दक्षिण कोरिया में अबॉर्शन पिल्स नियम पर ह्यूमन राइट्स वॉच को आपत्ति
सोल, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में अगले साल अबॉर्शन पिल्स (गर्भपात के लिए गोलियों) को औपचारिक रूप से इस्तेमाल की अनुमति देने की तैयारी के बीच मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने प्रस्तावित नियमों पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने कहा कि गर्भपात संबंधी दवाओं को मंजूरी देना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इनके इस्तेमाल पर अत्यधिक सख्त प्रतिबंध महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित तथा किफायती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल बना सकते हैं।
दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने मंगलवार को बताया, "न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने रविवार को जारी बयान में दक्षिण कोरियाई सरकार से गर्भपात की दवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की।" संगठन ने कहा कि सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही नियामकीय अनिश्चितता को दूर करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके लिए बनाए जा रहे नियमों में बदलाव की जरूरत है।
एचआरडब्ल्यू की कार्यवाहक महिला अधिकार शोध सहायक सुजैन बर्गस्टेन ने कहा कि पिल्स के इस्तेमाल की अनुमति देना महत्वपूर्ण है, लेकिन दक्षिण कोरिया को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियम इतने सख्त न हों कि महिलाएं अबॉर्शन के अधिकार से वंचित न रह जाएं या उनका खर्च वहन करना मुश्किल हो जाए।
दक्षिण कोरियाई सरकार ने सितंबर में घोषणा की थी कि वह गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक गर्भपात की दवाओं के इस्तेमाल को औपचारिक रूप से मंजूरी देने की योजना बना रही है। प्रस्ताव के तहत शुरुआती दो वर्षों में बड़े चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर ही इन दवाओं को लिख सकेंगे और सीधे उपलब्ध करा सकेंगे। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने प्रस्तावित व्यवस्था के दो प्रमुख पहलुओं पर आपत्ति जताई है। "पहला, गर्भपात की दवाओं के इस्तेमाल को गर्भावस्था के शुरुआती नौ सप्ताह तक सीमित रखना और दूसरा, शुरुआती दो वर्षों में दवाएं लिखने तथा उपलब्ध कराने का अधिकार केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों तक सीमित करना।"
संगठन का कहना है कि चिकित्सा संबंधी प्रचलित मानक गर्भावस्था के 12 सप्ताह तक दवाओं के जरिए गर्भपात की अनुमति देने का समर्थन करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिशों के मुताबिक, उचित प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्यकर्मियों का एक व्यापक समूह भी इस तरह की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा सकता है।
एचआरडब्ल्यू के अनुसार, दवाएं लिखने और उपलब्ध कराने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या सीमित रखने से महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता मिलने में बाधा आ सकती है। इसका असर खास तौर पर उन महिलाओं पर पड़ सकता है, जिन्हें बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
संगठन ने दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली से गर्भपात से जुड़े कानूनों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाने की भी अपील की है। इसके साथ ही उसने गर्भपात संबंधी सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर करने और मरीजों तथा चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने वाले पेशेवरों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने पर जोर दिया है।
दक्षिण कोरिया में गर्भपात से जुड़े कानूनी प्रावधान लंबे समय से अनिश्चितता का विषय रहे हैं। देश की संवैधानिक अदालत ने 2019 में गर्भपात पर लागू प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था और कानून में बदलाव की जरूरत बताई थी। हालांकि, इसके बाद भी संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन नहीं हो सके, जिससे गर्भपात की दवाओं के इस्तेमाल और चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता को लेकर नियामकीय खालीपन बना रहा।
सरकार का कहना है कि गर्भपात की दवाओं को औपचारिक व्यवस्था के तहत लाने का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा करना है। सरकार ने पहले भी कहा है कि महिलाओं को अप्रमाणित तरीकों का सहारा लेने के बजाय सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था के भीतर उपचार मिलना चाहिए।
--आईएएनएस
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