नसों और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है लहसुन-सरसों का तेल, जानें इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण
सर्दियों में शरीर की जकड़न, मांसपेशियों में दर्द या ठंड लगने पर भारतीय घरों में कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाए जाते हैं। इनमें सरसों के तेल में लहसुन पकाकर उससे मालिश करना भी काफी पुराना तरीका है। कई परिवारों में इसका इस्तेमाल जोड़ों और मांसपेशियों की मालिश के लिए किया जाता रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि इस नुस्खे से वास्तव में कितना फायदा मिल सकता है, इसे तैयार करने का सही तरीका क्या है और किन लोगों को इसका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए? प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. राम अवतार के बताए तरीके और राय के आधार पर जानते हैं पूरी जानकारी।
सरसों के तेल और लहसुन का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
डॉ. राम अवतार के मुताबिक, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में सरसों के तेल और लहसुन का लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। सरसों के तेल को गर्म तासीर वाला माना जाता है, जबकि लहसुन में भी तीखे और गर्म गुण बताए जाते हैं।
पारंपरिक तौर पर माना जाता है कि लहसुन को सरसों के तेल में गर्म करने के बाद तैयार तेल से मालिश करने पर शरीर में गर्माहट महसूस होती है और अकड़न या मांसपेशियों की परेशानी में अस्थायी राहत मिल सकती है।
हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। लगातार या तेज दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
सरसों और लहसुन के तेल से मालिश के बताए जाने वाले फायदे
1. मांसपेशियों और जोड़ों की अकड़न में राहत
गर्म तेल से हल्की मालिश करने पर मांसपेशियों को आराम मिल सकता है और कुछ लोगों को जोड़ों की जकड़न या सामान्य मांसपेशियों के दर्द में अस्थायी राहत महसूस हो सकती है। लहसुन में एलिसिन समेत कई सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, हालांकि त्वचा पर लगाने से इनके चिकित्सीय फायदे कितने प्रभावी हैं, इसके पर्याप्त प्रमाण सीमित हैं।
2. सर्दी-जुकाम में गर्माहट का एहसास
सर्दियों में कुछ लोग इस तेल को छाती, पीठ या पैरों के तलवों पर लगाते हैं। मालिश से शरीर को गर्माहट मिल सकती है और आराम महसूस हो सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि इससे फेफड़ों का कफ पिघलता है या सर्दी-जुकाम का इलाज हो जाता है।
3. थकान और शरीर की जकड़न में आराम
दिनभर की थकान के बाद गर्म तेल से पैरों या शरीर की हल्की मालिश आराम देने वाली हो सकती है। इससे मांसपेशियों को रिलैक्स महसूस करने में मदद मिल सकती है।
4. लहसुन में मौजूद प्राकृतिक गुण
लहसुन में एंटीमाइक्रोबियल गुणों वाले यौगिक पाए जाते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लहसुन वाला तेल हर तरह के स्किन इंफेक्शन या फंगल इंफेक्शन का इलाज कर सकता है। त्वचा पर संक्रमण होने पर सही जांच और उपचार जरूरी है।
5. सोने से पहले मालिश से आराम
गुनगुने तेल से पैरों की हल्की मालिश कुछ लोगों को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकती है। इससे तनाव कम महसूस हो सकता है और नींद के लिए बेहतर माहौल बन सकता है।
घर पर कैसे बनाएं लहसुन वाला सरसों का तेल?
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए:
- 100 मिलीलीटर सरसों का तेल
- 8 से 10 लहसुन की कलियां
- आधा से एक छोटा चम्मच अजवाइन या मेथी दाना, वैकल्पिक
बनाने का तरीका
- एक साफ कड़ाही में सरसों का तेल डालकर धीमी आंच पर गर्म करें।
- इसमें हल्की कुचली हुई लहसुन की कलियां डालें।
- चाहें तो थोड़ी मात्रा में अजवाइन भी डाल सकते हैं।
- लहसुन को धीमी आंच पर पकाएं और ध्यान रखें कि वह जले नहीं।
- लहसुन हल्का सुनहरा होने पर गैस बंद कर दें।
- तेल को ठंडा होने दें और फिर छानकर साफ कांच की बोतल में रख लें।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
सेंसिटिव स्किन वाले लोग: लहसुन त्वचा पर जलन, लालिमा या एलर्जी पैदा कर सकता है। इस्तेमाल से पहले थोड़ी मात्रा त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर पैच टेस्ट करें।
कटे या घायल हिस्से पर न लगाएं: खुले घाव, कटी त्वचा, जलने या ताजा चोट वाली जगह पर यह तेल लगाने से जलन बढ़ सकती है।
छोटे बच्चों पर इस्तेमाल से बचें: खासकर नवजात और बहुत छोटे बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के लहसुन वाला तेल उनकी त्वचा पर न लगाएं।
एलर्जी होने पर तुरंत बंद करें: तेल लगाने के बाद तेज जलन, सूजन, खुजली या लाल चकत्ते दिखाई दें तो इस्तेमाल बंद कर दें।
मालिश करते समय इन बातों का रखें ध्यान
तेल को बहुत ज्यादा गर्म करके त्वचा पर न लगाएं। हल्का गुनगुना तेल ही इस्तेमाल करें और मालिश भी हल्के हाथों से करें। मालिश के तुरंत बाद ठंडे पानी से न नहाएं और शरीर को अचानक बहुत ठंडी हवा के संपर्क में लाने से बचें।
जरूरी बात: सरसों और लहसुन के तेल की मालिश सामान्य मांसपेशियों की जकड़न या आराम के लिए घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन गठिया, साइटिका, लगातार जोड़ों का दर्द, सुन्नपन, सांस लेने में परेशानी या किसी गंभीर बीमारी का यह प्रमाणित इलाज नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।