लिवर रोग और टाइप-2 डायबिटीज से निपटने के लिए मिशन मोड में काम जरूरी : डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को विशेष आह्वान किया। उन्होंने देश में लिवर की बीमारी की महामारी और टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी से निपटने के लिए मिशन मोड में राष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाने की बात कही।
मंत्री ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए रोकथाम वाली हेल्थकेयर और बड़े पैमाने पर लोगों में जागरूकता लाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि ये बीमारियां अब पहले की तुलना में कम उम्र के लोगों में भी देखी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बीमारियों के बदलते स्वरूप को देखते हुए, इलाज-केंद्रित हेल्थकेयर से हटकर रोकथाम, शुरुआती पहचान और जीवनशैली में बदलाव की ओर बढ़ने की जरूरत है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बयान के अनुसार, मंत्री ने कहा कि भारत में लिवर की बीमारियों का बढ़ता प्रकोप और टाइप-2 डायबिटीज में तेजी से हो रही बढ़ोतरी एक बड़े मेटाबोलिक संकट का हिस्सा हैं। फैटी लिवर, हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी बीमारियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे को बढ़ावा देती हैं।
सिंह यहां इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में 'लिवर एंड मेटाबोलिक डिजीज नेटवर्क' की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर बोल रहे थे।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से चल रहा यह नेटवर्क लिवर और मेटाबोलिक बीमारियों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए मिलकर रिसर्च करने, इनोवेशन, शुरुआती पहचान और लक्षणों पर आधारित पॉलिसी बनाने के प्रयासों को मजबूत करना चाहता है।
सिंह ने इस पहल को एक अहम राष्ट्रीय मंच बताया, जिसने भारत की तेजी से बढ़ती पब्लिक हेल्थ चुनौतियों में से एक का सामना करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों, डॉक्टरों और रिसर्च करने वालों को एक साथ लाया है।
उन्होंने कहा कि लिवर और मेटाबोलिक विकारों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए लगातार वैज्ञानिक सहयोग और लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी होगी।
मंत्री ने कहा, "देश में जेनेटिक कारणों, पेट के आसपास ज्यादा चर्बी (सेंट्रल ओबेसिटी) और भारतीयों की खास शारीरिक बनावट (फिनोटाइप) के कारण यहां के लोगों में डायबिटीज, फैटी लिवर और दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। ऐसा अक्सर उन लोगों में भी देखा जाता है जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अपेक्षाकृत कम होता है।"
उन्होंने कहा कि इन विशेषताओं के कारण, कहीं और मिले सबूतों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भारतीय डेटा, भारतीय रिसर्च और भारतीय समाधानों की जरूरत और बढ़ जाती है।
मंत्री ने कहा कि लिवर शरीर का सबसे मजबूत और खुद को ठीक करने वाला अंग होने के बावजूद, अस्वस्थ खान-पान, जीवनशैली, नींद की गलत आदतों, तनावपूर्ण व्यवहार और पर्यावरण प्रदूषण के कारण लगातार दबाव में आ रहा है।
--आईएएनएस
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