Connected TV: भारत में बदल रहा टीवी देखने का अंदाज, 20.7 करोड़ लोगों तक पहुंचा CTV; गांवों में भी बढ़ा क्रेज
भारत में टीवी देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब दर्शक सिर्फ पारंपरिक टीवी चैनलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट टीवी और बड़ी स्क्रीन पर OTT व डिजिटल वीडियो कंटेंट देखना भी पसंद कर रहे हैं। इसी बदलाव के बीच Connected TV (CTV) और Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है।
WPP Media और The Trade Desk के साथ Ormax Media की रिसर्च के मुताबिक, भारत में CTV की पहुंच करीब 20.7 करोड़ दर्शकों तक पहुंच गई है। यह लगभग 6.2 से 6.5 करोड़ घरों के बराबर है। खास बात यह है कि 2022 की तुलना में CTV ऑडियंस लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है।
रोज करीब 3 घंटे बड़ी स्क्रीन पर वीडियो
रिपोर्ट के अनुसार भारत में CTV दर्शक औसतन 2.9 घंटे रोजाना बड़ी स्क्रीन पर वीडियो कंटेंट देखते हैं। इससे साफ है कि स्मार्ट टीवी अब केवल पारंपरिक चैनल देखने का माध्यम नहीं रह गया है।
OTT प्लेटफॉर्म, वेब सीरीज, लाइव स्पोर्ट्स और फिल्मों जैसे डिजिटल कंटेंट ने बड़ी स्क्रीन पर दर्शकों की पसंद को बदल दिया है। इंटरनेट और स्मार्ट टीवी की आसान उपलब्धता ने इस बदलाव को और रफ्तार दी है।
गांवों में तेजी से बढ़ रहा Smart TV का इस्तेमाल
CTV की ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में ग्रामीण भारत से भी मजबूत बढ़ोतरी सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण इलाकों में CTV यूजर्स की संख्या लगभग दोगुनी हुई है।
यह बदलाव विज्ञापनदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीण दर्शक अब डिजिटल कंटेंट और स्मार्ट टीवी इकोसिस्टम का हिस्सा तेजी से बन रहे हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों ने लीनियर टीवी देखना बंद कर दिया है। बल्कि अब पारंपरिक टीवी के साथ CTV भी दर्शकों की देखने की आदत में शामिल हो रहा है।
वेब सीरीज सबसे ज्यादा पसंद
बड़ी स्क्रीन पर इंटरनेट आधारित कंटेंट देखने वाले दर्शकों की पसंद की बात करें तो वेब सीरीज सबसे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 69 फीसदी CTV दर्शक वेब सीरीज देखना पसंद करते हैं।
इसके बाद क्रिकेट को 64 फीसदी और थिएट्रिकल फिल्मों को 63 फीसदी दर्शकों की पसंद मिली है। खासतौर पर क्रिकेट देखने के दौरान एक से ज्यादा लोगों के साथ बैठकर मैच देखने की आदत भी सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार CTV पर क्रिकेट देखने वाले करीब 84 फीसदी मामलों में को-व्यूइंग होता है। यानी मैच सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर देखने का चलन काफी मजबूत है।
Gen Z भी बड़ी स्क्रीन से नहीं हुआ दूर
यह धारणा कि युवा पीढ़ी सिर्फ मोबाइल पर कंटेंट देखना पसंद करती है, CTV के आंकड़े पूरी तरह सही साबित नहीं करते। रिपोर्ट के मुताबिक Gen Z यूजर्स औसतन 3.1 घंटे प्रतिदिन CTV पर बिताते हैं।
इनमें 46 फीसदी यूजर्स ने पिछले एक साल में CTV का इस्तेमाल बढ़ाया है। वहीं 77 फीसदी Gen Z दर्शक परिवार या दोस्तों के साथ CTV पर कंटेंट देखते हैं।
इससे विज्ञापनदाताओं के लिए स्मार्ट टीवी एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बनकर उभर रहा है। यानी युवाओं तक पहुंचने के लिए अब मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ बड़ी स्क्रीन को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
FAST TV क्या है और क्यों बढ़ रहा है?
CTV के साथ FAST यानी Free Ad-Supported Streaming Television भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह ऐसा स्ट्रीमिंग मॉडल है जिसमें दर्शक बिना सब्सक्रिप्शन फीस के विज्ञापनों के साथ कंटेंट देख सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार करीब एक-तिहाई CTV दर्शक FAST के बारे में जानते हैं, जबकि लगभग हर पांच में से एक दर्शक इसका इस्तेमाल करता है।
FAST यूजर्स का CTV पर बिताया जाने वाला समय भी ज्यादा है। वे औसतन 3.4 घंटे प्रतिदिन CTV पर कंटेंट देखते हैं, जबकि सभी CTV दर्शकों का औसत समय 2.9 घंटे है।
विज्ञापन बाजार के लिए क्यों अहम है CTV?
CTV की बढ़ती पहुंच विज्ञापनदाताओं के लिए नई संभावनाएं खोल रही है। बड़ी स्क्रीन पर डिजिटल कंटेंट देखने वाले दर्शकों की संख्या बढ़ने के साथ ब्रांड्स को पारंपरिक टीवी और डिजिटल विज्ञापन के बीच एक नया प्लेटफॉर्म मिल रहा है।
खासकर परिवार के साथ कंटेंट देखने की आदत, क्रिकेट की लोकप्रियता और युवाओं की बढ़ती भागीदारी CTV को विज्ञापन के लिहाज से आकर्षक बना रही है।
आने वाले समय में टीवी का बदलता चेहरा
20.7 करोड़ दर्शकों तक पहुंच चुका CTV यह संकेत दे रहा है कि भारत में टीवी की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब टीवी का मतलब केवल सेट-टॉप बॉक्स के जरिए चैनल देखना नहीं रह गया है।
स्मार्ट टीवी, OTT, डिजिटल वीडियो और FAST जैसे विकल्प एक ही बड़ी स्क्रीन पर दर्शकों को अलग-अलग तरह का कंटेंट उपलब्ध करा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में बढ़ती पहुंच और युवाओं की मजबूत भागीदारी को देखते हुए आने वाले वर्षों में भारत का टीवी और विज्ञापन इकोसिस्टम और ज्यादा डिजिटल होता नजर आ सकता है।