कभी ट्रेनों में गाते थे, आज बॉलीवुड के सुपरस्टार: जानिए कैसे एक रिस्क ने बदली आयुष्मान खुराना की जिंदगी
आज आयुष्मान खुराना बॉलीवुड के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी अलग तरह की फिल्मों से एक खास पहचान बनाई है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी उतनी आसान नहीं थी।चंडीगढ़ से निकलकर थिएटर करने वाले आयुष्मान ने रेडियो जॉकी के तौर पर काम किया, MTV पर VJ बने, टीवी शो होस्ट किए, ट्रेनों में गाने गाए और कई ऑडिशन में रिजेक्शन झेला। यहां तक कि इंडियन आइडल-2 में भी उन्हें रिजेक्शन का सामना करना पड़ा।
फिर 2012 में आई ‘विक्की डोनर’ और इस एक फिल्म ने उनकी जिंदगी बदल दी।हालांकि डेब्यू फिल्म की सफलता के बाद लगातार तीन फिल्में नहीं चलीं। करियर एक बार फिर मुश्किल में था। लेकिन 2015 में ‘दम लगा के हईशा’ ने उनकी किस्मत बदल दी और इसके बाद आयुष्मान ने ऐसे किरदार और कहानियां चुनीं, जिनसे वह बाकी अभिनेताओं से अलग नजर आने लगे।
चंडीगढ़ में जन्म, पिता थे मशहूर ज्योतिषी
आयुष्मान खुराना का जन्म 14 सितंबर 1984 को चंडीगढ़ में हुआ। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने सेंट जॉन्स हाई स्कूल से की।
इसके बाद डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की और पंजाब यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन स्टडीज से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।
उनके पिता पी. खुराना जाने-माने ज्योतिषी थे, जबकि मां पूनम खुराना ने हिंदी में एमए किया था।
कॉलेज के दिनों से ही आयुष्मान का झुकाव थिएटर की तरफ था। उन्होंने थिएटर ग्रुप बनाए और स्ट्रीट प्ले में भी हिस्सा लिया।
डॉक्टर बनना चाहते थे, डेंटल कॉलेज में सीट भी मिली
एक वक्त आयुष्मान डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। उन्होंने 11वीं में साइंस स्ट्रीम ली और कर्नाटक के एक डेंटल कॉलेज में उन्हें सीट भी मिल गई थी।
लेकिन इसी दौरान थिएटर के प्रति उनका जुनून बढ़ता गया।
उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर आर्ट्स और थिएटर का रास्ता चुना। थिएटर ने उन्हें समाज और आम लोगों की समस्याओं को करीब से समझने का मौका दिया। आगे चलकर यही अनुभव उनकी फिल्मों की कहानियों में भी दिखाई दिया।
रोडीज जीते, लेकिन सीधे बॉलीवुड नहीं पहुंचे
2004 में आयुष्मान ने MTV Roadies Season 2 जीता। इसके बाद उन्हें पहचान जरूर मिली, लेकिन उन्होंने तुरंत मुंबई जाकर फिल्मों में हाथ नहीं आजमाया।
पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने रेडियो में काम किया और बाद में MTV के VJ बने। उन्होंने कई शो होस्ट किए और फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसे बड़े सितारों का इंटरव्यू भी किया।
इन अनुभवों ने उन्हें कैमरे के सामने सहज होना सिखाया।
पिता ने कहा- मुंबई जाओ, वरना देर हो जाएगी
पढ़ाई पूरी करने के बाद आयुष्मान कुछ समय ब्रेक लेकर एक्टिंग की तैयारी करना चाहते थे। लेकिन उनके पिता ने उन्हें तुरंत मुंबई जाने की सलाह दी।
इसके बाद आयुष्मान मुंबई पहुंच गए।
शुरुआती दिनों में उनके पास रहने की स्थायी जगह भी नहीं थी। वह अपने डॉक्टर दोस्त के साथ KEM अस्पताल के हॉस्टल में रहे और लगातार ऑडिशन देते रहे।
ट्रेन में गाना गाकर कमाए पैसे
फिल्म स्टार बनने से पहले आयुष्मान और उनके दोस्त ट्रेनों में परफॉर्म भी करते थे।
कॉलेज के दिनों में वह दोस्तों के साथ पश्चिम एक्सप्रेस में चढ़ते और अलग-अलग कोच में गाना गाते थे। यात्रियों से मिलने वाले पैसे जमा किए जाते थे।
आयुष्मान के मुताबिक, इन पैसों से दोस्तों ने एक बार गोवा ट्रिप तक स्पॉन्सर की थी।
इंडियन आइडल में भी मिला रिजेक्शन
आयुष्मान का संघर्ष सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं था।
उन्होंने इंडियन आइडल-2 में हिस्सा लिया और मुंबई राउंड तक पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें रिजेक्शन मिल गया।
मुंबई आने से पहले भी वह कई ऑडिशन में रिजेक्ट हो चुके थे। लेकिन इन रिजेक्शंस ने उनका हौसला नहीं तोड़ा।
2012 में ‘विक्की डोनर’ से बदली जिंदगी
2012 में आयुष्मान ने शूजित सरकार की फिल्म ‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड में कदम रखा।
फिल्म का विषय उस समय काफी अलग था और आयुष्मान ने स्पर्म डोनर का किरदार निभाया था।
फिल्म सफल रही और आयुष्मान रातोंरात चर्चा में आ गए। उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू के साथ फिल्म के गाने ‘पानी दा रंग’ के लिए प्लेबैक सिंगिंग का अवॉर्ड भी मिला।
लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू हुई।
पहली फिल्म हिट, फिर लगातार तीन फ्लॉप
‘विक्की डोनर’ के बाद ‘नौटंकी साला!’, ‘बेवकूफियां’ और ‘हवाईजादा’ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं।
लगातार तीन फिल्मों के कमजोर प्रदर्शन के बाद आयुष्मान खुद भी असमंजस में थे कि उन्हें किस तरह के किरदार करने चाहिए।
फिर 2015 में आई एक फिल्म ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी।
‘दम लगा के हईशा’ बनी करियर का टर्निंग पॉइंट
‘दम लगा के हईशा’ में आयुष्मान ने एक छोटे शहर के ऐसे युवक का किरदार निभाया, जिसकी शादी उससे ज्यादा पढ़ी-लिखी और वजनदार लड़की से हो जाती है।
कहानी आम बॉलीवुड रोमांस से अलग थी और आयुष्मान के अभिनय को खूब पसंद किया गया।
यहीं से उन्होंने तय कर लिया कि वह सिर्फ पारंपरिक हीरो की भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहेंगे।
फिर शुरू हुआ अलग कहानियों का दौर
इसके बाद आयुष्मान ने लगातार ऐसे विषयों पर फिल्में कीं, जिन्हें मुख्यधारा के अभिनेता अक्सर छूने से बचते हैं।
‘बरेली की बर्फी’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘अंधाधुन’, ‘बधाई हो’, ‘आर्टिकल 15’, ‘ड्रीम गर्ल’ और ‘बाला’ जैसी फिल्मों ने उनकी अलग पहचान बना दी।
कहीं वह इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से जूझते युवक बने, कहीं अंधे पियानो प्लेयर का किरदार निभाया, कहीं उम्रदराज माता-पिता की प्रेग्नेंसी की कहानी का हिस्सा बने और कहीं जातिगत भेदभाव के खिलाफ खड़े पुलिस अफसर।
यानी आयुष्मान ने खुद को एक ही तरह के किरदार में बांधने के बजाय लगातार प्रयोग किए।
2018 में मजबूत हुआ स्टारडम
2018 आयुष्मान के करियर का बेहद अहम साल रहा।
‘अंधाधुन’ ने बतौर अभिनेता उनकी क्षमता को नई पहचान दी, वहीं ‘बधाई हो’ ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की।
इसी दौर में यह बात मजबूत हुई कि अलग और असामान्य विषयों वाली फिल्में भी दर्शकों के बीच बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं।
ताहिरा कश्यप की राय भी लेते हैं
आयुष्मान और ताहिरा कश्यप की मुलाकात किशोरावस्था में हुई थी। दोनों ने 2008 में शादी की।
ताहिरा लेखक, निर्देशक और क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। आयुष्मान कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि फिल्म साइन करने से पहले वह ताहिरा की राय जरूर लेते हैं।
वह स्क्रिप्ट उनके साथ शेयर करते हैं और दोनों कहानी के फायदे-नुकसान पर चर्चा करते हैं।
आयुष्मान ने ताहिरा को अपना ‘लाइफ कोच’ भी बताया है।
सफलता के बीच फ्लॉप फिल्मों का दौर भी आया
आयुष्मान के करियर में सिर्फ हिट फिल्में नहीं रहीं।
‘चंडीगढ़ करे आशिकी’, ‘अनेक’, ‘डॉक्टर जी’ और ‘एन एक्शन हीरो’ जैसी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली।
लेकिन इन फिल्मों के बावजूद आयुष्मान ने अपनी फिल्मी दिशा नहीं बदली और अलग जॉनर व नए किरदारों के साथ प्रयोग जारी रखे।
आयुष्मान के करियर का सबसे बड़ा फॉर्मूला- रिस्क
आयुष्मान के करियर की खास बात यही रही कि उन्होंने शुरुआत से ही जोखिम लिया।
स्पर्म डोनर से लेकर अंधे पियानो प्लेयर तक, नपुंसकता से जूझते युवक से लेकर जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ने वाले पुलिस अफसर तक—उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जो पारंपरिक बॉलीवुड हीरो की छवि से अलग थे।
यही वजह है कि आयुष्मान का नाम आज कंटेंट और एक्सपेरिमेंटल सिनेमा से जोड़कर देखा जाता है।
एक्टर ही नहीं, सिंगर भी हैं आयुष्मान
आयुष्मान की प्रतिभा सिर्फ एक्टिंग तक सीमित नहीं है।कॉलेज के दिनों से ही उन्हें संगीत का शौक था। उन्होंने अपने दोस्त रोचक कोहली के साथ मिलकर ‘पानी दा रंग’ लिखा और कंपोज किया था।करीब 9 साल बाद यही गाना ‘विक्की डोनर’ में आया और बेहद लोकप्रिय हुआ।आयुष्मान ने खुद इस गाने को अपनी आवाज दी और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर भी मिला।इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग की और अपनी पहचान एक एक्टर-सिंगर के तौर पर भी बनाई।
आज भी प्रयोग जारी
आयुष्मान खुराना की कहानी सिर्फ एक बॉलीवुड स्टार बनने की कहानी नहीं है। यह उस सफर की कहानी है, जिसमें रिजेक्शन, संघर्ष, फ्लॉप फिल्में और लगातार प्रयोग शामिल रहे।थिएटर से शुरुआत, रोडीज की जीत, रेडियो और टीवी की नौकरी, इंडियन आइडल का रिजेक्शन, ट्रेनों में गाना और फिर ‘विक्की डोनर’ से बॉलीवुड में एंट्री—इन सबके बाद आयुष्मान ने अपनी एक अलग पहचान बनाई।उनके करियर की सबसे बड़ी खासियत शायद यही है कि उन्होंने सिर्फ हीरो बनने की कोशिश नहीं की, बल्कि अलग तरह का हीरो बनने की कोशिश की।