अफगानिस्तान को भारत ने भेजी दवाएं और चिकित्सा सामग्री
नई दिल्ली, 27 सितंबर (आईएएनएस)। भारत ने हमेशा की तरह एक बार फिर जिम्मेदार पड़ोसी का फर्ज अदा करते हुए अफगानिस्तान को जरूरी जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा सामग्री भेजी है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस खेप के काबुल पहुंचने की जानकारी दी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इससे संबंधित एक बयान जारी किया। बताया कि अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत की मानवीय सहायता जारी है।
उन्होंने आगे लिखा, "भारत से एक और खेप काबुल पहुंच गई है, जिसमें शहर के सरकारी अस्पताल के लिए जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल सामग्री शामिल हैं। अफगान लोगों के लिए भारत की मानवीय सहायता में स्वास्थ्य सेवाएं हमेशा से अहम रही हैं।"
भारत हमेशा से ही अफगानिस्तान को मेडिकल एड पहुंचाने में तत्पर रहा है। पिछले दो महीनों की ही बात करें तो भारत ने मानवीय सहायता के तहत अगस्त और सितंबर में अफगानिस्तान को आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की महत्वपूर्ण खेप भेजी थी।
20 अगस्त को काबुल स्थित एक सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सा सामग्रियों की खेप सौंपी गई थी। वहीं सितंबर के शुरुआती दिनों में मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिए भारत ने 16 मीट्रिक टन से अधिक दवाओं और डायग्नोस्टिक किट्स की बड़ी खेप सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी थी।
भारत हमेशा कहता रहा है कि इस मानवीय सहायता का मकसद अफगानिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, बीमारियों की रोकथाम करना और वहां के आम नागरिकों की मदद करना है।
विदेश मंत्रालय ने विभिन्न प्रेस वार्ता में कहा है कि द्विपक्षीय संबंध काफी पुराने हैं, लेकिन पिछले एक साल में अफगानिस्तान के साथ हमारा जुड़ाव और मजबूत हुआ है। इसमें कूटनीतिक स्तर पर बातचीत, मानवीय सहायता और विकास सहयोग कार्यक्रम शामिल हैं। आगे भी अफगानिस्तान के साथ हमारे संबंध और सहयोग इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ते रहेंगे।
जून में भी भारत ने काबुल को पांच टन आवश्यक दवाइयां भेजी थीं, जो अफगान लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इससे पहले 22 मई को भारत ने काबुल को 20 टन बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) और टेटनस एवं डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन से जुड़ी जरूरी सामग्री भेजी थी, ताकि अफगान बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूती मिल सके।
--आईएएनएस
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