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ओएनजीसी ने लद्दाख में दूसरे भू-तापीय कुएं की ड्रिलिंग पूरी की

 

नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने लद्दाख की पुगा घाटी में अपने दूसरे भू-तापीय कुएं की ड्रिलिंग पूरी कर ली है। यह भारत के पहले पायलट भू-तापीय बिजली संयंत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ओएनजीसी की अनुसंधान एवं विकास इकाई ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने लगभग एक महीने में 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर 1,000 मीटर गहराई तक इस कुएं की ड्रिलिंग की।

ओएनजीसी के बयान के अनुसार, यह कार्य पहले जियोथर्मल (भू-तापीय) ड्रिलिंग अभियान की तुलना में कम समय और कम लागत में पूरा किया गया।

कंपनी के अनुसार, यह नया कुआं पुगा में खोदे गए पहले भू-तापीय कुएं की सफलता पर आधारित है। पहले कुएं से पानी के उबलने के तापमान से अधिक तापमान वाली भाप निकली थी, जिससे इस क्षेत्र में भू-तापीय ऊर्जा की अपार संभावनाओं की पुष्टि हुई थी।

ओएनजीसी ने कहा कि दूसरा कुआं भारत के पहले 1 मेगावाट इलेक्ट्रिक (एमडब्ल्यूई) पायलट भू-तापीय बिजली संयंत्र के विकास में मदद करेगा और देश में भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग का मार्ग खोल सकता है।

परियोजना के अगले चरण में 1 मेगावाट क्षमता वाला पायलट जियोथर्मल बिजली संयंत्र स्थापित करने और दीर्घकाल में लद्दाख को विश्वसनीय आधारभूत बिजली उपलब्ध कराने के लिए भू-तापीय संसाधनों का विकास करने की योजना है।

पूर्वी लद्दाख में स्थित पुगा भू-तापीय क्षेत्र को भारत का सबसे संभावनाशील भू-तापीय संसाधन माना जाता है।

भू-तापीय ऊर्जा पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद प्राकृतिक गर्मी का उपयोग करके बिजली उत्पादन और ताप उपलब्ध कराती है। यह कम-कार्बन उत्सर्जन वाली चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाली ऊर्जा का स्रोत है। सौर और पवन ऊर्जा के विपरीत, यह मौसम पर कम निर्भर होने के कारण अधिक विश्वसनीय मानी जाती है।

हालांकि, पुगा क्षेत्र को लंबे समय से भारत का सबसे संभावनाशील भू-तापीय क्षेत्र माना जाता रहा है और यहां समय-समय पर खोज संबंधी कार्य भी किए गए हैं, लेकिन तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के कारण अब तक व्यावसायिक स्तर पर जियोथर्मल बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका है।

इस बीच, भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता 2014 के 81 गीगावाट से बढ़कर वर्तमान में 288 गीगावाट हो गई है, जो 256 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती है।

इसी अवधि में सौर ऊर्जा क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर 155 गीगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता 21 गीगावाट से बढ़कर 56.4 गीगावाट हो गई है।

--आईएएनएस

एबीएस