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महाराष्ट्र में ‘नो योर डॉक्टर’ क्यूआर सिस्टम लॉन्च, अब मिनटों में होगी डॉक्टर की पहचान

 

मुंबई, 24 जून (आईएएनएस)। राज्य के नागरिकों को असली और पंजीकृत डॉक्टरों की पहचान करने में मदद देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने 'नो योर डॉक्टर' नाम से एक क्यूआर कोड आधारित प्रणाली शुरू की है।

इस क्यूआर कोड को स्कैन करके नागरिक तुरंत यह जांच सकते हैं कि कोई डॉक्टर कानूनी रूप से पंजीकृत है या नहीं। इस पहल का उद्देश्य राज्य में फर्जी डॉक्टरों पर रोक लगाना भी है।

मंत्री ने यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान विजय देशमुख द्वारा सोलापुर जिले में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई से जुड़े प्रश्न के जवाब में दी।

राज्य की चिकित्सा व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्तमान में लगभग 1.40 लाख पंजीकृत डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा, हर वर्ष करीब 12,824 नए एमबीबीएस स्नातक राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से जुड़ते हैं।

मंत्री ने बताया कि 'फर्जी डॉक्टर' वे लोग हैं, जो आवश्यक पंजीकरण के बिना चिकित्सा सेवा देते हैं। इसमें एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी तथा दंत चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बिना अनुमति के प्रैक्टिस करने वाले लोग शामिल हैं।

वर्ष 2015 से 2026 के बीच राज्य में ऐसे अवैध चिकित्सकों के खिलाफ कुल 89 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इस समस्या पर नियंत्रण के लिए सरकार ने निगरानी समितियां बनाई हैं। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में और तहसील स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में समितियां काम कर रही हैं।

मंत्री ने बताया कि इन समितियों का जल्द पुनर्गठन किया जाएगा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि निगरानी और सख्त हो सके। अवैध प्रैक्टिस के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि दोषियों को गंभीर सजा का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशानिर्देशों के तहत ऐसे मामलों में एक वर्ष तक की जेल या 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।

महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट के अनुसार पहली बार अपराध करने पर दो वर्ष तक की जेल या जुर्माना हो सकता है, जबकि बार-बार अपराध करने वालों को 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा दी जा सकती है।

इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि सरकार पीसी-पीएनडीटी एक्ट में आवश्यक संशोधन करने के पक्ष में है, ताकि लोगों की जान को खतरे में डालने वालों को और कड़ी सजा दी जा सके।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम