पेट्रोलियम संशोधन विधेयक में बड़े बदलाव की तैयारी, बिना लाइसेंस गतिविधियों पर 25 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रस्ताव
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम क्षेत्र में नियामकीय ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोलियम (संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत लाइसेंस संबंधी मामूली उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रावधान किया गया है, जबकि बिना लाइसेंस गतिविधियां संचालित करने और पेट्रोलियम अवसंरचना को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर मामलों के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी मसौदे के अनुसार, जो गतिविधियां कानून के तहत लाइसेंस प्राप्त करने के बाद ही की जा सकती हैं, उन्हें बिना लाइसेंस संचालित करने पर तीन वर्ष तक की जेल, 25 करोड़ रुपए तक का जुर्माना या दोनों लगाए जा सकते हैं।
सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि उल्लंघन लगातार जारी रहता है, तो दोषी इकाई पर प्रति दिन 10 लाख रुपए तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
मसौदे में धोखाधड़ी से लाइसेंस हासिल करने के मामलों को भी गंभीर अपराध माना गया है। यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी, फर्जी पहचान या अन्य बेईमान तरीकों से लाइसेंस प्राप्त करता है, तो उसे पांच साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार ने पेट्रोलियम अवसंरचना की सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। प्रस्ताव के अनुसार, पेट्रोलियम सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने, ईंधन चोरी करने या लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे मामलों में पहली बार दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की कैद और 15 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
यदि ऐसा अपराध दोबारा किया जाता है, तो सजा और अधिक कठोर हो जाएगी। दूसरी या उसके बाद की गलती पर सात वर्ष तक की कैद और 25 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
मसौदे में महत्वपूर्ण पेट्रोलियम अवसंरचना को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों के लिए और भी सख्त दंड प्रस्तावित किया गया है। ऐसे मामलों में 10 वर्ष तक की जेल और 25 करोड़ रुपए तक का जुर्माना या हुए नुकसान की लागत, जो भी कम हो, लगाया जा सकता है।
हालांकि, सरकार ने लाइसेंस की शर्तों और नियमों के मामूली उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए एक प्रशासनिक दंड तंत्र बनाया जाएगा, जिसके तहत नियुक्त निर्णायक अधिकारी कार्रवाई करेगा।
मसौदे के अनुसार, लाइसेंस शर्तों के पहले उल्लंघन पर 2.5 करोड़ रुपए तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि उल्लंघन दोबारा होता है, तो जुर्माने की सीमा बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए तक की जा सकती है।
इसके अलावा, निर्णायक अधिकारी संबंधित लाइसेंसधारी को सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश भी दे सकेगा और आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस के निलंबन, रद्दीकरण या दायरा सीमित करने की सिफारिश भी कर सकता है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि "लाइसेंस प्राप्त गतिविधि" में पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, आयात, भंडारण, रिफाइनिंग, परिवहन और मिश्रण से जुड़ी वे सभी गतिविधियां शामिल हैं, जिनके लिए कानून के तहत लाइसेंस आवश्यक है।
सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य मामूली नियामकीय उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देना है, जबकि सार्वजनिक सुरक्षा, पेट्रोलियम संचालन और महत्वपूर्ण अवसंरचना को प्रभावित करने वाले गंभीर अपराधों के खिलाफ मजबूत निवारक व्यवस्था बनाए रखना है।
मंत्रालय ने उद्योग जगत, हितधारकों और आम जनता से 30 अक्टूबर 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा।
--आईएएनएस
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