Tech Tips: हैकर्स और ऑनलाइन ट्रैकिंग से बचाना है अपना डेटा? फोन में तुरंत बदलें ये 7 सेटिंग्स
आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल जितना आसान हुआ है, ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़े खतरे भी उतने ही बढ़े हैं। कई वेबसाइट्स कुकीज, ट्रैकिंग पिक्सल और डिवाइस की पहचान करने वाली तकनीकों के जरिए यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटा सकती हैं। वहीं, ऐप्स को दी गई अनावश्यक परमिशन और असुरक्षित Wi-Fi नेटवर्क निजी डेटा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
सिर्फ ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करने या Incognito मोड इस्तेमाल करने से पूरी ऑनलाइन ट्रैकिंग बंद नहीं होती। ऐसे में कुछ जरूरी सेटिंग्स बदलकर और सुरक्षित डिजिटल आदतें अपनाकर अपनी जानकारी को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है। आइए जानते हैं डेटा की सुरक्षा के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. ब्राउजर की प्राइवेसी सेटिंग्स करें मजबूत
वेबसाइट्स कुकीज और दूसरी ट्रैकिंग तकनीकों के जरिए आपकी ब्राउजिंग से जुड़ी जानकारी एकत्र कर सकती हैं। इससे बचने के लिए समय-समय पर थर्ड-पार्टी कुकीज और साइट डेटा की समीक्षा करें। ब्राउजर में उपलब्ध ट्रैकिंग प्रोटेक्शन और प्राइवेसी सेटिंग्स को भी चालू रखें।
इसके अलावा, प्राइवेसी पर ध्यान देने वाले सर्च इंजन का इस्तेमाल करें और सार्वजनिक या साझा डिवाइस पर अपना अकाउंट खुला न छोड़ें। ध्यान रखें कि Incognito मोड मुख्य रूप से डिवाइस पर ब्राउजिंग हिस्ट्री सेव होने से रोकता है, यह आपको हर तरह की ऑनलाइन ट्रैकिंग से नहीं बचाता।
2. फ्री Wi-Fi इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी
कॉफी शॉप, एयरपोर्ट, होटल और लाइब्रेरी में मिलने वाला फ्री Wi-Fi सुविधाजनक जरूर है, लेकिन अनजान नेटवर्क से जुड़ना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे नेटवर्क पर बैंकिंग और संवेदनशील वित्तीय लेनदेन करने से बचें, खासकर तब जब नेटवर्क की विश्वसनीयता की पुष्टि न हो।
जरूरत पड़ने पर मोबाइल डेटा या किसी भरोसेमंद नेटवर्क का इस्तेमाल करें। सार्वजनिक Wi-Fi पर हमेशा HTTPS वाली वेबसाइट्स खोलें और किसी संदिग्ध नेटवर्क के नाम पर भरोसा करके उसमें लॉगिन न करें।
3. VPN और एन्क्रिप्शन का करें इस्तेमाल
VPN इंटरनेट कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करने और वेबसाइट्स से आपका वास्तविक IP एड्रेस छिपाने में मदद कर सकता है। हालांकि, VPN पूरी तरह गुमनाम रहने की गारंटी नहीं देता। इसलिए किसी भी VPN ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा कलेक्शन से जुड़ी शर्तें जरूर पढ़ें।
इसके साथ ही, निजी बातचीत के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन वाले मैसेजिंग ऐप्स और जरूरी फाइलों के लिए सुरक्षित स्टोरेज का इस्तेमाल करें। इससे संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा बेहतर हो सकती है।
4. ऐप परमिशन और लोकेशन एक्सेस की करें जांच
कई ऐप्स कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स और लोकेशन जैसी परमिशन मांगते हैं। इनमें से कुछ अनुमतियां ऐप के कामकाज के लिए जरूरी हो सकती हैं, लेकिन हर ऐप को सभी परमिशन देना सही नहीं है।
फोन की Settings में जाकर App Permissions की समीक्षा करें और गैर-जरूरी परमिशन बंद कर दें। लोकेशन एक्सेस को जहां संभव हो, केवल ऐप इस्तेमाल करते समय चालू रखने का विकल्प चुनें। GPS, Bluetooth और Wi-Fi जैसी सुविधाओं को भी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करें।
5. फोन और ऐप्स को समय-समय पर करें अपडेट
स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स के पुराने वर्जन में सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियां हो सकती हैं। इन्हें दूर करने के लिए फोन में ऑटोमैटिक सिक्योरिटी अपडेट चालू रखें और ऐप्स को आधिकारिक ऐप स्टोर से अपडेट करें।
जिन ऐप्स का इस्तेमाल लंबे समय से नहीं कर रहे हैं, उन्हें हटाना भी बेहतर है। इससे अनावश्यक ऐप परमिशन और संभावित सुरक्षा जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
6. हर वेबसाइट पर एक जैसा पासवर्ड न रखें
एक ही पासवर्ड कई वेबसाइट्स पर इस्तेमाल करने से किसी एक अकाउंट का पासवर्ड लीक होने पर दूसरे अकाउंट भी खतरे में पड़ सकते हैं। इसलिए हर महत्वपूर्ण अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड बनाएं।
पासवर्ड में बड़े और छोटे अक्षरों, नंबरों तथा विशेष चिन्हों का मिश्रण रखें। पासवर्ड मैनेजर की मदद से इन्हें सुरक्षित तरीके से संभाल सकते हैं। जहां सुविधा उपलब्ध हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) भी चालू करें। अलग-अलग अकाउंट्स के लिए अलग ईमेल या यूजरनेम का इस्तेमाल भी कुछ स्थितियों में ऑनलाइन पहचान को आपस में जोड़ना कठिन बना सकता है।
7. स्क्रीन लॉक और फोन की सुरक्षा सेटिंग्स रखें चालू
फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में स्क्रीन लॉक आपके निजी डेटा को सुरक्षित रखने की पहली परत है। मजबूत PIN, पासवर्ड या बायोमेट्रिक लॉक का इस्तेमाल करें और स्क्रीन को कुछ मिनट की निष्क्रियता के बाद अपने आप लॉक होने के लिए सेट करें।
अगर फोन में स्टोरेज एन्क्रिप्शन, डिवाइस खोजने और जरूरत पड़ने पर रिमोट लॉक या डेटा मिटाने की सुविधा उपलब्ध है, तो उसे भी सेटअप कर लें। इसके अलावा, अनजान नंबरों से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और ईमेल या मैसेज के साथ आए अटैचमेंट को खोलने से पहले उनकी विश्वसनीयता जांचें।
ध्यान रखें: ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कोई एक सेटिंग पर्याप्त नहीं है। मजबूत पासवर्ड, नियमित अपडेट, सीमित ऐप परमिशन और सतर्क इंटरनेट इस्तेमाल को अपनी आदत बनाकर आप हैकिंग और अनावश्यक ऑनलाइन ट्रैकिंग के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।