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साइंस फिक्शन बनी हकीकत! रोबोट ने खुद दिमाग का जटिल ऑपरेशन कर सबको चौंकाया, मेडिकल दुनिया हैरान

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से मेडिकल साइंस में बढ़ रहा है। अब एक ऐसा प्रयोग चर्चा में है, जिसने भविष्य में AI की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक AI एजेंट ने मिर्गी से पीड़ित चूहे के लिए खुद जीन थेरेपी का विकल्प चुना, दिमाग में इंजेक्शन लगाने की जगह तय की और रोबोटिक मशीन की मदद से दवा पहुंचाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया।

इस प्रयोग की सबसे दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि AI को सिर्फ एक लक्ष्य दिया गया था—चूहे के मिर्गी के दौरों को कम करना। उसे सीधे यह निर्देश नहीं दिया गया कि कौन-सा इलाज चुने या दिमाग के किस हिस्से को निशाना बनाए। हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि चूहे के दौरे वास्तव में कम हुए या नहीं, इसका नतीजा अभी सामने नहीं आया है।

AI ने 18 जीन थेरेपी विकल्पों में से चुना इलाज

शोधकर्ता Gabriel Ocana-Santero की सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, AI एजेंट को एक स्प्रेडशीट में जीन थेरेपी के कई विकल्प दिए गए थे। उसका काम उपलब्ध विकल्पों का विश्लेषण करना और मिर्गी के दौरों को कम करने के लिए उपयुक्त उपचार चुनना था।

बताया गया है कि AI ने ऐसा उपचार चुना, जिसका उद्देश्य दिमाग के उन न्यूरॉन्स की गतिविधि को बढ़ाना था, जो तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया में GABA नाम के न्यूरोट्रांसमीटर की भूमिका अहम होती है। GABA दिमाग में तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित करने वाले प्रमुख रासायनिक संदेशवाहकों में से एक है।

AI ने इसके बाद दिमाग के लैटरल एंटोरहिनल कॉर्टेक्स को उपचार के लिए चुना। रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले के पीछे मिर्गी से जुड़े तंत्रिका संकेतों और उपलब्ध वैज्ञानिक शोध का विश्लेषण था।

तीन रिसर्च पेपर पढ़कर तय की इंजेक्शन की जगह

इस प्रयोग में AI की भूमिका सिर्फ इलाज का विकल्प चुनने तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंट ने तीन वैज्ञानिक रिसर्च पेपर का अध्ययन किया और उनके आधार पर दिमाग में इंजेक्शन लगाने के लिए उपयुक्त जगह निर्धारित की।

इसके बाद उसने मोटराइज्ड सर्जिकल रिग यानी मोटर से चलने वाली सर्जिकल मशीन को संचालित किया। बताया गया है कि मशीन के जरिए करीब पांच मिनट में 250 नैनोलीटर दवा दिमाग में पहुंचाई गई।

इस दौरान कैमरे की मदद से प्रक्रिया पर नजर रखी गई, ताकि किसी संभावित समस्या या रक्तस्राव का पता लगाया जा सके। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रयोग में AI के साथ मानव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सक की निगरानी भी शामिल थी।

मशीन में गड़बड़ी पकड़ते ही AI ने रोक दिया ऑपरेशन

इस पूरे प्रयोग का सबसे उल्लेखनीय हिस्सा उस समय सामने आया, जब AI एजेंट ने मशीन की पोजिशनिंग या कैलिब्रेशन में संभावित समस्या का पता लगाया।

रिपोर्ट के अनुसार, AI ने सर्जिकल प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। शोधकर्ता ने दोबारा प्रयास किया, लेकिन एजेंट ने फिर भी आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। बाद में मशीन में वास्तविक तकनीकी समस्या होने की बात सामने आई।

इस घटना को AI की सुरक्षा व्यवस्था और निर्देशों का पालन करने की क्षमता के उदाहरण के रूप में पेश किया जा रहा है। खास बात यह है कि एजेंट ने कथित तौर पर अपने निर्माता के दोबारा प्रयास करने पर भी सुरक्षा चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया।

सर्जरी के दौरान रखे गए थे कड़े सुरक्षा इंतजाम

चूहे के दिमाग पर किया गया यह प्रयोग बेहद संवेदनशील था। इसलिए रिपोर्ट के मुताबिक, एक लाइसेंस प्राप्त पशु चिकित्सक ने प्रक्रिया के महत्वपूर्ण और संभावित रूप से अपरिवर्तनीय चरणों की निगरानी की।

इसके अलावा, चिकित्सक के पास एक फिजिकल इमरजेंसी किल-स्विच भी था। किसी भी तरह की गड़बड़ी या खतरे की स्थिति में इसका इस्तेमाल करके मशीन को तुरंत रोका जा सकता था।

इससे स्पष्ट होता है कि प्रयोग में AI को पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ने के बजाय मानव निगरानी और आपातकालीन सुरक्षा उपायों को भी शामिल किया गया था।

दूसरे AI मॉडल्स ने क्यों किया इनकार?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस प्रयोग से पहले दो अन्य Claude मॉडल्स ने लाइव सर्जरी करने से इनकार कर दिया था।

बताया गया कि एक मॉडल ने जैविक प्रयोग की प्रकृति को देखते हुए आगे बढ़ने से मना कर दिया, जबकि दूसरे मॉडल ने अभ्यास प्रक्रिया पूरी करने के बाद वास्तविक सर्जरी से ठीक पहले पीछे हटने का फैसला किया। इसकी एक वजह यह चिंता बताई गई कि सर्जरी के बीच AI से संपर्क टूटने या उसका संचालन बाधित होने पर जानवर को नुकसान पहुंच सकता है।

आखिरकार, रिपोर्ट के अनुसार, Claude Sonnet मॉडल ने प्रयोग की प्रक्रिया पूरी की। हालांकि, इन मॉडल्स के नाम, संस्करण और प्रयोग के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

क्या चूहे की मिर्गी ठीक हो गई?

यह इस पूरे प्रयोग से जुड़ा सबसे अहम सवाल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सर्जरी के बाद चूहा ठीक हो गया और उसके रिकवर करने की बात कही गई है। लेकिन केवल सर्जरी पूरी हो जाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि इलाज प्रभावी साबित हुआ।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उपचार के बाद चूहे के मिर्गी के दौरों की संख्या या उनकी गंभीरता में कितनी कमी आई। इसके लिए आगे के परीक्षण और वैज्ञानिक आंकड़ों की जरूरत होगी।

मेडिकल साइंस में AI की भूमिका कितनी बदल सकती है?

यह प्रयोग भविष्य में मेडिकल रिसर्च में AI की संभावित भूमिका की ओर इशारा करता है। अगर ऐसे सिस्टम की क्षमता और सुरक्षा को बड़े स्तर पर वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया जाता है, तो वे शोधकर्ताओं को उपचार के विकल्पों का विश्लेषण करने, वैज्ञानिक साहित्य से जानकारी जुटाने और प्रयोगों की कुछ प्रक्रियाओं को संचालित करने में मदद कर सकते हैं।

लेकिन फिलहाल इसे इंसानों के दिमाग की सर्जरी करने में सक्षम AI का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। यह एक जानवर पर किया गया प्रयोग है, जिसमें मानव विशेषज्ञों की निगरानी और आपातकालीन सुरक्षा उपाय भी मौजूद थे।