रात में दांत किटकिटाने की आदत को न करें नजरअंदाज, तनाव से लेकर स्लीप एपनिया तक हो सकती है वजह
क्या सुबह उठते ही आपके जबड़े में दर्द रहता है? क्या दांतों में संवेदनशीलता महसूस होती है या सोते समय दांत पीसने की शिकायत है? अगर हां, तो इसकी वजह स्लीप ब्रुक्सिज्म (Sleep Bruxism) हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति नींद के दौरान अनजाने में दांतों को आपस में रगड़ता है या जबड़े को कसकर दबाता है।
कई लोगों को इस आदत का पता तब चलता है, जब उनके दांत घिसने लगते हैं या सुबह सिर और जबड़े में दर्द होने लगता है। तनाव, चिंता, कैफीन और शराब का सेवन जैसी चीजें इस समस्या से जुड़ी हो सकती हैं। इसके अलावा, नींद से संबंधित कुछ समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
तनाव और एंग्जायटी से क्यों बढ़ सकती है दांत पीसने की समस्या?
तनाव और चिंता का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि नींद और शरीर की मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में काम का दबाव, गुस्सा, बेचैनी और दिनभर की चिंता दांत भींचने या पीसने की आदत से जुड़ी हो सकती है।
हालांकि, तनाव ही हर व्यक्ति में स्लीप ब्रुक्सिज्म का कारण हो, यह जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नींद के दौरान मस्तिष्क की गतिविधियों और थोड़े समय के लिए शरीर के अधिक सक्रिय होने की प्रक्रिया का भी इसमें योगदान हो सकता है। इस समस्या के पीछे मौजूद सभी कारणों को अभी पूरी तरह समझा नहीं जा सका है।
कैफीन और शराब भी हो सकते हैं जिम्मेदार
कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक और कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन पाया जाता है। यह एक उत्तेजक पदार्थ है, जो शरीर की सतर्कता बढ़ाता है। देर शाम कैफीन लेने से कुछ लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है।
इसी तरह, शराब का सेवन और धूम्रपान भी ब्रुक्सिज्म से जुड़े संभावित कारकों में शामिल हैं। अगर आपको रात में दांत पीसने की शिकायत है, तो देर शाम कैफीन लेने से बचें और शराब व तंबाकू का सेवन सीमित करें। साथ ही, सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
स्लीप एपनिया और दांत पीसने के बीच क्या संबंध है?
स्लीप एपनिया नींद से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है या उसका प्रवाह कम हो जाता है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में गले के ऊपरी हिस्से का वायुमार्ग संकरा या बंद होने लगता है। इससे नींद बार-बार टूट सकती है।
कुछ शोधों में स्लीप एपनिया और स्लीप ब्रुक्सिज्म के बीच संबंध देखा गया है। कुछ लोगों में सांस लेने में रुकावट के आसपास जबड़े की मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ सकती है। हालांकि, दोनों समस्याओं के बीच संबंध जटिल है और यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि एक समस्या सीधे दूसरी का कारण बनती है या नहीं।
अगर आपको तेज खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस रुकने की शिकायत है या रात में हांफते हुए नींद खुलती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या बच्चों का नींद में दांत पीसना सामान्य है?
बच्चों में सोते समय दांत पीसने की आदत देखी जा सकती है। कई मामलों में यह कुछ समय बाद उम्र बढ़ने के साथ अपने आप कम हो जाती है। इसलिए अगर बच्चा कभी-कभार दांत पीसता है और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होती, तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है।
हालांकि, बच्चों में भी इस आदत के पीछे तनाव, भावनात्मक बदलाव और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। अगर बच्चे को जबड़े में दर्द होता है, दांत घिस रहे हैं या सांस लेने में परेशानी दिखाई देती है, तो डेंटिस्ट या डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
दांत पीसने की आदत से बचने के लिए क्या करें?
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तनाव कम करने के लिए नियमित व्यायाम, ध्यान या रिलैक्सेशन तकनीकों की मदद लें।
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सोने से पहले कॉफी, चाय और अन्य कैफीन वाले पेय पदार्थों से बचें।
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शराब और धूम्रपान का सेवन सीमित करें या इनसे बचें।
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रोजाना पर्याप्त नींद लें और सोने-जागने का समय नियमित रखें।
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दांतों में संवेदनशीलता, घिसाव या जबड़े में लगातार दर्द होने पर डेंटिस्ट से संपर्क करें।
रात में दांत पीसने की आदत को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से दांतों को नुकसान पहुंच सकता है। अगर सुबह उठने पर बार-बार जबड़े में दर्द, सिरदर्द या दांतों में संवेदनशीलता महसूस होती है, तो इसकी वजह जानने के लिए विशेषज्ञ से जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर डेंटिस्ट दांतों की सुरक्षा के लिए विशेष माउथगार्ड की सलाह दे सकते हैं।