Water Purifier Tips: पानी साफ दिखने के बावजूद हो सकता है पीने लायक नहीं, जानें TDS क्या है और RO कब जरूरी होता है
घर में आने वाला पानी देखने में बिल्कुल साफ हो, तब भी यह जरूरी नहीं कि वह पीने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो। पानी में कई ऐसे घुले हुए तत्व, रसायन और सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं, जिनका पता केवल देखकर नहीं लगाया जा सकता। ऐसे में पानी की गुणवत्ता समझने के लिए TDS की जांच उपयोगी साबित होती है। आजकल बाजार में मिलने वाले TDS मीटर और RO वाटर प्यूरीफायर की मदद से पानी में घुले पदार्थों की मात्रा मापने और उसे कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, केवल TDS की रीडिंग के आधार पर पानी को सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता।
क्या होता है पानी का TDS?
TDS का पूरा नाम Total Dissolved Solids है। यह पानी में घुले हुए विभिन्न पदार्थों की कुल मात्रा को दर्शाता है। इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड, सल्फेट और दूसरे खनिज व लवण शामिल हो सकते हैं।
पानी में ये तत्व प्राकृतिक चट्टानों और मिट्टी से घुलकर आ सकते हैं। इसके अलावा, कुछ परिस्थितियों में औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि गतिविधियों और दूषित जलस्रोतों के कारण भी पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
TDS को आमतौर पर PPM यानी Parts Per Million या मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/L) में मापा जाता है। इसकी मात्रा अधिक होने पर पानी का स्वाद नमकीन या कड़वा लग सकता है। हालांकि, TDS कम होने का अर्थ यह नहीं है कि पानी में हानिकारक बैक्टीरिया या रसायन मौजूद नहीं हैं।
पानी का TDS चेक करना क्यों जरूरी है?
पानी की गुणवत्ता को समझने के लिए TDS की जांच एक शुरुआती कदम हो सकती है। इससे पता चलता है कि पानी में घुले पदार्थों की कुल मात्रा कितनी है और पानी के शुद्धिकरण के लिए अतिरिक्त उपायों की जरूरत हो सकती है या नहीं।
घर पर TDS मीटर की मदद से पानी की रीडिंग ली जा सकती है। यदि पानी का TDS बहुत अधिक है, तो उसके स्रोत और उसमें मौजूद घुले तत्वों की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
लेकिन ध्यान रखें कि TDS मीटर केवल घुले हुए पदार्थों का अनुमान देता है। यह पानी में मौजूद सभी हानिकारक रसायनों, कीटनाशकों, बैक्टीरिया या वायरस की पहचान नहीं करता। इसलिए पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के अनुसार प्रयोगशाला में पानी की जांच भी करानी चाहिए।
RO टेक्नोलॉजी पानी का TDS कैसे कम करती है?
RO का पूरा नाम Reverse Osmosis है। यह एक ऐसी तकनीक है, जिसका इस्तेमाल पानी में घुले कई लवणों और अन्य पदार्थों की मात्रा कम करने के लिए किया जाता है।
इस प्रक्रिया में पानी को दबाव के साथ एक विशेष अर्धपारगम्य झिल्ली से गुजारा जाता है। झिल्ली पानी को पार होने देती है, जबकि घुले हुए कई पदार्थों को रोक देती है। इस तरह पानी में TDS की मात्रा कम हो सकती है।
RO प्यूरीफायर उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है, जहां पानी में घुले लवणों की मात्रा अधिक हो या पानी की जांच में ऐसे पदार्थ मिले हों जिन्हें हटाने के लिए RO की जरूरत हो। हालांकि, RO से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता भी स्रोत के पानी, मशीन की स्थिति और उसके रखरखाव पर निर्भर करती है।
UV और UF टेक्नोलॉजी RO से कैसे अलग हैं?
वाटर प्यूरीफायर खरीदते समय केवल TDS नहीं, बल्कि पानी के स्रोत और उसमें मौजूद संभावित दूषित तत्वों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
• RO: पानी में घुले कई लवणों और कुछ अन्य दूषित पदार्थों को कम करने में मदद करता है।
• UV: पराबैंगनी किरणों की मदद से पानी में मौजूद कई हानिकारक सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने में मदद करता है।
• UF: एक विशेष झिल्ली के जरिए कई सूक्ष्म कणों और कुछ सूक्ष्मजीवों को रोक सकता है। यह आमतौर पर घुले हुए लवणों को नहीं हटाता।
किसी एक तकनीक से पानी के सभी प्रकार के दूषित तत्वों को हटाने की गारंटी नहीं होती। इसलिए प्यूरीफायर का चुनाव पानी की जांच के आधार पर करना बेहतर है।
कितना TDS होने पर पानी पीने योग्य माना जाता है?
पानी में TDS की मात्रा के साथ-साथ उसमें मौजूद अन्य पदार्थों की जानकारी भी जरूरी है। सामान्य तौर पर कम TDS वाला पानी भी दूषित हो सकता है, जबकि अधिक TDS का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि पानी में सभी तत्व हानिकारक हैं।
इसलिए सिर्फ TDS मीटर पर दिखाई देने वाले नंबर को देखकर RO खरीदने या पानी पीने का फैसला नहीं करना चाहिए। पानी के स्रोत, स्वाद, संभावित प्रदूषण और जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखना जरूरी है।
घर के लिए सही वाटर प्यूरीफायर कैसे चुनें?
वाटर प्यूरीफायर खरीदने से पहले इन बातों पर ध्यान दें:
1. पानी का TDS और जरूरत के अनुसार अन्य दूषित तत्वों की जांच कराएं।
2. पानी नगर निगम, बोरवेल या टैंकर में से कहां से आता है, इसे ध्यान में रखें।
3. जांच रिपोर्ट के अनुसार RO, UV या UF जैसी तकनीक का चुनाव करें।
4. प्यूरीफायर के फिल्टर समय पर बदलें और मशीन की नियमित सर्विस कराएं।
5. अगर पानी के रंग, गंध या स्वाद में अचानक बदलाव आए, तो केवल TDS जांचने के बजाय पानी की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराएं।