सरकार ने वाहन निर्माताओं के लिए कैफे-3 नियमों को अधिसूचित किया, ईवी इंसेंटिव को रखा बरकरार
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। सरकार ने वाहन निर्माताओं के लिए बुधवार को नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (कैफे-3) नियमों को अधिसूचित कर दिया है। साथ ही, इसमें छोटी पेट्रोल कारों के लिए प्रस्तावित अलग रियायत को हटा दिया गया है।
विद्युत मंत्रालय की ओर से अधिसूचित किए गए नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे।
हालांकि, केंद्र सरकार ने पिछले साल 909 किलोग्राम तक वजन वाली पेट्रोल कारों के लिए प्रति किलोमीटर 3 ग्राम की छूट का प्रस्ताव दिया था।
कई प्रमुख कार निर्माताओं ने इस छूट का विरोध किया।
इसके अलावा, अंतिम नियमों में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली कारों के लिए कोई अलग छूट नहीं दी गई है।
इसके बजाय, सरकार ने निर्माता के पूरे फ्लीट के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन लक्ष्य की गणना करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव किया है।
सितंबर 2025 के ड्राफ्ट में रेफरेंस गाड़ी का वजन 1,170 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया था। वहीं, फाइनल नियमों में सालाना वजन एडजस्टमेंट भी कम रखा गया है।
इन बदलावों से हल्की गाड़ियों के बेड़े को कुछ राहत मिलती है, जबकि भारी गाड़ियों के बेड़े के लिए लक्ष्य कड़े कर दिए गए हैं।
फाइनल फॉर्मूले के तहत, 909 किलोग्राम की कार के लिए वित्त वर्ष 28 में उत्सर्जन का लक्ष्य लगभग 82.8 ग्राम सीओ2 प्रति किलोमीटर है, जबकि सितंबर 2025 के ड्राफ्ट में यह लक्ष्य लगभग 76 ग्राम था। लेकिन 2,500 किलोग्राम की गाड़ी के लिए, फाइनल फाइनल फॉर्मूले के तहत लक्ष्य लगभग 142.4 ग्राम है, जबकि पहले वाले फॉर्मूले में यह लगभग 151.4 ग्राम था।
इसके अलावा, कैफे-3 के फाइनल नियमों में सुपर-क्रेडिट सिस्टम के जरिए स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों के लिए इंसेंटिव भी रखे गए हैं।
किसी भी वाहन निर्माता के फ्लीट प्रदर्शन की गिनती करते समय एक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन को तीन वाहनों के बराबर माना जाएगा।
यही 3गुना फैक्टर रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी लागू होगा।
फ्लेक्स-फ्यूल पर चलने वाले प्लग-इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 2.5 गुना फैक्टर मिलेगा, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 1.6 गुना फैक्टर मिलेगा। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को 1.1 गुना फैक्टर मिलेगा।
इसके साथ ही, नियमों में क्रेडिट-डेबिट सिस्टम भी शुरू किया गया है।
जो मैन्युफैक्चरर अपने एमिशन टारगेट से बेहतर परफॉर्म करेंगे, उन्हें क्रेडिट मिलेंगे, जबकि जो पीछे रह जाएंगे, उन पर डेबिट जमा होंगे।
--आईएएनएस
एबीएस