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HoloBot Technology: पीएम मोदी ने AI अवतार से की बातचीत, जानिए कैसे जीवंत हुईं स्वामी चिन्मयानंद की यादें

 

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन में विज्ञान और आध्यात्मिकता के मेल ने लोगों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के डिजिटल अवतार से संवाद किया। स्वामी चिन्मयानंद का निधन 1993 में हो गया था। ऐसे में उनके पुराने वीडियो, आवाज और हाव-भाव को डिजिटल रूप में प्रस्तुत करने वाली तकनीक चर्चा का विषय बन गई।

इस डिजिटल प्रस्तुति के लिए होलोबॉट तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई। इसके जरिए स्वामी जी की छवि को मंच पर इस तरह दिखाया गया कि वह दर्शकों के सामने मौजूद होने का आभास दे रही थी। आइए जानते हैं कि होलोबॉट तकनीक क्या है और इसके पीछे कौन-सी तकनीकें काम करती हैं।

क्या है होलोबॉट तकनीक?

होलोबॉट आम तौर पर ऐसी डिजिटल व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति की आभासी छवि और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मिलाकर संवाद करने वाला डिजिटल अवतार तैयार किया जाता है। इसमें 3D विजुअल इफेक्ट्स, डिजिटल प्रोजेक्शन, कंप्यूटर ग्राफिक्स और AI जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हो सकता है।

इस तरह का अवतार केवल तस्वीर या वीडियो दिखाने तक सीमित नहीं होता। यदि उसमें AI आधारित संवाद प्रणाली जोड़ी गई हो, तो वह सवालों के जवाब भी दे सकता है। हालांकि, इसकी क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस तरह तैयार किया गया है और उसमें कौन-से सॉफ्टवेयर तथा उपकरण इस्तेमाल किए गए हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर होलोबॉट वास्तविक होलोग्राम नहीं होता। कई प्रस्तुतियों में स्क्रीन, प्रोजेक्शन या विशेष विजुअल तकनीकों से 3D जैसा प्रभाव पैदा किया जाता है।

स्वामी चिन्मयानंद का डिजिटल अवतार कैसे बनाया जा सकता है?

किसी दिवंगत व्यक्ति का डिजिटल अवतार बनाने के लिए उसके पुराने वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरों और सार्वजनिक भाषणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सामग्रियों के आधार पर AI मॉडल व्यक्ति की आवाज, बोलने के अंदाज और चेहरे के भावों से मिलती-जुलती डिजिटल प्रस्तुति तैयार कर सकता है।

ऐसे डिजिटल अवतार को बनाने में आम तौर पर कई तकनीकों की भूमिका हो सकती है:

  • वॉइस क्लोनिंग: पुरानी रिकॉर्डिंग के आधार पर व्यक्ति जैसी आवाज तैयार करना।
  • AI आधारित संवाद: सवालों के जवाब देने के लिए भाषा मॉडल या पहले से तैयार संवाद का इस्तेमाल।
  • डिजिटल फेस और एनिमेशन: चेहरे के भाव, होंठों की गति और हाथों के हाव-भाव दिखाना।
  • 3D विजुअल तकनीक: डिजिटल अवतार को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत करना।

हालांकि, स्वामी चिन्मयानंद के इस विशेष अवतार को तैयार करने में किन उपकरणों, रिकॉर्डिंग और AI प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया, इसकी विस्तृत तकनीकी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इसलिए किसी खास तकनीक या प्रक्रिया को निश्चित रूप से इस्तेमाल किया गया बताना उचित नहीं होगा।

पीएम मोदी और डिजिटल अवतार के बीच क्या हुआ संवाद?

कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वामी चिन्मयानंद के डिजिटल अवतार के बीच संवाद प्रस्तुत किया गया। इसमें फरवरी 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात का उल्लेख किया गया, जब नरेंद्र मोदी स्वामी जी को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद की शताब्दी से जुड़े कार्यक्रम के लिए आमंत्रित करने पहुंचे थे।

प्रस्तुति में स्वामी जी के पुराने विचारों और संदेशों को डिजिटल संवाद के माध्यम से सामने रखा गया। अवतार के जरिए युवाओं की भूमिका, सनातन परंपरा और देश के भविष्य जैसे विषयों पर संदेश प्रस्तुत किए गए। संवाद में प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना से जुड़ी बातें भी शामिल थीं।

हालांकि, डिजिटल अवतार द्वारा कही गई बातों को स्वामी जी की वास्तविक समय में दी गई प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता। ऐसी प्रस्तुति में संवाद पुराने भाषणों, उपलब्ध सामग्री, तैयार स्क्रिप्ट या AI से उत्पन्न जवाबों पर आधारित हो सकता है।

विज्ञान और आध्यात्मिकता का नया संगम

डिजिटल अवतारों की मदद से ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के विचारों और भाषणों को नए तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। शिक्षा, संग्रहालयों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आध्यात्मिक आयोजनों में इस तकनीक का इस्तेमाल दर्शकों के अनुभव को अधिक संवादात्मक बना सकता है।

इसके साथ ही, दिवंगत व्यक्तियों की आवाज और छवि का इस्तेमाल करते समय उनकी विरासत, प्रामाणिकता और डिजिटल सामग्री की पारदर्शिता का ध्यान रखना भी जरूरी है।

स्वामी चिन्मयानंद के डिजिटल अवतार से जुड़ी यह प्रस्तुति इसी वजह से चर्चा में है। यह दिखाती है कि AI और विजुअल तकनीकें पुराने भाषणों और विचारों को आधुनिक मंच पर किस तरह नए रूप में पेश कर सकती हैं।