Daya Shankar Pandey Birthday Special: शनि की साढ़े साती के बाद भी दयाशंकर को ऐसे मिला था शनिदेव का किरदार, जाने दिलचस्प किस्सा
मनोरंजन न्यूज़ डेस्क - टीवी और सिनेमा की दुनिया में कई बहुमुखी कलाकार हैं, जो अपने हर किरदार में बेहतरीन काम करते हैं। इनमें एक्टर दयाशंकर पांडे का नाम भी शामिल है, जो टीवी सीरियल्स के साथ-साथ कई बॉलीवुड फिल्मों में भी नजर आ चुके हैं। आज दयाशंकर पांडे 57 साल के हो गये हैं। दयाशंकर पांडे का जन्म 19 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 'लगान', 'आंखें', 'गंगाजल', 'राजनीति' समेत कई फिल्मों में अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया है। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में चालू पांडे के किरदार के लिए भी उन्होंने खूब वाहवाही लूटी है। लेकिन एक्टर को घर-घर में पहचान उनके किरदार 'शनिदेव' से मिली, जो उन्होंने टीवी सीरियल 'महिमा शनिदेव की' में निभाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें ये रोल कैसे मिला? चलिए आज हम आपको इसके बारे में बताते हैं।
लॉकडाउन के दिनों में टीवी पर सीरियल 'महिमा शनिदेव की' प्रसारित हुआ था, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया था। इस सीरियल में दयाशंकर पांडे की एक्टिंग की काफी तारीफ हुई थी। लेकिन एक्टर को ये रोल मिलने की भी एक दिलचस्प कहानी है, जिसके बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था। दयाशंकर पांडे ने 'शनिदेव' से अपने जुड़ाव की कहानी का जिक्र करते हुए कहा था कि जब उनकी कुंडली में साढ़ेसाती चल रही थी, तब उन्हें शनिदेव के लिए ऑफर मिला था।
एक्टर ने कहा था, 'मैंने लंबे समय तक शहाब समसी साहब को असिस्ट किया है। उन्हीं दिनों उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि वह एक माइथोलॉजिकल शो करेंगे। तब मैंने उनसे कहा कि अगर रोल अच्छा होगा तो मैं जरूर करूंगा। सैमसी उस शो के क्रिएटिव डायरेक्टर थे। वह एक बार मुझे शिव सागर के कार्यालय में ले गए और मैं वहां लगभग 10 मिनट तक बैठा रहा। उस वक्त शिव सागर ने मुझसे कहा था कि तुम्हारा चेहरा भी शनिदेव जैसा है और फिर दो दिन बाद मेरा लुक टेस्ट हुआ और मुझे ये रोल मिल गया।
एक्टर ने आगे बताया कि जब उन्हें ये शो ऑफर हुआ था तो कई लोग उन्हें डराते थे। एक्टर ने बताया कि जब उन्हें ये शो ऑफर हुआ था तब उनकी कुंडली में भी शनि की साढ़ेसाती चल रही थी। इसी वजह से उन्होंने अपने धर्मगुरु की सलाह के बाद ही इस शो में काम करना शुरू किया। तब एक्टर को उनके धर्मगुरु ने कहा था कि उन्हें ये शो जरूर करना चाहिए।