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नौकासन और अर्धनौकासन से मजबूत होगा शरीर, कम होगी पेट की चर्बी; जानें कैसे करें अभ्यास

 

नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत लाइफस्टाइल के कारण लोग अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में योग एक ऐसा माध्यम है, जो शरीर के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबतू बनाता है। खासकर नौकासन और अर्धनौकासन जैसे योगासन शरीर के अंदर गहराई तक सकारात्मक बदलाव लाते हैं। यह वजन नियंत्रण से लेकर पाचन सुधारने और मानसिक तनाव कम करने तक कई फायदे देता है।

नौकासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद धीरे-धीरे अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाएं और साथ ही अपने सिर और कंधों को भी जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान आपका शरीर वी शेप में आ जाएगा। हाथों को सामने सीधा रखें। इस स्थिति में कुछ सेकंड तक रुकें और सामान्य सांस लेते रहें। वहीं, अर्धनौकासन में भी यही प्रक्रिया है लेकिन इसमें शरीर थोड़ा नीचे रहता है और संतुलन बनाए रखना नौकासन की तुलना में आसान होता है।

इन दोनों आसनों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये शरीर के कोर यानी पेट, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं। जब आप इस स्थिति में रहते हैं, तो पेट की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं, जिससे धीरे-धीरे पेट की चर्बी कम होने लगती है और शरीर टोन होता है।

ये आसन हिप फ्लेक्सर मसल्स पर भी काम करते हैं, जो लंबे समय तक बैठने की वजह से कमजोर हो जाती हैं। इनके मजबूत होने से कमर दर्द में राहत मिलती है और शरीर की मुद्रा भी सुधरती है।

नौकासन और अर्धनौकासन पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाने में मदद करते हैं। जब आप इन आसनों को करते हैं, तो पेट के अंदर हल्का दबाव बनता है, जिससे आंतों और अन्य पाचन अंगों की मालिश होती है। इससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और खाना पचाने की क्षमता बेहतर होती है। इसके अलावा, ये आसन शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को भी सुधारते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम महसूस होती है।

मानसिक रूप से भी ये आसन काफी लाभकारी हैं। इनको करने के दौरान संतुलन बनाए रखने के लिए फोकस और एकाग्रता की जरूरत होती है, जिससे मन शांत होता है और तनाव कम होता है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत महसूस करता है।

हालांकि ध्यान रहे कि जिन लोगों को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या, लो ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, अस्थमा या दिल की बीमारी है, उन्हें इन आसनों से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और मासिक धर्म के दौरान भी इनका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

--आईएएनएस

पीके/पीएम