उत्तर कोरियाई आईटी वर्कर्स हथियार कार्यक्रमों के लिए जुटा रहे थे धन, अमेरिका ने 10 लोगों और एक संस्था पर लगाया प्रतिबंध
वाशिंगटन, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका ने स्थानीय समय अनुसार बुधवार को 10 लोगों और एक संस्था पर प्रतिबंध लगा दिया, जिन पर उत्तर कोरियाई आईटी वर्कर स्कीम का समर्थन करने का आरोप है। आरोप है कि यह नेटवर्क अमेरिकी कंपनियों के साथ धोखाधड़ी कर रहा था और हथियार कार्यक्रमों के लिए पैसे जुटा रहा था।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई उत्तर कोरिया और रूस में मौजूद वर्कर्स और बिचौलियों को निशाना बनाकर की गई, जिनमें क्रिप्टोकरेंसी बदलने और उत्तर कोरियाई अधिकारियों की ओर से पैसा ट्रांसफर करने वाले लोग भी शामिल हैं।
ओएफएसी (ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल) के इस फैसले के बाद अमेरिका में इन लोगों की संपत्ति और अमेरिकी लोगों के पास मौजूद इनकी संपत्ति ब्लॉक हो जाएगी। वित्त मंत्रालय ने बताया कि उत्तर कोरियाई एजेंटों ने फर्जी दस्तावेज, चोरी की गई पहचान और फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल करके अमेरिका और सहयोगी देशों की वैध कंपनियों में नौकरियां हासिल कीं। विभाग के अनुसार उत्तर कोरियाई सरकार उनकी सैलरी का ज्यादातर हिस्सा ले लेती है।
मंत्रालय का आरोप है कि ये स्कीम उत्तर कोरिया के सामूहिक विनाश के हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए करोड़ों डॉलर जुटाती हैं। नेटवर्क क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल करके पैसे कमाता और ट्रांसफर करता है।
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, "उत्तर कोरियाई शासन अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाना और उनका शोषण करना जारी रखे हुए है।" पैसा जुटाने के अलावा इन वर्कर्स ने कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुंच का इस्तेमाल मालवेयर डालने, संवेदनशील डेटा निकालने और गोपनीय जानकारी चुराने के लिए किया, हालांकि मंत्रालय ने इस बार जिन कंपनियों को नुकसान पहुंचा है, उनके नाम नहीं बताए।
जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें रूसी बिचौलिया विटोल्ड विक्टोरोविच ओबर्टास भी शामिल है। आरोप है कि जनवरी 2025 से उसने उत्तर कोरियाई अधिकारियों के लिए लगभग 2 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी बदली और कम से कम 1.25 मिलियन डॉलर के अन्य लेनदेन किए। उसकी गतिविधियों में अमनोकगांग टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट कंपनी से जुड़े लेनदेन भी शामिल थे, जिसे ओएफएसीए ने मार्च में प्रतिबंधित किया था।
एक अन्य टारगेट रूसी नागरिक इल्या अलेक्जेंड्रोविच बॉयकोव पर पहले से प्रतिबंधित कंपनी 'एलिस' का समर्थन करने का आरोप है। 2024 से उसने 3.5 मिलियन डॉलर के बराबर क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन किए, लेनदेन पर नजर रखी और लॉजिस्टिक मदद दी।
ओएफएसी ने उत्तर कोरियाई नागरिकों किम की ह्योक और किम ह्यो डोंग को भी प्रतिबंधित किया, जो रूस में आईटी वर्कर्स के अलग-अलग समूहों का नेतृत्व करते थे।
किम की ह्योक 'एलिस' वर्कर्स पर निगरानी रखता था और यह सुनिश्चित करता था कि वे वित्तीय लक्ष्य पूरे करें। आरोप है कि उसने 2024 से इस समूह के लिए लगभग 500,000 डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर की। किम ह्यो डोंग पर लॉजिस्टिक सपोर्ट देने, प्रतिबंधों से बचने में मदद करने और दिसंबर 2023 से कम से कम 100,000 डॉलर से अधिक की वित्तीय संपत्ति के ट्रांसफर की सुविधा देने का आरोप है।
जिस संस्था पर प्रतिबंध लगाया गया है, वह फर्स्ट फाइनेंशियल एंड टेक्निकल डेवलपमेंट सेंटर है, जिसे रूस में काम करने वाला उत्तर कोरिया-नियंत्रित संगठन बताया गया है। आरोप है कि इसके आईटी वर्कर्स ने प्योंगयांग के लिए कई मिलियन डॉलर जुटाए हैं।
इस सेंटर से जुड़े छह उत्तर कोरियाई वर्कर्स को भी प्रतिबंधित किया गया है। इनकी पहचान किम क्योंग जू, री थाए चोल, सो ह्योन जिन, हान यू सोंग, किम सुंग ग्वान और ह्योन से इल के रूप में हुई है। आरोप है कि उन्होंने 2025 से इस संगठन के लिए 750,000 डॉलर से अधिक जुटाए हैं।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी लोगों को ब्लॉक की गई संपत्ति से जुड़े लेनदेन करने से रोका गया है, जब तक कि उन्हें अधिकृत या छूट न दी गई हो। ब्लॉक किए गए लोगों के स्वामित्व वाली 50 प्रतिशत या उससे अधिक वाली संस्थाएं भी इसके दायरे में आएंगी।
--आईएएनएस
वीकेयू/वीसी