×

'नेशनल हेराल्ड विवाद या घोटाला ?' जानिए सरदार पटेल की चेतावनी से लेकर गांधी परिवार तक इससे जुड़ा हर राज

 

नई दिल्ली, अप्रैल 2025: नेशनल हेराल्ड मामला एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला सिर्फ वर्तमान की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों तक फैली हुई हैं। इस विवाद की आंच सीधे भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार, गांधी परिवार तक पहुंच रही है, और इतिहास की धूल में दबे पुराने पत्र अब फिर से चर्चा में हैं।

ईडी का खुलासा: गांधी परिवार पर 5,000 करोड़ की संपत्ति के दुरुपयोग का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नेशनल हेराल्ड अखबार की संपत्तियों को हड़पने के लिए कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया। ईडी के मुताबिक, यंग इंडियन लिमिटेड नामक कंपनी, जिसमें सोनिया और राहुल की हिस्सेदारी है, ने नेशनल हेराल्ड की 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को बेहद कम कीमत पर अपने नियंत्रण में ले लिया। ईडी का आरोप है कि यह सिर्फ एक कॉरपोरेट पुनर्गठन नहीं था, बल्कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक और आर्थिक षड्यंत्र था।

शुरुआत 1950 से: जब सरदार पटेल ने दी थी चेतावनी

इस विवाद की शुरुआत अचानक नहीं हुई है। इसके बीज 1950 में ही बो दिए गए थे। सरदार वल्लभभाई पटेल, जो उस समय भारत के उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री थे, उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को नेशनल हेराल्ड के आर्थिक लेन-देन को लेकर पत्र लिखा था। उन्होंने हिमालयन एयरवेज से जुड़े व्यक्तियों से मिले 75,000 रुपये के दान पर चिंता जताई थी। पटेल का तर्क था कि यह दान संदिग्ध स्रोतों से आया है, जो सरकारी अनुबंधों में संलिप्त थे। पटेल ने यह भी लिखा कि इन स्रोतों से दान लेना सार्वजनिक जीवन में नैतिकता को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी प्रभाव का दुरुपयोग हो सकता है। इसके बावजूद नेहरू ने जवाब में केवल इतना कहा कि वह इस मुद्दे को देखेंगे, और इसे फिरोज गांधी को देखने के लिए कहा है, जो उस समय नेशनल हेराल्ड के महाप्रबंधक थे।

पटेल के पत्रों में छिपा भविष्य का संकेत

5 मई 1950 को लिखे गए एक पत्र में सरदार पटेल ने साफ शब्दों में लिखा, “इन दानदाताओं के इरादे धर्मार्थ नहीं लगते। यह मामला किसी आर्थिक मदद का नहीं, बल्कि निजी और कॉर्पोरेट स्वार्थ का है।” यह वही भाषा है जो आज बीजेपी और विपक्षी आलोचक नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर उपयोग कर रहे हैं। पटेल ने पत्रों की शृंखला में यह भी बताया कि अखानी नामक एक दानदाता बैंक धोखाधड़ी में शामिल था, और केंद्रीय मंत्री अहमद किदवई विवादास्पद व्यवसायियों से हेराल्ड के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे। इन सबने पटेल को गहराई से चिंतित किया, क्योंकि वे सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और ईमानदारी के पक्षधर थे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया और गांधी परिवार का पक्ष

कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले को "राजनीतिक प्रतिशोध" करार दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि भाजपा गांधी परिवार को बदनाम करने के लिए इस पुराने मुद्दे को उठा रही है। उनका तर्क है कि यंग इंडियन लिमिटेड एक गैर-लाभकारी कंपनी है और इसके जरिए कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं उठाया गया। हालांकि, ईडी की चार्जशीट और सरदार पटेल की ऐतिहासिक चेतावनियों के दस्तावेज सामने आने के बाद कांग्रेस की सफाई कमजोर पड़ती नजर आ रही है। भाजपा ने इस पूरे मामले को कांग्रेस की वंशवादी राजनीति और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।

सुब्रमण्यम स्वामी की भूमिका

इस पूरे मामले को सबसे पहले भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सार्वजनिक किया था। उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि गांधी परिवार ने यंग इंडियन के जरिए नेशनल हेराल्ड की बहुमूल्य संपत्तियों को अवैध रूप से हासिल किया है। उनका कहना है कि यह एक "सुनियोजित साजिश" थी, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को निजी लाभ के लिए हड़पा गया। स्वामी ने नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों की कीमत का आकलन करीब 5,000 करोड़ रुपये किया है, जो दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में स्थित हैं। उनके अनुसार, इस संपत्ति को व्यावसायिक उपयोग में लाया गया, जबकि यंग इंडियन को कर-मुक्त गैर-लाभकारी संस्था के रूप में पंजीकृत किया गया था।

भाजपा का प्रहार: नैतिक संकट बनाम वित्तीय घोटाला

भाजपा इस मामले को केवल एक वित्तीय घोटाले के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक संकट के रूप में प्रस्तुत कर रही है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा है कि यह मामला कांग्रेस पार्टी की संस्कृति में व्याप्त "परिवारवाद, अहंकार और गैर-जवाबदेही" का जीता-जागता प्रमाण है। भाजपा ने सरदार पटेल की चेतावनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपने ही संस्थापक नेताओं की बातों को दरकिनार किया और सत्ता को व्यक्तिगत लाभ का माध्यम बना लिया।

अदालत का रुख और आगे की कार्रवाई

इस मामले में अब अदालत की नजरें टिकी हैं। ईडी की जांच, संपत्ति के रिकॉर्ड, और यंग इंडियन के शेयर होल्डिंग पैटर्न की विस्तृत जांच की जा रही है। कई बार राहुल गांधी और सोनिया गांधी से पूछताछ हो चुकी है, और इस मामले में अन्य कांग्रेस नेताओं को भी तलब किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईडी आरोपों को साबित करने में सफल होती है, तो यह मामला गांधी परिवार की राजनीतिक छवि के लिए गंभीर झटका बन सकता है। नेशनल हेराल्ड मामला अब सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं रह गया है। यह एक ऐतिहासिक, नैतिक और राजनीतिक परीक्षा बन चुका है। सरदार पटेल जैसे नेताओं की भविष्यवाणियों को नजरअंदाज करने का नतीजा आज देश देख रहा है। यह मामला देश की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर रहा है और आने वाले समय में इसके प्रभाव और भी व्यापक हो सकते हैं। वर्तमान में यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं है, यह देश की राजनीतिक संस्कृति, नैतिकता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा सवाल है – क्या सार्वजनिक सेवा अब भी सेवा बची है, या सिर्फ सत्ता का खेल बनकर रह गई है?