Raisina Dialogue 2026 में डॉ. एस. जयशंकर ने हिंद महासागर की सुरक्षा और भारत की भूमिका पर किया विस्तार से बोल
नई दिल्ली में आयोजित Raisina Dialogue 2026 के एक सत्र “Heart of the Seas: Future of the Indian Ocean” में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति, समुद्री सुरक्षा और भारत की सक्रिय भूमिका पर विस्तार से बात की। इस सत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि लाल सागर और इसके आसपास के समुद्री मार्गों पर हाल ही में हूती समूह द्वारा हमले किए गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका यह बयान क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री सामरिक मामलों पर भारत की सतर्कता को दर्शाता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के देशों और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्वतंत्र नौवहन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित देशों के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. जयशंकर ने इस सत्र में बताया कि भारत ने पहले ही हिंद महासागर क्षेत्र में कई सुरक्षा उपाय और रणनीतिक पहलें शुरू की हैं। इनमें समुद्री निगरानी, संयुक्त अभ्यास और क्षेत्रीय सहयोग शामिल हैं। उनका कहना था कि भारत का दृष्टिकोण न केवल अपने सुरक्षा हितों की रक्षा करना है, बल्कि समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन, समुद्री खतरे और नए सुरक्षा खतरों को देखते हुए, भारत का रोल इंडियन ओशन में और अधिक सक्रिय और निर्णायक होना चाहिए। जयशंकर ने यह साफ किया कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अपने सहयोगी देशों के साथ लगातार संवाद और समन्वय कर रहा है।
सत्र में मौजूद विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भारत की इस पहल की सराहना की और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम बताया। विश्लेषकों का कहना है कि हिंद महासागर रणनीति के संदर्भ में भारत की सक्रिय भूमिका न केवल क्षेत्रीय देशों के लिए बल्कि वैश्विक समुद्री मार्गों के लिए भी सुरक्षा का संकेत है।
Raisina Dialogue 2026 में जयशंकर के विचार इस बात को भी रेखांकित करते हैं कि समुद्री सुरक्षा अब केवल एक राष्ट्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। उनके वक्तव्य ने भारत की हिंद महासागर नीति और उसकी सक्रिय समुद्री भूमिका पर नए दृष्टिकोण पेश किए।
इस सत्र के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि हिंद महासागर में भारत की भूमिका न केवल रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक, व्यापारिक और वैश्विक सुरक्षा दृष्टिकोण से भी यह क्षेत्र भारत की विदेश नीति का प्रमुख केंद्र बन चुका है।