तीन आदिवासी गांवों में 3800 लोगों की जांच; कांग्रेस का आरोप-मौतों की संख्या छिपाई गई
बालाघाट, 24 अगस्त (आईएएनएस)। एमपी के बालाघाट के आदिवासी इलाके में बच्चों की मौत को लेकर मचे विवाद के बीच अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की टीमों की ओर से बालाघाट जिले के तीन गांवों में मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों से प्रभावित 3,811 लोगों की जांच की गई है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा की राज्य सरकार के हालात संभालने के तरीके पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार मौतों के बारे में तथ्य छिपा रही है और मरने वालों की असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
बिरसा ब्लॉक के कुंडेक्सा, कोरका और बोंडारी गांवों में घर-घर जाकर किए गए हेल्थ सर्वे में मलेरिया, दस्त, रैशेज (चकत्ते) के साथ बुखार और त्वचा की बीमारियों के कुल 798 मामले सामने आए। रविवार तक की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 320 लोग मलेरिया, 155 दस्त, 146 शरीर पर रैशेज के साथ बुखार और 177 त्वचा की बीमारियों से पीड़ित पाए गए।
पहचाने गए 798 मरीजों में से 569 का इलाज घर पर किया गया, जबकि 229 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती लोगों में से 201 ठीक होकर घर लौट चुके हैं जबकि 28 का इलाज अभी भी चल रहा है।
अधिकारियों ने बताया, "रविवार को बारह नए मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि पांच को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया था और उनकी हालत स्थिर है तथा वे खतरे से बाहर हैं।"
तीनों गांवों में घर-घर जाकर हेल्थ सर्वे और इलाज का काम जारी है। हेल्थ टीमें निगरानी रख रही हैं और जरूरत पड़ने पर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था कर रही हैं।
बैगा-बहुल गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की है। इन मौतों से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है और दावा किया है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पिछले हफ्ते आरोप लगाया था कि 19 बच्चों की मौत हुई है और सरकार पर मरने वालों की संख्या छिपाने का आरोप लगाया था।
बीमारियों का सही कारण अभी तक पक्के तौर पर पता नहीं चल पाया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मलेरिया जैसे बुखार और त्वचा के संक्रमण के साथ-साथ पोषण की कमी सहित कई तरह के संक्रमणों से जुड़े लक्षणों की जानकारी दी है। आगे की जांच के लिए खून और पानी के सैंपल भेजे गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि गांवों में निगरानी और इलाज का काम जारी रहेगा।
--आईएएनएस
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