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भारत-फ्रांस ने विज्ञान और अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का लिया संकल्प

 

नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। भारत और फ्रांस ने विज्ञान, समुद्री रिसर्च और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। गुरुवार को हुई मंत्री-स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने खास तौर पर हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे सहयोग पर संतोष जताया। यह जानकारी अंतरिक्ष विभाग के एक आधिकारिक बयान में दी गई।

केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने फ्रांस के उच्च शिक्षा, रिसर्च और अंतरिक्ष मंत्री प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष में भारत-फ्रांस सहयोग के बढ़ते दायरे पर चर्चा की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत-फ्रांस की साझेदारी अब दोनों देशों के रिश्तों का एक मजबूत आधार बन चुकी है। इससे न सिर्फ तकनीकी विकास हो रहा है, बल्कि लोगों के बीच जुड़ाव भी बढ़ रहा है। साल 2026 को “इंडो-फ्रेंच ईयर ऑफ इनोवेशन” घोषित किया गया है, जो नई और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का अच्छा मौका होगा।

उन्होंने बताया कि हाल के सुधारों के बाद भारत का स्पेस सेक्टर तेजी से आगे बढ़ा है। देश में अब करीब 400 स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं और आने वाले वर्षों में स्पेस इकोनॉमी के तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी के नए मौके बनेंगे।

प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट ने भारत को अंतरिक्ष और रिसर्च सहयोग में एक भरोसेमंद और अहम साझेदार बताया। उन्होंने इसरो के साथ अपने पुराने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने पृथ्वी अवलोकन, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष खोज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।

बैप्टिस्ट ने “स्पेस फॉर ओशन अलायंस” के तहत समुद्र से जुड़े डेटा साझा करने में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा। साथ ही उन्होंने फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी 'सीएनईएस' और भारतीय संस्थानों के बीच करीबी सहयोग की बात कही। उन्होंने मानव अंतरिक्ष मिशन में भी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग, माइक्रोग्रैविटी एक्सपेरिमेंट और लंबे समय की साझेदारी शामिल है।

उन्होंने भारत को सितंबर 2026 में पेरिस में होने वाले इंटरनेशनल स्पेस समिट में सक्रिय भागीदारी के लिए भी आमंत्रित किया। साथ ही सुझाव दिया कि इसे भारत के बेंगलुरु स्पेस इवेंट के साथ जोड़ा जाए ताकि अंतरिक्ष से जुड़े मुद्दों पर एक बड़ा वैश्विक मंच तैयार हो सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन प्रस्तावों का स्वागत किया और कहा कि भारत समुद्री रिसर्च और मानव अंतरिक्ष मिशन में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत के “डीप ओशन मिशन” और लंबे समुद्री तट को इस क्षेत्र में बड़ी ताकत बताया।

डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि फ्रांस में 'नेवीआईसी' ग्राउंड स्टेशन विकसित करने पर सहयोग चल रहा है और गगनयान मिशन में फ्रांस के समर्थन की सराहना की।

उन्होंने विज्ञान और तकनीक विभाग तथा फ्रांस के प्रमुख संगठनों के बीच मजबूत हो रही साझेदारी का भी जिक्र किया। इन सहयोगों की वजह से एडवांस्ड मटेरियल्स और डिजिटल साइंस जैसे क्षेत्रों में नई पहल शुरू हुई हैं।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम