशानी के बारे में लोग अक्सर बात करने से झिझकते हैं। मलद्वार के आसपास फोड़ा, दर्द या सूजन होने पर भी कई लोग इसे सामान्य इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। फोड़ा फूटने के बाद मवाद निकलती है और दर्द कम होता है तो उन्हें लगता है कि समस्या खत्म हो गई।
लेकिन अगर यही परेशानी बार-बार उसी जगह दिखाई दे, सूजन और दर्द लौटता रहे और लगातार या बीच-बीच में मवाद निकलती रहे, तो इसे सिर्फ सामान्य फोड़ा मानना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षण एनल फिस्टुला यानी भगंदर से जुड़े हो सकते हैं। समय पर जांच और इलाज न होने पर यह समस्या जटिल हो सकती है।
क्या होता है भगंदर?
आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता के कंसल्टेंट जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजहर आलम के मुताबिक, भगंदर एक असामान्य सुरंग या रास्ता होता है, जो गुदा के अंदरूनी हिस्से को बाहर की त्वचा से जोड़ सकता है।
यह समस्या अक्सर गुदा के आसपास इंफेक्शन और पस जमा होने के बाद शुरू हो सकती है। शुरुआत में फोड़ा बनता है और उसके फूटने पर मवाद बाहर निकल जाती है। इसके बाद बाहर का घाव कुछ समय के लिए ठीक दिखाई दे सकता है, लेकिन अंदर बनी नली मौजूद रह सकती है। इसी कारण कुछ समय बाद उसी जगह दोबारा सूजन, दर्द और मवाद की समस्या हो सकती है।
लोग अक्सर कर बैठते हैं ये गलती
फोड़ा फूटने और मवाद निकलने के बाद दर्द कम होते ही कई लोग डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत महसूस नहीं करते। कुछ लोग खुद से एंटीबायोटिक या मलहम का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ घरेलू उपायों से इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं।
समस्या यह है कि ऊपर से घाव सूख जाने का मतलब यह जरूरी नहीं कि अंदर की परेशानी भी खत्म हो गई हो। अगर अंदर फिस्टुला ट्रैक मौजूद है, तो समस्या दोबारा सामने आ सकती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मलद्वार के आसपास नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है:
- एक ही जगह बार-बार फोड़ा बनना
- फोड़े से बार-बार मवाद या तरल निकलना
- मलद्वार के पास छोटा छेद या घाव दिखाई देना
- बैठने या टॉयलेट करने के दौरान दर्द होना
- प्रभावित हिस्से में बार-बार सूजन या लालिमा होना
- खुजली, जलन या लगातार गीलापन महसूस होना
- इंफेक्शन बढ़ने पर बुखार आना
हर बार ऐसा होना भगंदर ही हो, यह जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी होती है।
क्या केवल दवाओं से ठीक हो जाता है?
भगंदर के इलाज का तरीका उसकी स्थिति और जटिलता पर निर्भर करता है। दवाएं संक्रमण और उससे जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन अगर अंदर फिस्टुला की नली बन चुकी है तो केवल दवाओं से उसका स्थायी इलाज हर मामले में संभव नहीं होता।
ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की जांच के बाद सर्जिकल प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं।
इलाज में इस्तेमाल होती हैं आधुनिक तकनीकें
भगंदर के कुछ मामलों में आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इलाज का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि फिस्टुला कहां है, कितना जटिल है और आसपास की मांसपेशियों पर उसका क्या असर है।
कुछ मरीजों में कम इनवेसिव तकनीकों का विकल्प भी हो सकता है, जिससे पारंपरिक बड़ी सर्जरी की तुलना में रिकवरी आसान हो सकती है। हालांकि, कौन-सी तकनीक उपयुक्त होगी, इसका फैसला डॉक्टर जांच के बाद ही करते हैं।
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर मलद्वार के पास बार-बार फोड़ा बन रहा है, उसी जगह से मवाद निकल रही है या घाव बार-बार ठीक होकर दोबारा खुल जाता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। शर्म या झिझक के कारण इलाज में देरी करने के बजाय जनरल सर्जन या संबंधित विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।
समय पर जांच होने से समस्या का सही कारण पता चल सकता है और उसके अनुसार इलाज शुरू किया जा सकता है।
नोट: यह लेख आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता के कंसल्टेंट जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजहर आलम की विशेषज्ञ सलाह पर आधारित है। यह सामान्य जानकारी है और इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
FAQ
भगंदर का शुरुआती संकेत क्या हो सकता है?
मलद्वार के पास बार-बार फोड़ा बनना, दर्द, सूजन और उसी जगह से बार-बार मवाद निकलना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।
क्या हर बार फोड़ा होने का मतलब भगंदर है?
नहीं। बार-बार फोड़ा कई कारणों से हो सकता है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।
क्या भगंदर सिर्फ दवा से ठीक हो सकता है?
यह समस्या की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर फिस्टुला की नली बन चुकी है, तो कई मामलों में सर्जिकल इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
क्या भगंदर का इलाज संभव है?
हां, इसका इलाज उपलब्ध है। इलाज का तरीका फिस्टुला के प्रकार और जटिलता के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।