☰
×

CPR Guide: कार्डियक अरेस्ट में कैसे बचाएं जान? जानें सीपीआर देने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

 

कार्डियक अरेस्ट एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में कुछ ही मिनटों के भीतर मदद मिलना बेहद जरूरी होता है। समय पर सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन मिलने से व्यक्ति के बचने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, इसके लिए यह जानना जरूरी है कि सीपीआर कब देना चाहिए, इसे सही तरीके से कैसे किया जाता है और किन परिस्थितियों में छाती पर दबाव नहीं डालना चाहिए।

हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर से जुड़ी कार्डियक अरेस्ट की खबर के बाद सीपीआर की भूमिका पर चर्चा हो रही है। यह समझना जरूरी है कि सीपीआर एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है, लेकिन इससे हर व्यक्ति की जान बचने की गारंटी नहीं होती।

कब देना चाहिए CPR?

अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, बेहोश हो जाए और आवाज देने या कंधे पर हल्के से थपथपाने के बावजूद प्रतिक्रिया न दे, तो उसकी सांस की जांच करें। यदि वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है या केवल हांफ रहा है, तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका हो सकती है।

ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाएं। भारत में एम्बुलेंस के लिए 112 या उपलब्ध स्थानीय एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया जा सकता है। आसपास किसी व्यक्ति के होने पर उसे फोन करने और ऑटोमैटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध कराने के लिए कहें। मदद आने का इंतजार करने के बजाय, जरूरत होने पर तुरंत सीपीआर शुरू करें।

CPR देने का सही तरीका क्या है?

वयस्क व्यक्ति के अचानक बेहोश होने और सामान्य सांस न लेने की स्थिति में ये कदम उठाएं:

  1. सुरक्षा जांचें: पहले सुनिश्चित करें कि आसपास का माहौल सुरक्षित है।
  2. प्रतिक्रिया देखें: व्यक्ति को आवाज दें और उसके कंधे पर हल्के से थपथपाएं।
  3. आपातकालीन मदद बुलाएं: किसी को एम्बुलेंस बुलाने और AED लाने के लिए कहें। यदि आप अकेले हैं, तो फोन को स्पीकर पर रखकर आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।
  4. सही स्थिति में लिटाएं: व्यक्ति को पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएं।
  5. छाती पर दबाव दें: दोनों हाथों को छाती के बीचोंबीच, छाती की हड्डी के निचले आधे हिस्से पर रखें। एक हाथ की हथेली के ऊपर दूसरा हाथ रखें और उंगलियां आपस में फंसा लें।
  6. दबाव की गति बनाए रखें: छाती को लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर नीचे दबाएं। एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव दें और हर बार छाती को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौटने दें।
  7. सीपीआर जारी रखें: जब तक व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने न लगे, प्रशिक्षित मदद न पहुंच जाए या आप जारी रखने में असमर्थ न हों, तब तक दबाव देते रहें। यदि AED उपलब्ध हो, तो उसे चालू करके उसके निर्देशों का पालन करें।

सीपीआर का प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को जरूरत और प्रशिक्षण के अनुसार छाती पर दबाव के साथ बचाव वाली सांसें भी देनी चाहिए। यदि आप प्रशिक्षित नहीं हैं, तो वयस्क के अचानक बेहोश होने और सामान्य सांस न लेने पर केवल छाती पर दबाव देने वाला सीपीआर भी मददगार हो सकता है।

किन परिस्थितियों में CPR नहीं देना चाहिए?

हर बेहोश व्यक्ति को सीपीआर की जरूरत नहीं होती। यदि व्यक्ति बेहोश है, लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो छाती पर दबाव न दें। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता बुलाएं और उसकी सांस पर लगातार नजर रखें।

यदि व्यक्ति सामान्य रूप से सांस ले रहा है और कोई गंभीर चोट होने की आशंका नहीं है, तो उसे सुरक्षित करवट वाली स्थिति में रखा जा सकता है। चोट लगने की आशंका होने पर उसे अनावश्यक रूप से न हिलाएं और आपातकालीन सेवाओं के निर्देशों का पालन करें।

यदि व्यक्ति होश में है या सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो सीपीआर शुरू न करें। इसके बजाय उसकी स्थिति पर नजर रखें और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता लें।

क्या CPR देने से हर व्यक्ति की जान बच जाती है?

सीपीआर दिल की सामान्य धड़कन को अपने आप बहाल करने की गारंटी नहीं देता। यह छाती पर दबाव के जरिए शरीर में खून का प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है, ताकि आपातकालीन चिकित्सा सहायता और जरूरत पड़ने पर डिफिब्रिलेशन दिया जा सके।

कार्डियक अरेस्ट में हर मिनट कीमती होता है। सीपीआर शुरू करने में देरी से बचने की संभावना कम हो सकती है। इसलिए सीपीआर का प्रशिक्षण लेना, लक्षण पहचानना और तुरंत आपातकालीन मदद बुलाना बेहद जरूरी है।

ध्यान दें: यह सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी है। वास्तविक आपात स्थिति में तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।