Digital Arrest Scam: 2.13 करोड़ की ठगी ने खोली आंखें! जानिए कैसे नकली पुलिस और ED बनकर डराते हैं साइबर ठग
फरीदाबाद में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.13 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर ऑनलाइन फ्रॉड के इस खतरनाक तरीके को लेकर चिंता बढ़ गई है। साइबर थाना बल्लभगढ़ ने मामले में पंजाब के जीरकपुर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान लुधियाना निवासी 27 वर्षीय गौतम और 25 वर्षीय मोहित के रूप में हुई है। जांच में गौतम का बैंक खाता ठगी की रकम की दूसरी लेयर में सामने आया है और उसके खाते में 65 हजार रुपये आए थे।
पुलिस के अनुसार इस मामले की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी। पीड़ित परिवार को कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामले में फंसाने का डर दिखाया गया। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल करके परिवार से रकम ट्रांसफर कराई गई। रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित ने अलग-अलग बैंक लेनदेन के जरिए कुल 2 करोड़ 13 लाख 16 हजार रुपये बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब रकम वापस मांगने की कोशिश की गई तो कथित ठगों के मोबाइल नंबर बंद मिले।
क्या सच में होता है डिजिटल अरेस्ट?
सबसे जरूरी बात यह है कि साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला डिजिटल अरेस्ट कोई वास्तविक कानूनी गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं है। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की एडवाइजरी के मुताबिक ठग पुलिस अधिकारी सीबीआई नारकोटिक्स विभाग RBI ED और दूसरी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद धमकी ब्लैकमेल और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
ठग अपनी बात को सच साबित करने के लिए नकली वर्दी सरकारी दफ्तर जैसा बैकग्राउंड और फर्जी दस्तावेज तक इस्तेमाल कर सकते हैं। कई मामलों में पीड़ित को बताया जाता है कि उसका आधार कार्ड बैंक अकाउंट मोबाइल नंबर या कोई अन्य पहचान किसी गंभीर अपराध से जुड़ी है। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
पैसे मांगते ही समझ जाएं मामला संदिग्ध है
अगर कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी या किसी केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर आपसे पैसे मांग रहा है तो बेहद सतर्क हो जाएं। साइबर अपराधी अक्सर जांच खत्म करने या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। ऐसी स्थिति में घबराकर पैसा भेजने के बजाय संबंधित विभाग या नजदीकी पुलिस स्टेशन से आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। I4C भी कॉलर की पहचान सत्यापित करने और पैसे ट्रांसफर करने से पहले परिवार या भरोसेमंद लोगों से बात करने की सलाह देता है।
डिजिटल अरेस्ट कॉल आए तो क्या करें?
सबसे पहले घबराएं नहीं और किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP बैंकिंग पासवर्ड PIN या वित्तीय जानकारी न दें। वीडियो कॉल पर डराने या दबाव बनाने वाले व्यक्ति की बात पर भरोसा करके पैसे ट्रांसफर न करें। खुद संबंधित पुलिस स्टेशन या सरकारी एजेंसी के आधिकारिक नंबर से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि करें।
अगर आपके साथ वित्तीय साइबर फ्रॉड हो चुका है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। सरकारी पोर्टल के मुताबिक वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन 24 घंटे उपलब्ध है।
क्यों जरूरी है तुरंत शिकायत करना
साइबर फ्रॉड के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। शिकायत जितनी जल्दी दर्ज होगी उतनी जल्दी संबंधित बैंक और कानून प्रवर्तन एजेंसियां लेनदेन की जांच और रकम को रोकने की कोशिश कर सकती हैं। शिकायत करते समय ट्रांजैक्शन ID बैंक की जानकारी रकम तारीख और उपलब्ध स्क्रीनशॉट या अन्य सबूत तैयार रखना भी मददगार होता है।
फरीदाबाद का यह मामला बताता है कि साइबर ठग अब सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं बल्कि पुलिस और सरकारी एजेंसियों की पहचान का इस्तेमाल करके लोगों में डर पैदा कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी वीडियो कॉल पर मिली गिरफ्तारी की धमकी को सच मानकर पैसा भेजना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। सबसे सुरक्षित तरीका है शांत रहना आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करना।