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Ranbir Kapoor Birthday Special: फ्लॉप डेब्यू से सुपरस्टारडम तक का सफर, अब पर्दे पर बनेंगे भगवान राम

 

बॉलीवुड के कपूर खानदान से आने वाले रणबीर कपूर आज अपना 44वां जन्मदिन मना रहे हैं। 28 सितंबर 1982 को मुंबई में जन्मे रणबीर ने साल 2007 में फिल्म ‘सांवरिया’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाई, लेकिन रणबीर की एक्टिंग ने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान जरूर खींच लिया।इसके बाद रणबीर ने एक ही तरह के किरदारों में बंधने के बजाय लगातार अलग-अलग भूमिकाएं चुनीं। कभी उन्होंने टूटे दिल वाले रॉकस्टार का किरदार निभाया, कभी बिना बोले दर्शकों को भावुक किया, तो कभी संजय दत्त की जिंदगी को पर्दे पर उतारकर अपनी एक्टिंग का अलग अंदाज दिखाया।

और फिर आया ‘एनिमल’, जिसने रणबीर कपूर को एक बार फिर बॉक्स ऑफिस के बड़े सितारों की कतार में खड़ा कर दिया। हालांकि फिल्म की हिंसा और महिलाओं के चित्रण को लेकर विवाद भी हुआ।अब रणबीर कपूर की अगली बड़ी पारी ‘रामायण’ से जुड़ी है, जिसमें वह भगवान राम की भूमिका में नजर आने वाले हैं। यानी जिस कपूर परिवार की चार पीढ़ियां हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बना चुकी हैं, उसी परिवार के इस स्टार का सफर अब एक और बड़े किरदार तक पहुंच चुका है।

कपूर खानदान में जन्म, लेकिन अपनी अलग पहचान बनाने की चुनौती

रणबीर कपूर अभिनेता ऋषि कपूर और नीतू कपूर के बेटे हैं। उनके दादा राज कपूर हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं और फिल्मकारों में गिने जाते हैं।

ऐसे परिवार में जन्म लेने की वजह से रणबीर को फिल्म इंडस्ट्री का माहौल बचपन से ही मिला, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग पहचान बनाने की थी।

बचपन से ही वह कैमरा, फिल्मों और शूटिंग के माहौल से परिचित थे। पिता ऋषि कपूर की फिल्मों को देखते हुए उनके मन में भी अभिनय की इच्छा पैदा हुई।

रणबीर ने एक इंटरव्यू में अपने बचपन के कई किस्से भी साझा किए हैं। उन्होंने बताया था कि स्कूल में पिता की लोकप्रियता की वजह से उन्हें अलग तरह का व्यवहार भी झेलना पड़ता था। कई बार दूसरे बच्चे उन्हें चिढ़ाते और बुली करते थे।

उनके बचपन से जुड़े कुछ किस्से आज भी काफी चर्चित हैं। एक बार बाथरूम में गिरने से उनके चेहरे पर चोट लगी थी, जिसका निशान बाद में भी दिखाई देता रहा। वहीं बचपन में एक घटना ऐसी भी हुई जब उन्होंने गलती से पिता का आफ्टरशेव लोशन पी लिया था और घरवालों को तुरंत उनकी मदद करनी पड़ी।

बचपन में संजय दत्त के फैन थे रणबीर

रणबीर कपूर बचपन में अभिनेता संजय दत्त के बड़े प्रशंसक थे। बताया जाता है कि वह अपने कमरे की अलमारी में संजय दत्त की तस्वीरें रखते थे।

दिलचस्प बात यह है कि जिस अभिनेता को रणबीर बचपन में पसंद किया करते थे, कुछ साल बाद उसी संजय दत्त की जिंदगी पर बनी बायोपिक में रणबीर ने उनका किरदार निभाया।

फिल्म ‘संजू’ में रणबीर ने संजय दत्त के अलग-अलग दौर को पर्दे पर उतारने की कोशिश की। उनके लुक से लेकर बॉडी लैंग्वेज और बोलने के अंदाज तक की चर्चा हुई।

यही फिल्म रणबीर के करियर की उन फिल्मों में शामिल हुई जिसने साबित किया कि वह सिर्फ रोमांटिक हीरो की भूमिका तक सीमित नहीं हैं।

15 साल की उम्र में असिस्टेंट डायरेक्टर बन गए थे

रणबीर का फिल्मी सफर बतौर हीरो नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे से शुरू हुआ था।

साल 1996 में आई फिल्म ‘प्रेम ग्रंथ’ की शूटिंग के दौरान रणबीर ने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया। उस समय उनकी उम्र महज 15 साल थी।

बाद में पिता ऋषि कपूर की फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ में भी उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

यानी एक्टिंग में आने से पहले रणबीर फिल्म के सेट, कैमरा, लाइटिंग और शूटिंग की प्रक्रिया को करीब से समझ चुके थे।

विदेश गए, एक्टिंग और फिल्ममेकिंग की ट्रेनिंग ली

रणबीर ने मुंबई में पढ़ाई पूरी करने के बाद फिल्ममेकिंग सीखने के लिए न्यूयॉर्क का रुख किया। वहां उन्होंने फिल्ममेकिंग और मेथड एक्टिंग की ट्रेनिंग ली।

भारत लौटने के बाद उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया।

बताया जाता है कि ‘ब्लैक’ के सेट पर रणबीर को फिल्म के दूसरे तकनीकी काम भी करने पड़ते थे। सेट की सफाई से लेकर छोटे-बड़े कामों में उन्होंने हिस्सा लिया।

इसी दौरान संजय लीला भंसाली ने रणबीर की क्षमता को पहचाना और उन्हें अपनी अगली फिल्म ‘सांवरिया’ में बतौर हीरो मौका दिया।

‘सांवरिया’ फ्लॉप, लेकिन रणबीर की एक्टिंग पर नजर गई

साल 2007 में ‘सांवरिया’ रिलीज हुई। फिल्म में रणबीर के साथ सोनम कपूर ने भी डेब्यू किया था।

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन रणबीर की एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ हुई।

इसके बाद रणबीर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2008 में ‘बचना ऐ हसीनों’ आई। फिर 2009 में उनकी तीन अलग-अलग फिल्मों ने उनकी अभिनय क्षमता के कई रंग दिखाए।

2009 में तीन फिल्में, तीन बिल्कुल अलग किरदार

‘वेक अप सिड’ में रणबीर ने एक ऐसे युवा का किरदार निभाया जो शुरुआत में गैर-जिम्मेदार है, लेकिन धीरे-धीरे जिंदगी और जिम्मेदारियों को समझता है।

‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ में वह कॉमेडी और रोमांस से भरपूर किरदार में दिखाई दिए।

वहीं ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर’ में उन्होंने एक मेहनती और महत्वाकांक्षी सेल्समैन का किरदार निभाया।

तीनों फिल्मों के किरदार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे। यही वह दौर था जब रणबीर को लेकर यह चर्चा शुरू हुई कि वह सिर्फ स्टारकिड नहीं, बल्कि अलग-अलग भूमिकाएं निभाने की कोशिश करने वाले अभिनेता हैं।

‘राजनीति’ ने बदल दी रोमांटिक हीरो की इमेज

2010 में प्रकाश झा की फिल्म ‘राजनीति’ में रणबीर कपूर ने समर प्रताप सिंह का किरदार निभाया।

फिल्म में उनका अंदाज पिछली फिल्मों से काफी अलग था। गंभीर राजनीति, सत्ता संघर्ष और पारिवारिक टकराव की कहानी में रणबीर ने अपनी स्क्रीन इमेज को एक नया रूप दिया।

इसके बाद 2011 में आई ‘रॉकस्टार’ ने उनके करियर को एक और बड़ा मोड़ दिया।

‘रॉकस्टार’ से मिली अलग पहचान

इम्तियाज अली की फिल्म ‘रॉकस्टार’ में रणबीर ने जनार्दन उर्फ जॉर्डन का किरदार निभाया।

एक साधारण लड़के से संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने तक का सफर, प्यार, दर्द और अकेलापन—रणबीर ने किरदार के कई भावों को पर्दे पर दिखाया।

फिल्म के बाद उनकी एक्टिंग को लेकर खूब चर्चा हुई और उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिले।

‘बर्फी’ में बिना बोले जीत लिया दर्शकों का दिल

2012 में आई ‘बर्फी’ रणबीर के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हुई।

इस फिल्म में उन्होंने ऐसे युवक का किरदार निभाया जो बोल और सुन नहीं सकता। इसके बावजूद किरदार को एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और हावभाव के जरिए निभाया गया।

रणबीर ने इस भूमिका के लिए चार्ली चैप्लिन और अपने दादा राज कपूर से प्रेरणा लेने की बात कही थी।

दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता ऋषि कपूर शुरुआत में इस तरह के किरदार को लेकर चिंतित थे। लेकिन फिल्म की सफलता के बाद रणबीर की पसंद को लेकर परिवार की चिंता भी कम हुई।

‘संजू’ में संजय दत्त बने, तो ‘एनिमल’ में बदली इमेज

इसके बाद रणबीर ने ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘तमाशा’, ‘ऐ दिल है मुश्किल’, ‘संजू’, ‘ब्रह्मास्त्र’, ‘तू झूठी मैं मक्कार’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाए।

2018 की ‘संजू’ में उन्होंने संजय दत्त की भूमिका निभाई।

इसके बाद कुछ समय के अंतराल के बाद 2022 में ‘शमशेरा’ और ‘ब्रह्मास्त्र’ के साथ उनकी वापसी हुई।

2023 में ‘तू झूठी मैं मक्कार’ के बाद आई ‘एनिमल’ ने उनके करियर को एक और बड़ा बॉक्स ऑफिस मोड़ दिया।

‘एनिमल’ ने रिकॉर्ड बनाए, लेकिन विवाद भी हुए

‘एनिमल’ में रणबीर कपूर ने रणविजय सिंह का किरदार निभाया।

फिल्म में हिंसा, पुरुष प्रधान सोच और महिलाओं के चित्रण को लेकर बहस हुई। कुछ दर्शकों और फिल्म समीक्षकों ने फिल्म के कई दृश्यों और किरदारों के व्यवहार पर सवाल उठाए।

वहीं निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने फिल्म और उसके किरदारों के पक्ष में अपनी बात रखी।

विवादों के बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कमाई की और रणबीर के करियर की प्रमुख व्यावसायिक सफल फिल्मों में शामिल हो गई।

पिता ऋषि कपूर के निधन का रणबीर पर गहरा असर

रणबीर के निजी जीवन में सबसे मुश्किल दौर उनके पिता ऋषि कपूर की बीमारी और निधन का रहा।

ऋषि कपूर का 30 अप्रैल 2020 को निधन हो गया था। इसके बाद रणबीर ने अपने काम से लंबा ब्रेक लिया।

बाद में एक बातचीत में रणबीर ने पिता की आखिरी रात और उस समय महसूस किए गए भावनात्मक दबाव के बारे में बात की थी।

उनके मुताबिक, उस समय उन्हें यह समझना मुश्किल हो रहा था कि अपनी भावनाओं को किस तरह व्यक्त करें।

इसके बाद 2022 में उन्होंने फिल्मों में वापसी की।

अब ‘रामायण’ में भगवान राम के किरदार की जिम्मेदारी

रणबीर कपूर अब निर्देशक नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाते नजर आने वाले हैं।

फिल्म को लेकर लंबे समय से चर्चा है और रणबीर के लुक ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा है।

फिल्म में रणबीर के साथ साई पल्लवी और अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। भगवान राम जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण किरदार को पर्दे पर निभाना रणबीर के करियर की अब तक की अलग तरह की चुनौती मानी जा रही है।

हालांकि इस कास्टिंग को लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी देखने को मिली है। रणबीर के पुराने बीफ संबंधी बयान को लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ फिल्म से जुड़े पक्षों और कलाकारों की ओर से इस प्रोजेक्ट को लेकर अलग-अलग बातें सामने आती रही हैं।

19 साल का सफर और आगे की बड़ी चुनौती

साल 2007 में एक फ्लॉप डेब्यू से शुरुआत करने वाले रणबीर कपूर ने करीब दो दशक के करियर में रोमांस, कॉमेडी, ड्रामा, बायोपिक, एक्शन और गंभीर किरदारों तक कई तरह की भूमिकाएं निभाई हैं।

उन्होंने कई बार ऐसी फिल्में चुनीं जिनमें उनका किरदार पारंपरिक हीरो से अलग था।

अब उनकी फिल्मोग्राफी में एक और बड़ा किरदार जुड़ने जा रहा है—भगवान राम।

एक तरफ कपूर परिवार की विरासत, दूसरी तरफ अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश और तीसरी तरफ लगातार बदलते किरदार—रणबीर कपूर का करियर इसी बदलाव की कहानी रहा है।