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पूर्वोत्तर क्षेत्र अब वैश्विक पहचान वाले स्थलों का घर, 'अष्टलक्ष्मी' ने वैश्विक मानचित्र पर बनाई मजबूत पहचान: वित्त मंत्री सीतारमण

 

नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक स्तर के कई महत्वपूर्ण स्थलों का घर बन चुका है, जो सतत और समावेशी विकास का उदाहरण पेश कर रहे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में वित्त मंत्री ने कहा कि "अष्टलक्ष्मी (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा)" अब वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से अपनी पहचान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के पहले 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक राज्य से लेकर दुनिया की सबसे लंबी दो-लेन सुरंग और सबसे ऊंचे गर्डर रेल पुल तक, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने कई वैश्विक उपलब्धियां हासिल की हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक एक्स पोस्ट में कहा कि पूर्वोत्तर के आठ राज्य कभी विकास की मुख्यधारा से काफी दूर माने जाते थे। लेकिन आज ये राज्य भारत की विकास यात्रा के नए इंजन के रूप में उभर रहे हैं, जो समृद्धि, शक्ति और अपार संभावनाओं से भरे हुए हैं।

एक आधिकारिक फैक्ट शीट के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। यह परिवर्तन लगातार नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के कारण संभव हुआ है।

सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार ने क्षेत्र की भौगोलिक दूरी और अलगाव को कम किया है। साथ ही इससे क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक पहुंच को भी मजबूती मिली है।

इसी दौरान स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक लोगों की पहुंच में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

इन बदलावों का असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है।

फैक्ट शीट में कहा गया है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अब भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा और "एक्ट ईस्ट" नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है।

यह बदलाव जलविद्युत परियोजनाओं, गैस बुनियादी ढांचे और सीमा-पार कनेक्टिविटी में किए गए निवेश की बदौलत संभव हुआ है।

इन सभी प्रयासों ने "अष्टलक्ष्मी" को विकसित भारत के भीतर सतत और समावेशी विकास के एक मॉडल के रूप में स्थापित किया है।

वर्ष 2014 से लगातार मिल रहे नीतिगत समर्थन के मार्गदर्शन में यह विकास यात्रा आगे बढ़ी है। इसमें विकास को पर्यावरणीय संवेदनशीलता, संसाधनों के कुशल उपयोग और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ संतुलित किया गया है।

पूर्वोत्तर भारत अब अवसरों और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के नए प्रवेश द्वार के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। आज "अष्टलक्ष्मी" एक ऐसे क्षेत्र का प्रतीक बन चुकी है, जो पहले से अधिक जुड़ा हुआ, अधिक मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार है।

--आईएएनएस

डीबीपी