वीडियो में देखें! NEET परीक्षा रद्द होने पर भड़के कमल हासन, कहा 22 लाख छात्रों की उम्मीदें तोड़ दीं, इनकी मानसिक पीड़ा का जिम्मेदार कौन
3 मई को होने वाली NEET परीक्षा को रद्द किए जाने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने यह फैसला पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों के बीच लिया है, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस फैसले के बाद परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। देशभर में इस निर्णय को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या बार-बार होने वाली गड़बड़ियों की कीमत छात्रों को चुकानी चाहिए।
22 लाख छात्रों की मेहनत पर सवाल
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लगभग 22 लाख छात्र शामिल होते हैं, जो सालों की मेहनत और तैयारी के बाद इस परीक्षा में बैठते हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक और विवादों के चलते छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली से उठता जा रहा है।
कमल हासन ने जताई नाराजगी
इस मुद्दे पर साउथ के मशहूर अभिनेता कमल हासन ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस फैसले ने छात्रों की मेहनत और सपनों को गहरा आघात पहुंचाया है। कमल हासन ने लिखा कि “NEET प्रवेश परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत और सपने देखने वाले 22 लाख छात्रों की उम्मीदें आपराधिक साजिशों ने तोड़ दी हैं। इस मानसिक पीड़ा की जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक NEET की कोई भी परीक्षा बिना गड़बड़ी और धांधली के आरोपों के नहीं हुई है।
शिक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
कमल हासन ने अपनी पोस्ट में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इसी कारण शिक्षा को फिर से राज्य सूची में लाने की मांग मजबूत होती जा रही है, ताकि राज्यों को अपने स्तर पर परीक्षा प्रणाली को संभालने का अधिकार मिले। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय छात्रों को इस तरह की “अन्यायपूर्ण परीक्षा प्रणाली और माफिया नेटवर्क” से बचाने की जरूरत है।
देशभर में जारी बहस
NEET परीक्षा रद्द होने के बाद अब यह मुद्दा सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुधार को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। कई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बार-बार होने वाली अनियमितताओं से छात्रों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।