यूपीआई को वैश्विक बनाने की दिशा में भारत का अगला कदम, भुगतान से आगे बढ़कर क्रेडिट, बीमा और निवेश पर देना होगा जोर: पीएम मोदी
मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। मंगलवार को मुंबई में 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 का शुभारंभ हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर समेत कई दिग्गज हस्तियां सम्मिलित हुईं। 8 से 11 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) के शुभारंभ अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के डिजिटल भुगतान और फिनटेक क्षेत्र की उपलब्धियों को रेखांकित किया और कहा कि देश अब केवल डिजिटल भुगतान तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने उद्योग जगत से आह्वान किया कि फिनटेक को अगले चरण में ले जाकर क्रेडिट, बीमा, बचत, निवेश और पेंशन जैसे क्षेत्रों में इसकी हिस्सेदारी बढ़ाई जाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल घरेलू स्तर पर डिजिटल वित्तीय समावेशन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय भुगतान प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर जोड़ना भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूपीआई आज कई देशों तक पहुंच चुका है, लेकिन यह केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत को अब अन्य देशों की भुगतान प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच भुगतान प्रणाली का एकीकरण इस स्तर तक पहुंच चुका है कि दोनों देशों के बीच लेनदेन उसी तरह संभव है जैसे किसी एक शहर के दो इलाकों के बीच। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जहां भारत का व्यापक व्यापारिक संबंध है और जो देश भारत के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, वहां यूपीआई आधारित भुगतान ढांचे का विस्तार किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान प्रणाली की बढ़ती ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल अगस्त महीने में ही यूपीआई के माध्यम से 24 अरब से अधिक लेनदेन हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान उनकी 10 मिनट की बातचीत के समय में ही औसतन 50 लाख से अधिक यूपीआई ट्रांजेक्शन हो चुके होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि डिजिटल भुगतान भारत की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि प्रौद्योगिकी समावेशन का सबसे प्रभावी माध्यम है और यूपीआई ने इसे साबित भी किया है। उन्होंने कहा कि फिनटेक की सबसे बड़ी सफलता यह रही है कि उसने उन लोगों तक भी बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई हैं, जहां पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था कभी नहीं पहुंच पाई थी।
हालांकि उन्होंने कहा कि वर्तमान में फिनटेक बाजार का बड़ा हिस्सा भुगतान सेवाओं पर केंद्रित है। अब समय आ गया है कि उद्योग भुगतान से आगे बढ़े और क्रेडिट, बीमा, बचत, निवेश तथा पेंशन जैसे क्षेत्रों में डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार करे। इससे वित्तीय समावेशन को और मजबूती मिलेगी तथा अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया इस समय संघर्षों, अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऊर्जा और वस्तुओं की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है तथा वैश्विक व्यापार भी विभिन्न तनावों से प्रभावित है।
उन्होंने कहा कि ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज कर रही है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संदेश है। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत की आर्थिक मजबूती दुनिया को नया विश्वास प्रदान कर रही है और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का पहला चौथाई भाग समाप्त हो चुका है और अब नई तकनीकों का युग शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन, क्वांटम तकनीक और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियां वित्तीय क्षेत्र में अभूतपूर्व संभावनाएं पैदा कर रही हैं।
उन्होंने उद्योग से आग्रह किया कि इन तकनीकी अवसरों को वास्तविक आर्थिक प्रभाव में बदलने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत का फिनटेक सेक्टर वैश्विक नवाचार का केंद्र बन सकता है।
प्रधानमंत्री ने फिनटेक कंपनियों के लिए कुछ प्रमुख प्राथमिकताएं भी सुझाईं। उन्होंने कहा कि भारत में साइबर सुरक्षा को विश्वस्तरीय बनाना होगा ताकि डिजिटल लेनदेन पूरी तरह सुरक्षित रहें। साथ ही उद्योग को अपने स्वयं के मजबूत और पारदर्शी डेटा सुरक्षा मानक विकसित करने चाहिए।
उन्होंने एक मजबूत फिनटेक-नियामक-उद्योग नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर भी जोर दिया, जिससे नवाचार और उपभोक्ता सुरक्षा के बीच संतुलन कायम रखा जा सके। इसके अलावा उन्होंने एक फिनटेक उपभोक्ता संरक्षण सूचकांक विकसित करने का सुझाव दिया, जिसके आधार पर विभिन्न कंपनियों का पारदर्शी मूल्यांकन किया जा सके।
--आईएएनएस
डीबीपी