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पंचायत और निकाय चुनावों से पहले बजट: वित्त मंत्री दिया कुमारी पेश करेंगी सरकार का चुनावी दस्तावेज

 

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार का नया बजट बुधवार को वित्त मंत्री दिया कुमारी विधानसभा में पेश करेंगी। यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि राज्य की आगामी राजनीति और स्थानीय चुनावों की दिशा का भी आईना माना जा रहा है। अगले दो महीनों में राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी होने के कारण सरकार का फोकस इस बजट में राजनीतिक और चुनावी दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले पेश किया जाने वाला बजट सरकार की प्राथमिकताओं और जनता को दिए जाने वाले संकेतों को स्पष्ट करता है। इस बार के बजट में ऐसे वर्गों और क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता देने की संभावना जताई जा रही है, जिनका सीधा संबंध पंचायत और नगर निकायों से है। ग्रामीण विकास, आधारभूत सुविधाओं, महिला एवं युवा कल्याण, किसानों और स्थानीय रोजगार से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि बजट में आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के साथ-साथ चुनावी रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं का वित्तीय प्रावधान इस तरह रखा जा सकता है कि इसका सीधा लाभ स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर कार्यरत लोगों तक पहुंचे। इससे राज्य सरकार का उद्देश्य स्थानीय चुनावों से पहले ग्रामीण और शहरी जनता के बीच सकारात्मक प्रभाव बनाना है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बजट का चुनावी प्रभाव केवल सरकारी कर्मचारियों या योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय चुनावों में जनता के बीच बजट घोषणाओं के प्रभाव और लाभ सीधे दिखाई देंगे। उदाहरण के तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी योजनाओं के लिए बजट आवंटन, महिला समूहों और किसानों के लिए सब्सिडी, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार कार्यक्रमों के लिए निधि जैसी घोषणाएं संभावित हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार का बजट राज्य सरकार की चुनावी रणनीति को स्पष्ट करेगा। यह देखने वाली बात होगी कि वित्त मंत्री दिया कुमारी किस प्रकार विकास और जनकल्याण योजनाओं के माध्यम से पंचायत और निकाय चुनावों में जनता का ध्यान आकर्षित करती हैं।

इस प्रकार, बुधवार को पेश होने वाला बजट केवल सरकारी खजाने का लेखा-जोखा नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावों की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं का भी परिचायक साबित होगा। स्थानीय प्रशासन, जनता और राजनीतिक दल सभी की नजरें इस बजट पर टिकी हैं, जो अगले दो महीनों में राज्य की राजनीतिक तस्वीर को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकता है।