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वैश्विक निवेशकों को भरोसा देने के साथ कर आधार की सुरक्षा भी जरूरी, भारत को बनाना होगा संतुलन: वरिष्ठ आयकर अधिकारी

 

नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। भारत की अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है और देश को अपने कर आधार की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक निवेशकों को स्थिर, पारदर्शी और पूर्वानुमानित नीति वातावरण उपलब्ध कराने के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। यह बात आयकर विभाग की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (अंतरराष्ट्रीय कर) मोनिका भाटिया ने बुधवार को कही।

एसोचैम द्वारा आयोजित 23वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोनिका भाटिया ने कहा कि टाइगर ग्लोबल मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला, नया आयकर अधिनियम, विकसित होते विवाद निपटान तंत्र और तेजी से बढ़ती प्रौद्योगिकी अंतरराष्ट्रीय कराधान के परिदृश्य को तेजी से बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा, "नीतिगत स्थिरता निवेशकों के विश्वास का आधार है।" मोनिका भाटिया ने यह भी बताया कि टाइगर ग्लोबल मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद सरकार ने वास्तविक और पुराने निवेशकों को अधिक स्पष्टता तथा भरोसा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।

मोनिका भाटिया ने अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (एपीए) के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब तक 1,000 से अधिक एपीए समझौते कर चुका है, जिनमें 220 से अधिक द्विपक्षीय समझौते शामिल हैं। उनका कहना था कि इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कर संबंधी अनिश्चितताओं को कम करने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल कारोबारी मॉडल बदल रही है, बल्कि कर प्रशासन को भी नई दिशा दे रही है। इससे स्थायी प्रतिष्ठान, लाभ के आवंटन और मूल्य सृजन के वास्तविक स्थान जैसे मुद्दों पर नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

भाटिया ने जोर देकर कहा कि तकनीक जिस गति से विकसित हो रही है, उसके मुकाबले मौजूदा कर नियम अपेक्षाकृत धीमी गति से बदलते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक सहमति आधारित नियमों का महत्व लगातार बढ़ता जाएगा।

सम्मेलन में एसोचैम की अंतरराष्ट्रीय कर संबंधी कार्यबल के अध्यक्ष राकेश नांगिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान अब केवल तेजी से बदलने वाले दौर में नहीं, बल्कि एक व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार, टाइगर ग्लोबल फैसला, नया आयकर कानून, वैश्विक न्यूनतम कर व्यवस्था और एआई आने वाले समय की कर व्यवस्था को आकार देंगे।

वहीं, एसोचैम की राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर परिषद के अध्यक्ष संदीप चौफला ने कहा कि सरकारें अपने कर आधार को सुरक्षित रखना चाहती हैं, जबकि करदाता स्पष्टता और निश्चितता की अपेक्षा रखते हैं।

उन्होंने कहा, "विधायी ढांचे और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।" साथ ही उन्होंने कर प्रशासन में एआई की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

सम्मेलन के दौरान टाइगर ग्लोबल फैसले के बाद का कर परिदृश्य, एआई और अंतरराष्ट्रीय कर नीति, बीईपीएस 2.0, कर संधियों का विकास, नया आयकर अधिनियम, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते, सुरक्षित कर प्रावधान तथा सीमापार कर विवाद निपटान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई।

--आईएएनएस

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