Rakhi Sawant: हीरोइन बनने पहुंचीं तो झेलनी पड़ी मुश्किलें, बोलीं- कॉमेडी बेचूंगी, शरीर नहीं
बॉलीवुड की ड्रामा क्वीन राखी सावंत एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली राखी ने हाल ही में अपने करियर के शुरुआती दिनों से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब वह हीरोइन और आइटम गर्ल बनने का सपना लेकर फिल्म इंडस्ट्री में आई थीं, तब वह काफी भोली और डरी हुई थीं। उनके मुताबिक, उस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें अनुचित इशारे किए और डिनर के बहाने निजी जगहों पर ले जाने की कोशिश की।
राखी ने बताया, शुरुआती दिनों में क्यों लगता था डर
शार्दुल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान राखी सावंत ने कहा कि इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते समय उन्हें कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उस वक्त अनुभव की कमी और डर के कारण वह खुलकर अपना पक्ष नहीं रख पाती थीं।
राखी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह काम की तलाश में जाती थीं, तो कुछ लोग उन्हें बेडरूम दिखाने और डिनर पर चलने जैसी बातें कहते थे। उनके अनुसार, उस समय वह इन परिस्थितियों का विरोध करने में सहज महसूस नहीं करती थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज अगर कोई उनके साथ ऐसा व्यवहार करने की कोशिश करे, तो वह उसका विरोध करेंगी। हालांकि, उनके मुताबिक, पुराने अनुभवों से जुड़ा डर आज भी उनके मन में कहीं न कहीं मौजूद है।
'मैं कॉमेडी बेचूंगी, शरीर नहीं'
बातचीत के दौरान राखी से पूछा गया कि वह कई बार बड़े सितारों के सामने खुद को कम क्यों आंकती हैं और अपने अधिकारों के लिए खुलकर आवाज क्यों नहीं उठातीं। इस पर उन्होंने अपने पुराने अनुभवों और उनसे पैदा हुए डर का जिक्र किया।
राखी ने साफ शब्दों में कहा कि वह लोगों का मनोरंजन करना चाहती हैं। वह कॉमेडी कर सकती हैं और लोगों को हंसा सकती हैं, लेकिन अपने शरीर को किसी फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं। उनके इस बयान को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
मीडिया और दुबई को लेकर भी की बात
राखी सावंत ने बातचीत में यह भी कहा कि भारतीय मीडिया ने उन्हें काफी लोकप्रियता दिलाई है। उन्होंने अपने मौजूदा जीवन और दुबई से जुड़े अनुभवों का जिक्र करते हुए भी टिप्पणी की।
राखी के इस बयान के बाद उनके करियर के शुरुआती संघर्ष और मनोरंजन जगत में काम पाने के दौरान महिलाओं को आने वाली चुनौतियों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, उनके अनुभवों से जुड़े दावों और अन्य पहलुओं को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।