☰
×

डायरेक्ट-टू-डिवाइस सैटेलाइट कनेक्टिविटी: जानिए कैसे बिना मोबाइल टावर के सीधे आपके फोन तक पहुंचेगा Jio इंटरनेट

 

भारत में इंटरनेट की दुनिया अब जमीन से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंचने वाली है। देश के टेलीकॉम सेक्टर में Reliance Jio और Elon Musk की Starlink के बीच सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर मुकाबला तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में Jio ने अपने बड़े सैटेलाइट प्रोजेक्ट का रोडमैप सामने रखते हुए भविष्य की कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा प्लान पेश किया है।Jio की योजना करीब 1,600 LEO (Low Earth Orbit) सैटेलाइट्स के नेटवर्क और भारत में 23 ग्राउंड स्टेशन्स का मजबूत सिस्टम तैयार करने की है। कंपनी का मकसद मौजूदा मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क के साथ सैटेलाइट कनेक्टिविटी को जोड़कर देश के उन इलाकों तक तेज इंटरनेट पहुंचाना है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है।

6 लाख से ज्यादा गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य

Jio के प्रस्तावित सैटेलाइट नेटवर्क का फोकस सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनी दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और समुद्री इलाकों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने की तैयारी कर रही है।इसके तहत अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्रों के साथ-साथ ऊंचे पहाड़ी और बर्फीले इलाकों को भी सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। Jio का दावा है कि इस तरह की कनेक्टिविटी उन क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, जहां फाइबर केबल बिछाना या मोबाइल टावर लगाना काफी मुश्किल और महंगा है।

मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क के साथ काम करेगा सैटेलाइट सिस्टम

Jio अपने सैटेलाइट नेटवर्क को मौजूदा मोबाइल और फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि उसके पूरक नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है।

इसका मतलब है कि जहां जमीन पर मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क मौजूद हैं, वहां मौजूदा सिस्टम काम करेगा और जहां कनेक्टिविटी कमजोर या बिल्कुल नहीं है, वहां सैटेलाइट नेटवर्क मदद करेगा।

कंपनी भविष्य में सैटेलाइट के जरिए सीधे मोबाइल डिवाइस तक कॉलिंग और मैसेजिंग जैसी सेवाएं पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है। इससे ऐसे इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क पहुंचना मुश्किल है।

सिर्फ आम यूजर्स नहीं, इन क्षेत्रों में भी होगा इस्तेमाल

Jio का यह सैटेलाइट नेटवर्क केवल आम इंटरनेट यूजर्स के लिए ही नहीं होगा। इसका इस्तेमाल एविएशन, समुद्री सेवाओं, आपदा प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है।

प्राकृतिक आपदा के दौरान जब जमीन पर मौजूद टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हो जाता है, तब सैटेलाइट नेटवर्क एक वैकल्पिक संचार व्यवस्था के तौर पर काफी अहम साबित हो सकता है।

Jio बनाना चाहता है पूरा सिस्टम भारत में

Jio की योजना सिर्फ सैटेलाइट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है। कंपनी डिजाइन, इंजीनियरिंग, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग, लॉन्चिंग और ऑपरेशन सहित पूरी वैल्यू चेन को भारत में विकसित करने पर जोर दे रही है।

इसका मकसद सैटेलाइट इंटरनेट के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना और भारत में ही एक मजबूत स्वदेशी सैटेलाइट कनेक्टिविटी सिस्टम तैयार करना है।

Starlink के लिए भी भारत बड़ा बाजार

दूसरी तरफ Elon Musk की Starlink भी भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने भारत में अपने नेटवर्क और ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में काम किया है।

Starlink की ओर से भारत में कई गेटवे साइट्स तैयार किए जाने की जानकारी दी गई है। कंपनी भारतीय नियमों के मुताबिक डेटा सुरक्षा और नेटवर्क कंट्रोल को लेकर भी अपनी तैयारियां कर रही है।

हालांकि, Starlink की भारत में व्यावसायिक शुरुआत को लेकर जरूरी रेगुलेटरी और सुरक्षा मंजूरियों की प्रक्रिया अहम बनी हुई है।

Starlink ने लगाए थे आरोप, सरकार ने किया खारिज

Starlink को लेकर Elon Musk की ओर से भारत में कुछ कथित "कुलीन वर्ग" पर कंपनी की राह रोकने का आरोप लगाया गया था। उनका कहना था कि कुछ लोग अपने बाजार हितों की रक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा को रोकना चाहते हैं।

हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में सभी कंपनियों के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण रेगुलेटरी प्रक्रिया लागू है।

सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में Starlink के अलावा Jio और Bharti Airtel समर्थित OneWeb भी भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

अब शुरू होगी अंतरिक्ष से इंटरनेट की असली जंग

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट का बाजार आने वाले समय में काफी बड़ा हो सकता है। खासकर उन लाखों लोगों के लिए यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जो आज भी कमजोर या बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों में रहते हैं।एक तरफ Starlink का ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क है, तो दूसरी तरफ Jio भारत में बड़े पैमाने पर स्वदेशी सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की तैयारी कर रहा है। वहीं Airtel और Amazon जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपनी योजनाओं पर काम कर रही हैं।

यानी आने वाले समय में भारत में इंटरनेट की लड़ाई सिर्फ मोबाइल टावर और फाइबर केबल तक सीमित नहीं रहने वाली। अब मुकाबला अंतरिक्ष में भी होगा और सवाल होगा कि भारत के आसमान पर किसका सैटेलाइट नेटवर्क सबसे ज्यादा मजबूत साबित होता है।