पश्चिमोत्तानासन: रीढ़ को बनाए मजबूत , पाचन सुधारे और तनाव दूर करने में भी सहायक
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। नींद की कमी, खराब जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और खराब खान-पान के करण लोगों में डिप्रेशन और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए योग और प्राणायाम को अपने दैनिक जीवन में लागू करना बहुत जरूरी हो गया है। उन्हीं में से एक पश्चिमोत्तानासन है, जो एक प्रमुख हठ योग आसन है। इस योगासन को प्रतिदिन नियमित रूप से करने से शरीर को काफी लाभ मिलता है। पश्चिमोत्तानासन रीढ़ की हड्डी, हैमस्ट्रिंग्स और पीठ के निचले हिस्से के लिए फायदेमंद है। इससे पाचन में सुधार होने के साथ तनाव दूर होता है और पेट की चर्बी भी कम होती है।
पश्चिमोत्तानासन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को सामने सीधा फैलाकर बैठें। इसके बाद रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। फिर सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और रीढ़ को ऊपर की ओर खींचें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें। फिर रीढ़ को सीधा रखते हुए आगे बढ़ें और पैर के अंगूठों को पकड़ने या छूने का प्रयास करें।
इस दौरान पैर सीधा रखकर आगे झुकने में पूरे शरीर के पिछले हिस्से में खिंचाव आता है, लेकिन माथे को घुटनों की ओर लाने की कोशिश करें। फिर 20 से 60 सेकंड तक लंबी गहरी सांसें लेते हुए इस अवस्था में रुकें और सांस भरते हुए धीरे-धीरे सिर और धड़ को ऊपर उठाएं और अपने दोनों हाथों को नीचे लाएं। यह आसन तनाव, चिंता, सिरदर्द और थकान को कम करने में सहायक है।
पश्चिमोत्तानासन करने का सबसे सही समय सुबह का माना गया है। अहले सुबह खाली पेट इस योगासन को करना सबसे अच्छा माना जाता है। यह शरीर को पूरे दिन ऊर्जावान और तनाव मुक्त बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, इस योगासन को शाम के समय भी खाने के 4-5 घंटे बाद किया जा सकता है, लेकिन सुबह में इसे करना ज्यादा फायदेमंद बताया गया है। वहीं, शुरुआती समय में इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही करने की सलाह दी गई है।
--आईएएनएस
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