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लाल-पीली-हरी बत्ती के पीछे भी साइबर खतरा! क्या हैक हो सकता है ट्रैफिक सिग्नल?
 

 

 


शहरों में ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने में सिग्नल सिस्टम की अहम भूमिका होती है। लाल, पीली और हरी बत्तियां वाहन चालकों को रुकने और आगे बढ़ने का संकेत देती हैं। लेकिन जैसे-जैसे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम डिजिटल और नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, इनके साइबर सिक्योरिटी से जुड़े खतरे भी सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई ट्रैफिक सिग्नल को हैक कर सकता है?

कुछ परिस्थितियों में संभव है साइबर अटैक

ट्रैफिक सिग्नल को सीधे किसी मोबाइल या लैपटॉप से आसानी से हैक कर लेना आम तौर पर संभव नहीं है। लेकिन अगर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम का नेटवर्क कमजोर हो, सॉफ्टवेयर में सुरक्षा खामी मौजूद हो या किसी हमलावर को सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच मिल जाए, तो सिग्नल के संचालन को प्रभावित करने का खतरा पैदा हो सकता है।

आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम में नेटवर्क सिक्योरिटी, निगरानी और अलग-अलग सुरक्षा स्तर मौजूद होते हैं। इसलिए किसी सिस्टम पर हमला करने के लिए सिर्फ सिग्नल तक पहुंच होना पर्याप्त नहीं होता।

हैक होने पर क्या हो सकता है नुकसान?

अगर किसी ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर साइबर हमला सफल हो जाए, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। सिग्नल की टाइमिंग में बदलाव होने से किसी चौराहे पर वाहनों का सामान्य प्रवाह बिगड़ सकता है।

इसके अलावा कई सिग्नलों के बीच तालमेल प्रभावित होने पर एक इलाके में अचानक ट्रैफिक जाम बढ़ सकता है। अगर लाल और हरी बत्तियों का संचालन गलत तरीके से प्रभावित हो जाए, तो सड़क दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।

कैमरे और सेंसर भी हो सकते हैं प्रभावित

आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम सिर्फ सिग्नल तक सीमित नहीं होते। इनमें ट्रैफिक कैमरे, वाहन सेंसर और कंट्रोल सेंटर जैसे कई डिजिटल सिस्टम जुड़े हो सकते हैं। साइबर हमला होने पर इनसे मिलने वाला डेटा प्रभावित हो सकता है।

इसका असर ट्रैफिक पुलिस की निगरानी और रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट पर पड़ सकता है। गलत या अधूरी जानकारी मिलने से प्रशासन के लिए जाम और अन्य यातायात समस्याओं को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

क्या आम लोगों को डरने की जरूरत है?

इसका मतलब यह नहीं है कि सड़क पर लगा कोई भी ट्रैफिक सिग्नल कभी भी आसानी से हैक किया जा सकता है। ज्यादातर आधुनिक सिस्टम में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं और उन्हें नियंत्रित करने वाले नेटवर्क सामान्य इंटरनेट कनेक्शन से अलग भी हो सकते हैं।

फिर भी जैसे-जैसे शहरों में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और कनेक्टेड तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है, साइबर सुरक्षा को मजबूत रखना बेहद जरूरी हो गया है। ट्रैफिक सिग्नल में छोटी-सी डिजिटल गड़बड़ी भी हजारों लोगों के सफर और सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।