Gallstones Emergency: क्या पित्त की पथरी का ऑपरेशन तुरंत कराना जरूरी है? जानिए सच!
पित्त की पथरी यानी Gallbladder Stone आजकल काफी लोगों में देखने को मिलती है। खास बात यह है कि कई लोगों के पित्ताशय में पथरी होने के बावजूद उन्हें लंबे समय तक किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन कुछ मामलों में यही पथरी दर्द, उल्टी, सूजन और दूसरी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल होता है कि अगर पित्त की पथरी है तो क्या तुरंत ऑपरेशन करवाना जरूरी है? या फिर इसे कुछ समय तक ऐसे ही छोड़ा जा सकता है?डॉक्टरों के मुताबिक इसका जवाब हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं होता। अगर पथरी है लेकिन कोई लक्षण नहीं हैं, तो कई मामलों में तुरंत सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन बार-बार दर्द या किसी तरह की जटिलता होने पर ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है।
1. पित्त की पथरी मिलने पर क्या हर किसी का ऑपरेशन होता है?
नहीं।
अगर जांच के दौरान पित्त की पथरी का पता चला है, लेकिन मरीज को कोई लक्षण नहीं हैं और पित्ताशय तथा पित्त की नलियां सामान्य हैं, तो आमतौर पर तुरंत ऑपरेशन नहीं किया जाता।
ऐसे मरीजों में डॉक्टर उनकी स्थिति के अनुसार निगरानी और आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं। इसलिए केवल रिपोर्ट में पथरी दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को तुरंत सर्जरी करवानी ही पड़ेगी।
2. किन लक्षणों में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है?
अगर पित्त की पथरी की वजह से बार-बार परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर सर्जरी पर विचार कर सकते हैं।
इसका सबसे आम संकेत पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द हो सकता है। कई बार यह दर्द काफी तेज होता है और कुछ घंटों तक बना रह सकता है। कुछ लोगों में भारी या तला-भुना खाना खाने के बाद भी दर्द शुरू हो सकता है।
इसके अलावा—
- पेट में भारीपन या असहजता
- भूख कम लगना
- मतली या उल्टी
- बार-बार पेट दर्द होना
जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर जांच के बाद लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी यानी पित्ताशय को निकालने की सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।
3. बुखार और लगातार दर्द हो तो सावधान हो जाएं
अगर पेट दर्द के साथ बुखार, ठंड लगना, लगातार उल्टी या आंखों और त्वचा का पीला पड़ना यानी पीलिया हो रहा है, तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ये लक्षण पित्त की नली में रुकावट या संक्रमण जैसी जटिलता की ओर इशारा कर सकते हैं। कुछ मामलों में पित्ताशय में गंभीर सूजन या अग्न्याशय में सूजन यानी पैंक्रियाटाइटिस भी हो सकता है।
ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना जरूरी है।
4. पित्ताशय में सूजन हो जाए तो कब होता है ऑपरेशन?
पित्त की पथरी के कारण कई बार Acute Cholecystitis, यानी पित्ताशय में अचानक सूजन, हो सकती है।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर मरीज की हालत, जांच और सर्जरी के लिए उसकी उपयुक्तता देखकर उपचार तय करते हैं। NICE की गाइडलाइन के अनुसार, उपयुक्त मरीजों में पुष्टि होने के बाद शुरुआती लैप्रोस्कोपिक सर्जरी को आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि हर मरीज का इलाज उसकी स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
5. अगर पथरी पित्त की नली में पहुंच जाए तो?
यह स्थिति भी गंभीर हो सकती है।
अगर पथरी कॉमन बाइल डक्ट यानी CBD में चली जाती है, तो पित्त का प्रवाह रुक सकता है और पीलिया या संक्रमण जैसी समस्या पैदा हो सकती है।
ऐसे मामलों में कुछ मरीजों में पहले ERCP के जरिए पित्त की नली से पथरी निकाली जाती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार पित्ताशय को निकालने की सर्जरी की जा सकती है।
इसलिए पित्त की नली में पथरी होने की स्थिति को सामान्य गॉलब्लैडर स्टोन समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
6. क्या पित्ताशय निकालने के बाद सामान्य जिंदगी जी सकते हैं?
यह सवाल भी मरीजों के मन में काफी रहता है।
पित्ताशय शरीर का ऐसा अंग नहीं है जिसके बिना सामान्य जीवन संभव न हो। लिवर पित्त बनाता रहता है, और पित्ताशय मुख्य रूप से उसे जमा करके रखता है। पित्ताशय निकालने के बाद भी लिवर पित्त बनाता रहता है, जो सीधे आंत में पहुंचता है।अधिकांश लोग पित्ताशय की सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जी सकते हैं। हालांकि ऑपरेशन के बाद खान-पान और रिकवरी को लेकर अपने डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी होता है।
आखिर कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर आपकी रिपोर्ट में पित्त की पथरी सामने आई है लेकिन कोई लक्षण नहीं हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर तय करेंगे कि सिर्फ निगरानी पर्याप्त है या उपचार की जरूरत है।लेकिन बार-बार तेज पेट दर्द, बुखार, लगातार उल्टी, पीलिया या अचानक ज्यादा परेशानी होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।सबसे जरूरी बात यह है कि पित्त की पथरी का ऑपरेशन कब करना है, इसका फैसला केवल पथरी के आकार को देखकर नहीं किया जाता। लक्षण, पथरी की जगह, पित्ताशय की स्थिति और संभावित जटिलताओं को देखकर डॉक्टर उपचार तय करते हैं।