केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग की डेडलाइन नहीं बढ़ाई, एक्सक्लूसिव फुटेज में जाने व्हाट्सएप और अन्य एप्स पर पड़ेगा असर
केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि 'सिम बाइंडिंग' नियम को लागू करने की 28 फरवरी की अंतिम तिथि को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सरकार ने कहा कि इस नियम का पालन करना अब अनिवार्य है और इसके लिए सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं को समय पर अपने सिम कार्ड को अपने पहचान दस्तावेज़ से लिंक करना होगा।
सिम बाइंडिंग नियम के अनुसार, अगर किसी मोबाइल में सिम कार्ड नहीं होगा, तो व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग एप्स काम नहीं करेंगे। यह नियम विशेष रूप से डिजिटल सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कंप्यूटर या वेब पर लॉगिन किए गए व्हाट्सएप अकाउंट्स 6 घंटे के भीतर ऑटोमैटिक लॉगआउट हो जाएंगे, यदि संबंधित मोबाइल सिम कार्ड एक्टिव और लिंक नहीं है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अकाउंट का दुरुपयोग न हो और साइबर अपराधियों की पहचान करना आसान हो।
केंद्र सरकार का दावा है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी, फर्जी मैसेज और ऑनलाइन ठगी को रोकने में मदद करेगा। मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल नंबर और मैसेजिंग एप्स के माध्यम से होने वाले धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे लाखों लोगों को नुकसान हुआ है। सिम बाइंडिंग नियम के लागू होने से यह संभावना है कि ऐसे अपराधों की संख्या में कमी आएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सही दिशा में है, लेकिन इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं के लिए चेतावनी भी है। कई लोग अपने पुराने मोबाइल नंबरों को अपडेट नहीं कर पाए हैं या दस्तावेज़ों में त्रुटि होने के कारण उनका सिम लिंक नहीं हो पाया है। ऐसे लोग 28 फरवरी के बाद मैसेजिंग सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाएंगे।
सिम बाइंडिंग नियम केवल व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी लागू होगा। इससे डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ेगी। वहीं, विशेषज्ञों ने कहा है कि सरकार को नियम के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, ताकि किसी को भी सेवाओं के बंद होने की समस्या का सामना न करना पड़े।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सिम बाइंडिंग के लिए आवश्यक प्रक्रिया सरल और उपयोगकर्ता फ्रेंडली होगी। उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नेटवर्क प्रोवाइडर के माध्यम से अपने सिम को पहचान दस्तावेज़ से लिंक कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य मान्य पहचान दस्तावेज़ का उपयोग किया जा सकता है।
इस कदम के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा मजबूत होगी और यह साइबर अपराधियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम डिजिटल भारत के विज़न में एक अहम कदम है, जो ऑनलाइन सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि सिम बाइंडिंग नियम की डेडलाइन 28 फरवरी तय है और इसे बढ़ाया नहीं जाएगा। मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए यह समय सीमा महत्वपूर्ण है और इसे नजरअंदाज करने से उनकी मैसेजिंग सेवाओं पर असर पड़ेगा।