साइबर ठगों पर लगेगी लगाम! जानिए ‘अभय’ सिस्टम कैसे करेगा डिजिटल अरेस्ट और फर्जी नोटिस की पहचान
देश भर में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) 'अभय' नाम से एक नया AI चैटबॉट लॉन्च करने जा रहा है। इस चैटबॉट को 20 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा, जिसका मकसद लोगों को धोखाधड़ी वाले नोटिस पहचानने में मदद करना और उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे घोटालों से बचाना है।
किस मौके पर इसे लॉन्च किया जाएगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खास पहल को सूर्यकांत दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित D.P. कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान लॉन्च करेंगे। यह कार्यक्रम CBI के पहले डायरेक्टर, धरमनाथ प्रसाद कोहली की याद में आयोजित किया जाता है।
अभय' चैटबॉट क्या करेगा?
यह AI-आधारित चैटबॉट आम नागरिकों को यह पता लगाने में मदद करेगा कि उन्हें मिला कोई नोटिस असली है या नकली। आजकल, जालसाज़ सरकारी एजेंसियों का रूप धरकर नकली दस्तावेज़ भेजते हैं, लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं। 'अभय' का मकसद इस डर को दूर करना है, ताकि लोग बिना घबराए सही जानकारी हासिल कर सकें और खुद को धोखाधड़ी से बचा सकें।
'डिजिटल अरेस्ट' घोटाला कैसे काम करता है?
फिलहाल, साइबर अपराधी बेहद चालाकी से लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे ईमेल या सोशल मीडिया के ज़रिए धोखाधड़ी वाले नोटिस भेजते हैं, और उन्हें असली दिखाने के लिए सरकारी मुहरों और कानूनी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। फिर पीड़ित को बताया जाता है कि उसका नाम किसी बड़े अपराध, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स से जुड़े मामले में आया है। डर का माहौल बनाकर, वे पीड़ित को वीडियो कॉल पर उलझाए रखते हैं और उन्हें यकीन दिलाते हैं कि वे 'डिजिटल अरेस्ट' में हैं। इसके बाद, पीड़ित पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव डाला जाता है, यह झूठा भरोसा दिलाकर कि ऐसा करने से उनकी असली गिरफ्तारी टल जाएगी।
बढ़ती साइबर धोखाधड़ी और भारी आर्थिक नुकसान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तरह की साइबर धोखाधड़ी से अब तक पूरे देश में लगभग ₹54,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान हो चुका है। यह आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि साइबर अपराध कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है, और इससे निपटने के लिए नए तकनीकी समाधानों की कितनी सख्त ज़रूरत है।
अभय' आपकी मदद कैसे करेगा?
'अभय' जैसे टूल्स लोगों में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाएंगे, और साथ ही लोगों को तुरंत और सही जानकारी भी देंगे। इससे जालसाज़ों द्वारा पैदा किए गए डर और भ्रम के माहौल को खत्म करने में मदद मिलेगी। 'अभय' चैटबॉट का मुख्य काम धोखाधड़ी वाले नोटिस और संदेशों की पहचान करना है। अगर किसी व्यक्ति को कोई संदिग्ध नोटिस मिलता है, तो वह इस सिस्टम का इस्तेमाल करके उसकी असलियत की जाँच कर सकता है। AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए, यह चैटबॉट नोटिस में इस्तेमाल की गई भाषा, फ़ॉर्मेटिंग और दूसरी चीज़ों का विश्लेषण करके यह पता लगाता है कि वह असली है या नकली। इससे यह पक्का होता है कि लोगों को तुरंत सही जानकारी मिले, जिससे वे घबराहट में आकर कोई जल्दबाज़ी वाला या गलत कदम उठाने से बच सकें।
**डर को खत्म करना ही सबसे बड़ा मकसद है
साइबर जालसाज़ों का सबसे बड़ा हथियार उनके शिकार लोगों का डर और भ्रम होता है। कानूनी शब्दावली, सरकारी मुहरों और सख़्त भाषा का इस्तेमाल करके, वे ऐसा माहौल बना देते हैं कि नोटिस पाने वाला व्यक्ति इतना ज़्यादा घबरा जाता है कि वह साफ़ तौर पर सोच भी नहीं पाता और न ही कोई सही फ़ैसला ले पाता है। 'अभय' का मकसद इसी डर को खत्म करना है। यह यूज़र्स को शांत रहने और सही फ़ैसले लेने में मदद करेगा, जिससे वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकेंगे।
**यह सिस्टम कैसे काम करेगा?**
यह चैटबॉट एक डिजिटल असिस्टेंट की तरह काम करेगा। जैसे ही कोई यूज़र प्लेटफ़ॉर्म पर कोई नोटिस या मैसेज अपलोड करेगा, यह सिस्टम उसे स्कैन करके उसकी असलियत की जाँच करेगा। इसके अलावा, यह यूज़र को ज़रूरी सलाह भी देगा—जैसे कि तुरंत कौन से कदम उठाने चाहिए या किससे संपर्क करना चाहिए। इस तरह, यह सिस्टम न सिर्फ़ पहचान करने की सुविधा देता है, बल्कि व्यावहारिक मार्गदर्शन भी देता है।