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एआई और नई टेक्नोलॉजी पर भरोसा, लेकिन सतर्कता जरूरी: एक्सपर्ट्स

 

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित 6वें पीआईसीयू फिनटेक कॉन्फ्रेंस में इंडियन बैंकिंग सेक्टर के दिग्गजों ने नई तकनीकों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर अपने विचार साझा किए।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के सीनियर एडवाइजर सुरिंदर कुमार थापर ने कहा कि हर नई तकनीक के साथ कुछ जोखिम जरूर आते हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था (गार्डरेल्स) भी मौजूद होती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीक को अपनाने से पहले उसका सही तरीके से परीक्षण किया जाता है और जरूरी सिस्टम लगाए जाते हैं। इसलिए एआई या एजेंटिक टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े खतरे फिलहाल नजर नहीं आते, क्योंकि इन पर लगातार निगरानी और सुधार किया जा रहा है।

थापर ने डिजिटल पेमेंट में यूपीआई की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने भारत को तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आज देश में यूपीआई के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन और उनकी कुल राशि में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि अब छोटे दुकानदार भी आसानी से यूपीआई से पेमेंट स्वीकार कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम देश के हर कोने तक पहुंच चुका है।

वहीं, बिजनेसनेक्स्ट के सीईओ निशांत सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए साइबर सुरक्षा को लेकर अहम बात कही। उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी का खतरा सिर्फ एआई तक सीमित नहीं है, लेकिन एआई के कारण यह और ज्यादा बढ़ गया है। हालांकि, यह जोखिम पहले से मौजूद थे, लेकिन अब उनका दायरा और प्रभाव बढ़ गया है।

उन्होंने बताया कि सरकार लगातार लोगों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है, जिससे लोग डिजिटल फ्रॉड और साइबर खतरों से बच सकें।

निशांत सिंह ने यह भी कहा कि यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म अब लोगों को परिवार के अन्य सदस्यों को भी जोड़ने की सुविधा दे रहे हैं। इससे घर के युवा सदस्य, जो तकनीक में ज्यादा माहिर होते हैं, वे अपने माता-पिता या बुजुर्गों की मदद कर सकते हैं। इससे डिजिटल लेनदेन और भी सुरक्षित और आसान बन रहा है।

--आईएएनएस

डीबीपी