Parenting Health Tips: बार-बार खाने की आदत और असली भूख के फर्क को समझें, बच्चों में पोषण सुधारने के लिए अपनाएं ये तरीके
छोटे बच्चे जब बार-बार कुछ खाने के लिए मांगते हैं, तो ज्यादातर माता-पिता यही समझते हैं कि बच्चे को भूख लगी है। लेकिन हर बार खाना मांगने का मतलब भूख होना जरूरी नहीं है। बड़ों की तरह बच्चों में भी खाने की आदत कई बार भूख के अलावा दूसरी वजहों से जुड़ी हो सकती है।बच्चे कई बार बोरियत, रोजमर्रा की आदत, किसी इमोशन या आसपास आसानी से उपलब्ध खाने की वजह से भी कुछ खाने लगते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चा वास्तव में भूखा है या सिर्फ किसी आदत के कारण खाना मांग रहा है।सीके बिड़ला अस्पताल में पीडियाट्रिक्स एवं नियोनेटोलॉजी के लीड कंसल्टेंट डॉक्टर विशाल जैन के अनुसार, बच्चों के खाने के व्यवहार को समझने और उन्हें सही तरीके से गाइड करने के लिए भूख और आदत से होने वाले खाने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
भूख और आदत से खाने में क्या अंतर है?
एक्सपर्ट के मुताबिक वास्तविक भूख आमतौर पर धीरे-धीरे महसूस होती है। बच्चा खुद बता सकता है कि उसे भूख लगी है। उसे थोड़ी कम एनर्जी महसूस हो सकती है और वह खाने के कई विकल्पों में से कुछ भी खाने के लिए तैयार हो सकता है।
इसके विपरीत आदत या किसी खास परिस्थिति के कारण होने वाला खाना अक्सर किसी एक्टिविटी से जुड़ा होता है। उदाहरण के लिए, कुछ बच्चे टीवी देखते ही स्नैक मांगने लगते हैं, कुछ बच्चों को स्कूल से घर आते ही कुछ खाने की आदत होती है, जबकि कुछ मोबाइल या टैबलेट पर गेम खेलते समय लगातार कुछ न कुछ खाते रहते हैं।
कई बार बच्चा किसी खास चिप्स, बिस्किट या दूसरे स्नैक की ही मांग करता है, जबकि उसने कुछ समय पहले ही खाना खाया होता है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी नहीं कि बच्चा सिर्फ जिद कर रहा हो। हो सकता है कि उसके दिमाग में किसी खास एक्टिविटी और खाने के बीच एक आदत का कनेक्शन बन गया हो।
बच्चे के व्यवहार को समझना जरूरी
माता-पिता को बच्चे के बार-बार खाना मांगने पर तुरंत उसे ओवरईटिंग के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। इसी तरह हर बार खाना देने से भी बचना चाहिए। इसके बजाय बच्चे से शांत तरीके से बात की जा सकती है।
उदाहरण के लिए, पैरेंट्स पूछ सकते हैं- 'क्या तुम्हें सच में भूख लगी है या तुम बोर हो रहे हो और कुछ करने के लिए ढूंढ रहे हो?'
बच्चे को कुछ देर रुककर अपने शरीर के संकेतों को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे समय के साथ बच्चा यह पहचानना सीख सकता है कि उसे वास्तव में भूख लगी है या सिर्फ किसी आदत की वजह से खाने का मन कर रहा है।
घर का माहौल भी डालता है असर
बच्चों की खाने की आदतों पर घर का माहौल भी काफी असर डालता है। अगर घर में हर समय चिप्स, बिस्किट, मिठाई, नमकीन या दूसरे प्रोसेस्ड फूड आसानी से उपलब्ध रहते हैं, तो बच्चा बार-बार उन्हें खाने की मांग कर सकता है।
इसके बजाय घर में फल, दही, मखाना, घर के बने स्नैक्स और अन्य पौष्टिक विकल्प आसानी से उपलब्ध रखे जा सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चों को हर तरह के पसंदीदा स्नैक्स से पूरी तरह दूर रखा जाए, बल्कि रोजमर्रा की उपलब्धता और खाने की आदतों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
टीवी और मोबाइल के साथ खाना खाने की आदत पर भी ध्यान दें
अगर बच्चा टीवी, मोबाइल या गेम खेलते समय ही खाना मांगता है, तो धीरे-धीरे इस आदत को बदलने की कोशिश की जा सकती है। बच्चों के लिए खाना खाने का समय अलग रखने और स्क्रीन के सामने खाने को कम करने से उन्हें अपने खाने पर ध्यान देने में मदद मिल सकती है।
माता-पिता को बच्चे के खाने को लेकर बार-बार डांटने या शर्मिंदा करने के बजाय उसकी आदत को समझने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चे को यह सिखाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है कि भूख लगने पर खाना और सिर्फ आदत या बोरियत में खाने में क्या अंतर होता है।
पैरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान
- बच्चा बार-बार खाना मांगे तो तुरंत यह न मानें कि वह भूखा ही है।
- बच्चे से प्यार से पूछें कि उसे सच में भूख लगी है या सिर्फ कुछ खाने का मन कर रहा है।
- घर में हेल्दी स्नैक्स आसानी से उपलब्ध रखें।
- बहुत ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड स्नैक्स को हर समय सामने न रखें।
- टीवी और मोबाइल देखते हुए लगातार खाने की आदत को धीरे-धीरे कम करें।
- बच्चे को भूख और पेट भरने के शरीर के संकेत पहचानना सिखाएं।
- खाने को लेकर बच्चे को डांटने या शर्मिंदा करने से बचें।
कुल मिलाकर, बच्चों की खाने की आदतों को सुधारने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि बच्चा क्या खा रहा है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि वह कब, क्यों और किस परिस्थिति में खा रहा है। माता-पिता अगर शुरुआत से इन संकेतों पर ध्यान दें और घर में संतुलित खाने का माहौल बनाएं, तो बच्चों में बेहतर और जागरूक खाने की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।