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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: वैश्विक साझेदारी और नई तकनीकों से बदलेगा एआई का भविष्य

 

नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में दुनिया भर के विशेषज्ञ और कंपनियां हिस्सा ले रही हैं और एआई के भविष्य को लेकर अपने विचार साझा कर रही हैं। इसी कड़ी में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के वाइस-प्रोवोस्ट (अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहभागिता) गेरेंट रीस ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि एआई समिट का उत्साह और पैमाना बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि यूसीएल और टेक महिंद्रा के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी से रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों को वास्तविक व्यावसायिक समस्याओं पर काम करने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के संबंधों के लिए यह बेहद उत्साहजनक समय है। भारत एक आधुनिक और उद्यमशील अर्थव्यवस्था है, जहां लोग एआई, उन्नत चिकित्सा, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली, एम्स और आईआईसी बेंगलुरु जैसे भारतीय संस्थानों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर की रिसर्च को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।

वहीं, स्विट्जरलैंड पवेलियन से डॉ. लीना रोबरा ने कहा कि उनका देश पारदर्शिता और खुलेपन के सिद्धांत पर एआई को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने बताया कि स्विस एआई पहल के तहत 'एपर्टस' नाम का ओपन-सोर्स लार्ज लैंग्वेज मॉडल पेश किया गया है, जिसमें डेटा और मॉडल की कार्यप्रणाली पारदर्शी रहती है, जिनका उद्देश्य एआई का उपयोग सार्वजनिक हित में, जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ करना है।

इसके अलावा, फ्रांस की ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट कमिश्नर एस्टेल डेविड ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि फ्रांस इस समिट में भाग लेकर बेहद खुश है। उन्होंने बताया कि इस बार फ्रांस का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पवेलियन है, जिसमें करीब 30 फ्रेंच एआई कंपनियां शामिल हैं। साथ ही इस सप्ताह लगभग 120 फ्रेंच कंपनियां भारत आई हैं, जो भारत-फ्रांस साझेदारी को और मजबूत बनाएंगी।

वही, फुजीत्सु के जंगो ओकाई ने बताया कि उनकी कंपनी एआई सॉफ्टवेयर के साथ क्वांटम कंप्यूटिंग और सुपरकंप्यूटिंग तकनीक लेकर आई है। क्वांटम कंप्यूटर पारंपरिक कंप्यूटर से बिल्कुल अलग और अधिक शक्तिशाली तकनीक है, जो सिमुलेशन, ऑप्टिमाइजेशन और वैज्ञानिक खोजों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और एआई के लिए मजबूत डेटा सेंटर और स्वदेशी कंप्यूटिंग क्षमता जरूरी होगी।

वहीं, ओरिसर्व के सह-संस्थापक माज अंसारी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनकी कंपनी पिछले सात वर्षों से ब्रांड और ग्राहकों के बीच बातचीत को ऑटोमेट कर रही है। उनकी तकनीक बिना इंतजार के सटीक जवाब देने में सक्षम है और भारत की विभिन्न बोलियों को समझ सकती है। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोग फोन के जरिए ही बैंक या अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे, बिना शाखा में जाए।

--आईएएनएस

डीबीपी/