मोबाइल फोन 'गुड गवर्नेंस' का टूल बना, 5 लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे : पीएम मोदी
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (आईएमसी) 2026 के 10वें एडिशन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर, डिजिटल इंडिया और मोबाइल फोन की बदलती भूमिका पर विस्तार से बात की।
पीएम मोदी ने कहा कि बीते 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन सिर्फ आधुनिक कम्युनिकेशन का माध्यम नहीं रहा बल्कि यह गुड गवर्नेंस का भी अहम टूल बनकर सामने आया है। और ये हमारे डिजिटल इंडिया विजन के कोर में रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके लिए टेलीकॉम सेक्टर में हर जरूरी रिफॉर्म्स किए गए। इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया गया। हमने फोकस किया कि मोबाइल फोन और अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर भारत में ही बने। ऐसे हर प्रयास से मोबाइल फोन और डेटा तक भारत के आम नागरिक की पहुंच और सुलभ हो गई और आज ये भारत के लोगों की 'इज ऑफ लिविंग' बढ़ा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक भारत में डिजिटल डिवाइड बहुत बड़ी चुनौती थी। आधुनिक टेक्नोलॉजी एक प्रिविलेज बनती जा रही थी। यानी जिसके पास साधन है, वही आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ ले सकता था, भारत में यही स्थिति बनती जा रही थी।
डिजिटल इंडिया अभियान से हमने इस स्थिति को बदलने की ठानी और इसके सेंटर में मोबाइल फोन को लेकर आए। ये टेक्नोलॉजी के डेमोक्रेटाइजेशन का बहुत बड़ा प्रयास था। प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट की कनेक्टिविटी ने एजुकेशन, हेल्थ और गवर्नमेंट सर्विसेज को बिना बाधा चालू रखा। आज दूर-सुदूर गांव, गरीब के बच्चे भी क्वालिटी नॉलेज एक्सेस कर पा रहे हैं। डिजिटल लर्निंग सबकी पहुंच में आ रही है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन अब सिर्फ बात करने या चैट करने का जरिया नहीं रहा है। इसने लोगों का आना-जाना कम किया है, लंबा इंतजार खत्म किया है, खर्च घटाया है और सुविधाएं बढ़ाई हैं। यही टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा है जो सीधे आम लोगों को मिल रहा है।
पीएम ने कहा, "डिजिटल गवर्नेंस ने इन हालात को बदल दिया है। आज, सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध हैं। सरकारी मदद अब सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के ज़रिए, लगभग 50 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे हैं। अगर पुरानी व्यवस्था होती, तो सरकार का 5 लाख करोड़ रुपए का लीकेज हो जाता।"
बीते दशक में भारत के टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का निरंतर विस्तार हुआ है। रिमोट एरियाज में टावर्स लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर का अभूतपूर्व विस्तार हुआ और डेटा भी सस्ता हुआ। इससे इकोनॉमी के नए सेक्टर्स का भी निर्माण हुआ है। इससे टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन सेक्टर में नए कंज्यूमर्स भी बढ़े और नए क्रिएटर्स की भी एक नई जनरेशन तैयार हुई।
पीएम मोदी ने गेमिंग सेक्टर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, आप गेमिंग का ही सेक्टर देखिए। एक अनुमान है कि आज भारत में 50 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी तरह से गेमिंग सेक्टर से जुड़े हैं। इसमें बहुत बड़ी संख्या भारत के युवाओं की है। टियर 2 और टियर 3 शहरों का युवा भी इससे जुड़ा है। अब वो गेम से जुड़ने के साथ ही ई-स्पोर्ट में प्रतियोगिता कर रहा है, गेमिंग कंटेंट बना रहा है और नए गेमिंग बिजनेस खड़े कर रहा है। यानी भारत में मोबाइल फोन आज गेमिंग कंसोल भी है और क्रिएशन का स्टूडियो भी बन गया है।
उन्होंने कहा कि आज जब टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी का इतना महत्व है, तब इससे जुड़े सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को भी चाक-चौबंद करना आवश्यक है। फोन की सिक्योरिटी और नेटवर्क की सिक्योरिटी हम सभी की प्राथमिकता है। डीपफेक कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है, ये भी हम देख रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि हम इसके लिए एक ग्लोबल फ्रेमवर्क पर काम करें।
पीएम मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने कंज्यूमर से क्रिएटर बनने की यात्रा तय की है। अब भारत, उस लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है, जहां प्रोडक्ट, डिजाइन भी भारत में होगा, उसकी टेक्नोलॉजी और आईपी भी भारत की होगी।
--आईएएनएस
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