☰
×

'जेंडर पेन गैप' का सच: महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा होता है शारीरिक दर्द, ग्लोबल रिसर्च से खुलासा

 

अक्सर जब महिलाएं अपने पार्टनर या परिवार के किसी सदस्य से शरीर में दर्द की शिकायत करती हैं, तो उनकी परेशानी को हल्के में ले लिया जाता है। कई बार इसे सामान्य दर्द या सहनशक्ति की कमी समझ लिया जाता है। लेकिन एक बड़े वैश्विक अध्ययन में सामने आए निष्कर्ष बताते हैं कि महिलाओं और पुरुषों के दर्द के अनुभव में वास्तविक अंतर हो सकता है।एक अध्ययन में 118 देशों के 61 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें 5 साल से लेकर 100 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के दर्द के अनुभवों को शामिल किया गया। अध्ययन के अनुसार, शरीर के कई हिस्सों में महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक दर्द महसूस होने की शिकायत की।

महिलाओं में 11 शारीरिक हिस्सों में ज्यादा दर्द की शिकायत

अध्ययन में सिर, चेहरा, गर्दन, पीठ, पेट, कूल्हे और घुटनों समेत कुल 11 शारीरिक हिस्सों में दर्द के अनुभवों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन में शामिल सभी हिस्सों में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले अधिक दर्द की शिकायत दर्ज कराई।रिपोर्ट में चेहरे, सिर और पेट के दर्द में खास अंतर सामने आया। अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं में चेहरे के दर्द की संभावना 83 प्रतिशत, सिरदर्द की संभावना 74 प्रतिशत और पेट दर्द की संभावना 60 प्रतिशत अधिक पाई गई।हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को पुरुषों से ज्यादा दर्द होता है। ये निष्कर्ष अध्ययन में शामिल लोगों के दर्द संबंधी अनुभवों और रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर आधारित हैं।

क्या उम्र बढ़ने के साथ दर्द लगातार बढ़ता है?

आमतौर पर माना जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर में दर्द की समस्या लगातार बढ़ती जाती है। लेकिन इस अध्ययन में दर्द और उम्र के बीच संबंध को लेकर एक अलग तस्वीर सामने आई।

शोधकर्ताओं के अनुसार, कई प्रकार के दर्द 55 वर्ष की उम्र से पहले तेजी से बढ़ते हैं और मध्यम आयु में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद कुछ मामलों में दर्द की शिकायतों में कमी भी देखी जा सकती है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिक उम्र में दर्द की समस्या खत्म हो जाती है। अलग-अलग लोगों में दर्द का अनुभव उनकी सेहत, जीवनशैली और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।

कम आय वाले देशों में पीठ दर्द की समस्या ज्यादा

अध्ययन में देशों की आर्थिक स्थिति और लोगों के दर्द के अनुभवों के बीच भी अंतर देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कम आय वाले देशों में कुछ प्रकार के दर्द, खासकर कमर दर्द की समस्या अधिक पाई गई।

कम आय वाले देशों में कमर दर्द की दर अमीर देशों के मुकाबले लगभग दोगुनी बताई गई। इसके पीछे भारी शारीरिक श्रम, काम करने की कठिन परिस्थितियां, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां संभावित कारण हो सकती हैं।

हालांकि, इन कारणों के बीच संबंध को बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे और शोध की जरूरत है।

दुनिया में सबसे आम है पीठ दर्द

अध्ययन के अनुसार, पीठ दर्द दुनिया भर में दर्द की सबसे आम समस्याओं में से एक है। रिपोर्ट में करीब 40 प्रतिशत लोगों के इससे प्रभावित होने की बात कही गई है।

इसके विपरीत, चेहरे का दर्द सबसे कम रिपोर्ट की गई समस्याओं में शामिल रहा, जो लगभग 2 प्रतिशत लोगों में पाया गया।

पीठ दर्द के पीछे लंबे समय तक बैठना, गलत मुद्रा में काम करना, शारीरिक मेहनत और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, लगातार या गंभीर दर्द होने पर उसके वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

महिलाओं के दर्द को गंभीरता से लेना क्यों जरूरी?

इस अध्ययन का एक अहम पहलू यह भी है कि महिलाओं के दर्द के अनुभवों को समझना और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। कई बार दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे सही समय पर जांच और इलाज मिलने में देरी हो सकती है।

महिलाओं और पुरुषों के बीच दर्द के अनुभवों में अंतर के पीछे जैविक, हार्मोनल और सामाजिक कारणों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, किसी एक कारण को सभी तरह के दर्द के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

शोधकर्ताओं के निष्कर्ष स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद संभावित लैंगिक अंतर को समझने और दर्द के बेहतर आकलन व उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

दर्द की शिकायत को नजरअंदाज न करें

यह अध्ययन बताता है कि दर्द का अनुभव हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। इसलिए किसी महिला की दर्द संबंधी शिकायत को केवल उसकी सहनशक्ति से जोड़कर देखना सही नहीं है।अगर सिर, पेट, पीठ या शरीर के किसी अन्य हिस्से में बार-बार दर्द होता है, तो उसके कारण की जांच कराना जरूरी है। अचानक बहुत तेज दर्द, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।