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सुमन कल्याणपुर ने गीतों का ऐसा भंडार छोड़ा है, जो पीढ़ियों तक सिखाता रहेगा : सुरेश वाडकर

 

मुंबई, 1 जून (आईएएनएस)। भारतीय संगीत जगत की सितारा सुमन कल्याणपुर अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उन्होंने 89 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। मशहूर गायक सुरेश वाडकर ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि वह एक ऐसी इंसान थीं, जिससे कई पीढ़ियों ने संगीत सीखा और प्रेरणा ली।

सुरेश वाडकर ने मीडिया से बात करते हुए सुमन कल्याणपुर के निधन को संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा, "सुमन कल्याणपुर का जाना बेहद दुखद घटना है। उन्होंने अपने लंबे करियर में ऐसे हजारों गीत गाए हैं, जो आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं और आने वाले समय में भी गूंजते रहेंगे। बचपन से ही हम उनके गीत सुनते हुए बड़े हुए हैं और उनकी गायकी से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। उनकी आवाज में एक अलग मिठास और सादगी थी, जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती थी।"

उन्होंने आगे कहा, ''सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, और गुजराती सहित कई भाषाओं में गाने गाए और हर भाषा में अपनी अलग पहचान बनाई। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी कि वह किसी एक भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहीं। उनके गीतों ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को जोड़ने का काम किया। वे बेहद विनम्र स्वभाव की थीं और हमेशा सभी से प्यार और सम्मान के साथ मिलती थीं।''

सुरेश वाडकर ने कहा, "वह अपने पीछे गीतों का एक विशाल भंडार छोड़कर गई हैं। उनके गाए हुए गीत आने वाली पीढ़ियों को गायकी की बारीकियां सीखने में मदद करेंगे और उन्हें प्रेरणा देंगे। मेरी भगवान से प्रार्थना है कि सुमन जी की आत्मा को शांति मिले।"

सुमन कल्याणपुर का निधन रविवार शाम मुंबई में हुआ था। उनके निधन की खबर सामने आते ही संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

सोमवार को मुंबई के सांताक्रुज स्थित पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में प्रशंसक, कलाकार और शुभचिंतक मौजूद रहे, जिन्होंने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

सुमन कल्याणपुर ने हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती, असमी, कन्नड़ और कई अन्य भाषाओं में तीन हजार से ज्यादा गाने गाए। 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार तुम्हीं से' और 'तुमने पुकारा और हम चले आए' जैसे उनके सदाबहार गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनकी आवाज की तुलना अक्सर लता मंगेशकर से की जाती थी, लेकिन सुमन कल्याणपुर ने हमेशा अपनी अलग पहचान बनाए रखी।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम