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H1N1 Warning: फ्लू के बाद दोबारा बुखार आना नॉर्मल नहीं! जानिए क्यों अचानक बिगड़ सकती है मरीज की हालत

 

फ्लू या H1N1 होने के बाद शुरुआती 3-4 दिन मरीज के लिए काफी मुश्किल हो सकते हैं। तेज बुखार, बदन दर्द, गले में खराश, खांसी और कमजोरी की वजह से शरीर काफी थका हुआ महसूस करता है। आमतौर पर ज्यादातर लोगों की हालत कुछ दिनों में धीरे-धीरे बेहतर होने लगती है।

लेकिन अगर 3-4 दिन बाद बुखार कम होने के बजाय अचानक फिर तेज हो जाए, खांसी बढ़ने लगे या सांस लेने में परेशानी होने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसे लक्षण फ्लू के बाद होने वाले सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन या निमोनिया की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

फ्लू के बाद क्यों बिगड़ सकती है हालत?

फ्लू का वायरस शरीर और खासकर श्वसन तंत्र को कमजोर कर सकता है। कुछ मामलों में इससे फेफड़ों की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित होती है और बैक्टीरिया को संक्रमण फैलाने का मौका मिल सकता है।

इसे सेकेंडरी बैक्टीरियल इंफेक्शन कहा जाता है। फ्लू के बाद बैक्टीरियल निमोनिया भी ऐसी जटिलताओं में शामिल हो सकता है।

इसलिए मरीज की तबीयत पहले बेहतर होने के बाद अचानक बिगड़ती है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

इन लक्षणों पर रखें खास नजर

फ्लू से उबरने के दौरान अगर निम्न में से कोई लक्षण दिखाई दे, तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है:

  • बुखार ठीक होने के बाद अचानक दोबारा तेज बुखार आना
  • खांसी का अचानक ज्यादा बढ़ जाना
  • खांसी के साथ ज्यादा बलगम आना
  • थोड़ा चलने या सामान्य काम करने पर भी सांस फूलना
  • सीने में भारीपन, चुभन या लगातार दर्द महसूस होना
  • अत्यधिक कमजोरी या सामान्य गतिविधियां करने में परेशानी होना
  • ऑक्सीजन का स्तर कम होना

इनमें से कुछ लक्षण गंभीर संक्रमण के संकेत हो सकते हैं, इसलिए इन्हें केवल फ्लू के बाद की सामान्य कमजोरी मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?

फ्लू के बाद कुछ लोगों में गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। इनमें खास तौर पर शामिल हैं:

  • बुजुर्ग
  • छोटे बच्चे
  • गर्भवती महिलाएं
  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • अस्थमा या दूसरी पुरानी सांस की बीमारी वाले मरीज
  • हृदय संबंधी पुरानी बीमारी वाले लोग
  • कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति

ऐसे मरीजों में फ्लू के दौरान और ठीक होने के बाद भी लक्षणों पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।

खुद से एंटीबायोटिक लेने की गलती न करें

कई लोग बुखार दोबारा आने पर बिना डॉक्टर की सलाह के घर में मौजूद एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए।

एंटीबायोटिक वायरल फ्लू का इलाज नहीं करतीं। इनका इस्तेमाल बैक्टीरियल इंफेक्शन की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाता है।

अगर डॉक्टर को बैक्टीरियल निमोनिया या किसी अन्य बैक्टीरियल संक्रमण का संदेह होता है, तो वह मरीज के लक्षणों और जरूरत के अनुसार जांच, ऑक्सीजन लेवल, छाती की जांच, एक्स-रे या अन्य टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

कब तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है?

अगर मरीज को सांस लेने में काफी परेशानी हो रही है या हालत तेजी से बिगड़ रही है, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

खास तौर पर इन संकेतों को गंभीरता से लें:

  • सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत होना
  • सीने में तेज दर्द या दबाव महसूस होना
  • अचानक भ्रम या कन्फ्यूजन की स्थिति
  • अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • पेशाब बहुत कम होना
  • दोबारा तेज बुखार के साथ तेज कंपकंपी या हालत बिगड़ना
  • ऑक्सीजन लेवल कम होना

ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना जरूरी है।

फ्लू ठीक होने के बाद भी रखें नजर

फ्लू में सिर्फ बुखार उतर जाना पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं माना जा सकता। बीमारी से उबरने के दौरान मरीज की सांस, खांसी, बुखार, कमजोरी और सामान्य गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।

अगर तबीयत पहले बेहतर होने के बाद दोबारा बिगड़ने लगे, खासकर बुखार और सांस से जुड़े लक्षण बढ़ें, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

ध्यान रखें: फ्लू के बाद हर बार दोबारा बुखार आने का मतलब निमोनिया नहीं होता, लेकिन ऐसे लक्षणों की सही वजह डॉक्टर ही जांच के बाद बता सकते हैं। खुद से एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है।