परफ्यूम और रूम फ्रेशनर बन रहे हैं जानलेवा? घर की इन आम चीजों से तेजी से बढ़ रहा है अस्थमा और सांस का खतरा
जब भी खांसी, जुकाम, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी होती है, तो अक्सर हम बाहर के प्रदूषण को इसकी वजह मान लेते हैं। खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे इलाकों में रहने वाले लोग स्मॉग, वाहनों के धुएं और सड़क की धूल-मिट्टी को इसका जिम्मेदार समझते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के अंदर की हवा भी आपकी सेहत पर असर डाल सकती है?हम अपने घर को साफ, सुंदर और खुशबूदार बनाने के लिए परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और कई तरह के क्लीनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। इन चीजों से निकलने वाले धुएं, बारीक कणों और कुछ रासायनिक पदार्थों के कारण घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
विशेष रूप से बंद कमरों में इनका अधिक इस्तेमाल सांस की नली में जलन, खांसी, सिरदर्द और कुछ लोगों में एलर्जी या अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकता है। आइए जानते हैं घर में इस्तेमाल होने वाली कौन-सी चीजें इनडोर एयर पॉल्यूशन का कारण बन सकती हैं और उनसे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
1. परफ्यूम और बॉडी स्प्रे: खुशबू के साथ हवा में फैल सकते हैं केमिकल
परफ्यूम और बॉडी स्प्रे का इस्तेमाल आमतौर पर शरीर को खुशबूदार बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन कुछ उत्पादों में मौजूद सुगंधित रसायन और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) हवा में फैल सकते हैं। इनका असर उत्पाद की सामग्री, इस्तेमाल की मात्रा और कमरे में हवा के आवागमन पर निर्भर करता है।
इनका अधिक इस्तेमाल कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
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गले और नाक में जलन: स्प्रे के संपर्क में आने से कुछ लोगों को गले में खराश, छींक या खांसी हो सकती है।
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अस्थमा के लक्षण बढ़ना: तेज खुशबू और कुछ स्प्रे संवेदनशील व्यक्तियों में सांस की परेशानी या अस्थमा के लक्षण ट्रिगर कर सकते हैं।
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सिरदर्द और बेचैनी: तेज गंध से कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर या मतली महसूस हो सकती है।
बचाव कैसे करें? बंद कमरे में बार-बार स्प्रे करने से बचें। जरूरत के अनुसार कम मात्रा में इस्तेमाल करें और हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें। अगर किसी खास परफ्यूम से सांस लेने में परेशानी होती है, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें।
2. रूम फ्रेशनर और खुशबूदार मोमबत्तियां भी बन सकती हैं परेशानी की वजह
घर में अच्छी खुशबू बनाए रखने के लिए रूम फ्रेशनर, सुगंधित स्प्रे और खुशबूदार मोमबत्तियों का इस्तेमाल आम है। लेकिन ध्यान रखें कि खुशबू आने का मतलब यह नहीं है कि कमरे की हवा साफ हो गई है।
कुछ रूम फ्रेशनर हवा में सुगंधित रसायन छोड़ते हैं। वहीं, मोमबत्ती जलने से धुआं और बारीक कण निकल सकते हैं। इनका असर इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद और कमरे की वेंटिलेशन पर निर्भर करता है।
क्या हो सकती हैं परेशानियां?
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तेज खुशबू से नाक और गले में जलन हो सकती है।
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संवेदनशील लोगों को सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है।
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बंद कमरे में मोमबत्तियां जलाने से धुआं और बारीक कण जमा हो सकते हैं।
बचाव का तरीका: बदबू को केवल फ्रेशनर से दबाने के बजाय उसका स्रोत साफ करें। कूड़ेदान नियमित रूप से खाली करें, नमी वाले हिस्सों को सुखाएं और सुरक्षित होने पर खिड़कियां खोलकर हवा आने-जाने दें। मोमबत्तियों का इस्तेमाल सीमित रखें और उन्हें कभी भी बिना निगरानी के न जलाएं।
3. मच्छर भगाने वाली कॉइल और लिक्विड रेपेलेंट का सावधानी से करें इस्तेमाल
मच्छरों से बचने के लिए कई घरों में कॉइल, इलेक्ट्रिक लिक्विड रेपेलेंट और अन्य कीट भगाने वाले उत्पाद इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि, इन उत्पादों की बनावट अलग-अलग होती है, इसलिए इनसे निकलने वाले पदार्थ और उनके संभावित प्रभाव भी अलग हो सकते हैं।
मच्छर भगाने वाली कॉइल जलने पर धुआं और सूक्ष्म कण निकलते हैं। वहीं, इलेक्ट्रिक लिक्विड रेपेलेंट हवा में कीटनाशक तत्व छोड़ सकते हैं। बंद कमरे में इनका गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सांस की नली में जलन और दूसरी परेशानियों का कारण बन सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान:
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कॉइल को सोते समय बिस्तर के बिल्कुल पास न रखें।
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उत्पाद के पैकेट पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।
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कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें, जहां ऐसा करना सुरक्षित हो।
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बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से उत्पादों को दूर रखें।
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मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी और खिड़कियों पर जाली जैसे विकल्प भी अपनाएं।
कॉइल के धुएं की तुलना सीधे किसी निश्चित संख्या में सिगरेट से करना सही नहीं है, क्योंकि वास्तविक जोखिम उत्पाद, इस्तेमाल की अवधि और हवा की गुणवत्ता सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
4. अगरबत्ती और धूपबत्ती का धुआं भी हो सकता है नुकसानदायक
भारतीय घरों में पूजा-पाठ के दौरान अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाना आम परंपरा है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ इनका इस्तेमाल सुगंध के लिए भी किया जाता है। हालांकि, किसी भी पदार्थ को जलाने पर धुआं और बारीक कण निकल सकते हैं, जो घर के अंदर की हवा को प्रभावित करते हैं।
अगरबत्ती और धूपबत्ती का धुआं विशेष रूप से बंद कमरे में जमा हो सकता है। लंबे समय तक या अधिक मात्रा में इसके संपर्क में रहने से कुछ लोगों को खांसी, छींक, नाक में जलन या सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को रखें सुरक्षित। इन लोगों को धुएं से ज्यादा परेशानी हो सकती है। पूजा के दौरान अगरबत्ती का इस्तेमाल सीमित रखें, उसे हवादार जगह पर जलाएं और धुआं सीधे चेहरे या सांस लेने की जगह तक न पहुंचने दें।
अगर घर में किसी को धुएं से खांसी या सांस फूलने की शिकायत होती है, तो अगरबत्ती और धूपबत्ती का इस्तेमाल बंद करना बेहतर हो सकता है।
5. फिनाइल, ब्लीच और टॉयलेट क्लीनर का गलत इस्तेमाल पड़ सकता है भारी
घर और बाथरूम की सफाई के लिए फ्लोर क्लीनर, फिनाइल, ब्लीच और टॉयलेट क्लीनर इस्तेमाल किए जाते हैं। ये उत्पाद सफाई में उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर इनसे निकलने वाली वाष्प आंखों, त्वचा और सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है।
बंद बाथरूम में तेज रसायनों से सफाई करने पर परेशानी बढ़ सकती है। आंखों में पानी आना, गले में जलन, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सबसे जरूरी सावधानी: ब्लीच को कभी भी टॉयलेट क्लीनर, एसिड या अमोनिया वाले उत्पादों के साथ न मिलाएं। ऐसा करने से खतरनाक गैसें निकल सकती हैं, जो गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
सफाई करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें, दस्ताने पहनें और जहां संभव हो, उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। किसी रसायन को मिलाने के बजाय उसे अलग-अलग निर्देशों के अनुसार ही इस्तेमाल करें।
घर के अंदर प्रदूषण कम करने के 6 आसान उपाय
घर की सफाई और खुशबू बनाए रखते हुए भी इनडोर प्रदूषण कम करने के लिए कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं।
1. हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें। जब बाहर की हवा की गुणवत्ता ठीक हो और ऐसा करना सुरक्षित हो, तो खिड़कियां खोलें। रसोई और बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें।
2. तेज खुशबू वाले उत्पादों का इस्तेमाल सीमित करें। परफ्यूम, रूम फ्रेशनर और सुगंधित स्प्रे का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें। बिना खुशबू वाले उत्पाद भी एक विकल्प हो सकते हैं।
3. घर की नियमित सफाई करें। धूल को गीले कपड़े से साफ करें और फर्श पर जमा धूल को नियमित रूप से हटाएं। नमी और फफूंदी की समस्या को नजरअंदाज न करें।
4. मच्छरों से बचने के सुरक्षित तरीके अपनाएं। मच्छरदानी और खिड़कियों पर जाली जैसे विकल्प इस्तेमाल करें। कॉइल या रेपेलेंट का उपयोग करते समय निर्देशों का पालन करें।
5. सफाई वाले केमिकल सावधानी से इस्तेमाल करें। सभी उत्पादों को उनकी मूल पैकिंग में रखें, बच्चों से दूर रखें और कभी भी अलग-अलग क्लीनर आपस में न मिलाएं।
6. इंडोर प्लांट्स को हवा साफ करने का एकमात्र उपाय न समझें। पौधे घर को सुंदर बना सकते हैं, लेकिन सामान्य घरेलू परिस्थितियों में केवल पौधे लगाने से इनडोर प्रदूषण को पर्याप्त रूप से कम करने का भरोसेमंद प्रमाण नहीं है। वेंटिलेशन और प्रदूषण के स्रोत को कम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर घर में रहने के दौरान बार-बार खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी होती है, तो ध्यान दें कि क्या लक्षण किसी खास उत्पाद के इस्तेमाल के बाद बढ़ते हैं। उस उत्पाद का इस्तेमाल रोकें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।अगर किसी क्लीनर या रसायन के संपर्क में आने के बाद अचानक तेज सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो या सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।