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हार्ट पेशेंट भी जी सकते हैं नॉर्मल लाइफ: डॉक्टर के ये 5 छोटे लाइफस्टाइल चेंज रखेंगे आपका दिल सेहतमंद

 

जब किसी व्यक्ति को पहली बार पता चलता है कि उसे दिल से जुड़ी बीमारी है, तो उसके मन में कई तरह के डर पैदा होने लगते हैं। उसे लगने लगता है कि अब उसकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल की बीमारी का पता चलना जिंदगी का अंत नहीं है। सही इलाज, डॉक्टर की सलाह और रोजमर्रा की आदतों में जरूरी बदलाव करके कई लोग एक्टिव और सामान्य जीवन जी सकते हैं।शारदाकेयर-हेल्थसिटी के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण रमण मिश्रा के मुताबिक, सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद और तनाव को भी मैनेज करना जरूरी है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए डाइट और एक्सरसाइज में बदलाव डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

डाइट में इन चीजों को दें जगह

दिल को स्वस्थ रखने के लिए अचानक बहुत सख्त डाइट अपनाने की जरूरत नहीं है। अपनी रोज की थाली में धीरे-धीरे पौष्टिक चीजों को बढ़ाना ज्यादा आसान और टिकाऊ तरीका हो सकता है।

फल और सब्जियां: मौसमी फल और अलग-अलग तरह की हरी सब्जियां डाइट का हिस्सा बनाएं।

साबुत अनाज और दालें: चोकर वाला आटा, दलिया, ओट्स और विभिन्न दालों से फाइबर मिल सकता है।

मेवे और बीज: बादाम, अखरोट और दूसरे नट्स को सीमित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है।

नमक और तली चीजों से रहें सावधान

जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या है, उनके लिए ज्यादा नमक नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए खाने में नमक की मात्रा सीमित रखना जरूरी है।

इसके अलावा समोसा, कचौड़ी, चिप्स, पेस्ट्री और ज्यादा तली-भुनी चीजों का सेवन कम करें। बार-बार गर्म किए गए तेल और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों से भी दूरी बनाना बेहतर है।

अगर किसी व्यक्ति को हार्ट फेलियर या किडनी से जुड़ी समस्या है, तो उसे पानी और नमक की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए।

दिल की बीमारी में एक्सरसाइज भी जरूरी

दिल की बीमारी होने के बाद कई लोग शारीरिक गतिविधि पूरी तरह बंद कर देते हैं। लेकिन हर मरीज के लिए पूरी तरह निष्क्रिय रहना जरूरी नहीं होता। डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की शारीरिक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है।

  • रोजाना 20 से 30 मिनट हल्की वॉक की जा सकती है।
  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें और बीच-बीच में थोड़ा चलें।
  • डॉक्टर की अनुमति मिलने पर हल्के योग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज किए जा सकते हैं।

हालांकि, एक्सरसाइज के दौरान शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। अगर चलते या व्यायाम करते समय सीने में दर्द या दबाव, ज्यादा सांस फूलना, चक्कर या असामान्य पसीना आए तो तुरंत गतिविधि रोककर चिकित्सकीय मदद लें।

तनाव और नींद को भी न करें नजरअंदाज

लगातार तनाव और खराब नींद का असर ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए पर्याप्त और नियमित नींद लेना जरूरी है।

रात में सोने और सुबह उठने का समय तय रखने की कोशिश करें। सोने से पहले मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल कम करना भी मददगार हो सकता है। परिवार के साथ समय बिताना, पसंदीदा संगीत सुनना या अपनी पसंद की शांत गतिविधियों के लिए समय निकालना तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

साथ ही, सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू का सेवन छोड़ना दिल की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। शराब का सेवन करने वाले लोगों को भी अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें

कई बार मरीज कुछ दिनों तक दवा लेने के बाद खुद को बेहतर महसूस करने लगता है और बिना डॉक्टर से पूछे दवा बंद कर देता है। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।

ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों को नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को निर्धारित तरीके से लेना जरूरी है। अपनी मर्जी से दवा की खुराक कम या बंद नहीं करनी चाहिए।

समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहने से यह पता चलता रहता है कि इलाज सही तरीके से काम कर रहा है या उसमें किसी बदलाव की जरूरत है।

दिल की बीमारी के बाद जिंदगी में करें नई शुरुआत

दिल की बीमारी का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति अपनी जिंदगी से सभी खुशियां और गतिविधियां खत्म कर दे। सही इलाज और जीवनशैली में जरूरी बदलाव के साथ व्यक्ति अपनी सेहत को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकता है।

पौष्टिक खाना, नियमित और डॉक्टर की सलाह के अनुसार शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण, तंबाकू से दूरी और दवाइयों को समय पर लेना—ये सभी दिल की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि अपनी बीमारी को समझें, नियमित मेडिकल फॉलोअप रखें और किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।