राज्यों को प्रक्रियाएं सरल बनाकर किसान-केंद्रित शासन पर ध्यान देना चाहिए : शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहाण ने शुक्रवार को राज्यों से अनावश्यक प्रक्रियागत जटिलताओं को समाप्त करने और किसान-केंद्रित शासन व्यवस्था को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शासन का प्रभाव केवल फाइलों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, अग्रिम अनुमानों के मुताबिक भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि भारत चावल उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश बन चुका है। इसके साथ ही गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि नियम और प्रक्रियाएं किसानों की सुविधा के लिए होती हैं, किसान नियमों के लिए नहीं होते। इसलिए सभी राज्यों को ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए जो किसानों के लिए सरल, प्रभावी और लाभकारी हों।
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ भारतीय कृषि के समग्र विकास पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने राज्यों से समयबद्ध, परिणामोन्मुखी और किसान-केंद्रित कार्ययोजनाओं को लागू करने का आग्रह किया तथा कृषि मंत्रियों से व्यक्तिगत रूप से पहल का नेतृत्व कर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन को कृषि विकास के लिए एक मजबूत ‘टीम इंडिया’ मंच में बदल दिया है।
चौहान ने जोर देकर कहा कि भारत को खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, खेती को अधिक लाभकारी बनाने तथा पोषण सुरक्षा को समान महत्व देने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से दलहन मिशन, तिलहन मिशन, कपास मिशन और अन्य प्रमुख कृषि अभियानों की नियमित समीक्षा करने का आग्रह किया। साथ ही वैज्ञानिकों से किसानों की जरूरतों के अनुरूप तेज, व्यावहारिक और मांग-आधारित अनुसंधान करने की अपील की।
उन्होंने विशेष रूप से अरहर, सोयाबीन और तिलहन फसलों के लिए कम अवधि में तैयार होने वाली तथा अधिक उपयुक्त किस्मों के विकास पर जोर दिया।
चौहान ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल दस्तावेज बनकर नहीं रहने चाहिए, बल्कि खेत स्तर पर उनका सक्रिय उपयोग होना चाहिए, ताकि किसान मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और उर्वरकों के सही उपयोग को बेहतर ढंग से समझ सकें।
--आईएएनएस
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