जैन समाज का दसलक्षण पर्व आरंभ, जानिए इससे जुड़े नियम
ज्योतिष न्यूज़ डेस्कः आज यानी 31 अगस्त दिन बुधवार को गणेश चतुर्थी के अलावा दिगंबर जैन समुदाय का विशेष पर्व दस दिवसीय दसलक्षण यानी पर्युषण पर्व का आरंभ हो चुका है मान्यताओं के अनुसार यह पर्व वैसे तो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से आरंभ होता है लेकिन दस दिनों के दौरान एक तिथि के क्षय होने से यह पर्व एक दिन पहले यानी कि चतुर्थी तिथि से ही आरंभ हो चुका है
इस पर्व के एक दिन पहले आरंभ होने की वजह यह है कि दसलक्षण पर्व नौ दिन का नहीं हो सकता है लेकिन तिथि बढ़ने की वजह से इस पर्व को 11 दिनों का किया जा सकता है आपको बता दें कि यह दसलक्षण का त्योहार अनंत चतुर्दशी तिथि तक मनाया जाता है आपको बता दें कि इस पर्व में जैन समुदाय के लोग उपवास रखकर भगवान की विधिवत पूजा करते हैं तो आज हम आपको इस पर्व से जुड़े नियम बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।
जानिए पर्व से जुड़े नियम-
आपको बता दें कि भगवान महावीर के अनुयायी दिगंबर जैन समाज के लोग कठोर व्रत करके अधिक से अधिक समय तक 24 तीर्थंकारों और भगवान की पूजा अर्चना करते हैं। इस दौरान कुछ भक्त केवल पानी या दूध लेकर दस दिन तक व्रत रखते हैं। तो कुछ लोग एक समय भोजन करके दसलक्षण पर्व के व्रत उपवास करते हैं बता दें कि दसलक्षण पर्व के दौरान शुद्ध और सात्विक भोजन ही करना चाहिए इस व्रत में जमीन के अंदर पैदा होने वाली चीजों और बाहर के खाद्य पदार्थं भोजन में नहीं किया जाता है ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता है
वही जो लोग यह व्रत रखते है वे पूरा समय भगवान का ध्यान पूजन में ही लगा देते हैं। जैन धर्म के इस पर्व को पर्युषण या दसलक्षण पर्व के नाम से जाना जाता है यह त्योहार आत्मा की शुद्धि के लिए किया जाता है जिससे लोगों को जन्म मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त हो सके। इसलिए इन दस दिनों में उपवास करने के साथ साथ दस नियमों का पालन भी करना होता है इन नियमों का पालन करके मनुष्य सभी तरह के विकारों से मुक्ति होकर मोक्ष की राह पर चलता है और जीवन में ईश्वर के करीब हो जाता है।