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जन्माष्टमी पर 'रामायण' में रावण का पोस्टर शेयर करना पड़ा भारी, फुटेज में देंखे मेकर्स की जमकर आलोचना; जानें नेगेटिव पब्लिसिटी का क्या फायदा

 

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'रामायण' इन दिनों एक पोस्टर को लेकर चर्चा में है। जन्माष्टमी के दिन फिल्म के मेकर्स ने रावण का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद उन्हें यूजर्स की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने इसे मेकर्स की बड़ी चूक बताया, जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि फिल्म को चर्चा में लाने के लिए ऐसी गलतियां जानबूझकर की जाती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विवाद और नेगेटिव पब्लिसिटी किसी फिल्म के लिए फायदे का सौदा हो सकती है?

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जन्माष्टमी पर शेयर किया रावण का पोस्टर

फिल्म 'रामायण' के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से शुक्रवार शाम रावण का पोस्टर शेयर किया गया। पोस्टर के साथ लिखा गया था- "देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एक ही राज होगा, रावण राज।"पोस्टर सामने आते ही सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कई यूजर्स ने जन्माष्टमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर किए जाने पर सवाल उठाए और इसे अनुचित बताया।

मेकर्स की गलती या जानबूझकर उठाया गया कदम?

पोस्टर को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या इसे शेयर करना महज एक सोशल मीडिया मैनेजमेंट की गलती थी या फिर फिल्म को सुर्खियों में लाने की रणनीति।कुछ यूजर्स का मानना है कि मेकर्स को पता होना चाहिए था कि जन्माष्टमी जैसे खास धार्मिक अवसर पर 'रामायण' से जुड़े रावण के पोस्टर को शेयर करने पर प्रतिक्रिया आ सकती है। वहीं, कुछ लोग इसे जानबूझकर पैदा किया गया विवाद मान रहे हैं।हालांकि, मेकर्स की ओर से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है कि पोस्टर को जानबूझकर विवाद पैदा करने के उद्देश्य से शेयर किया गया था।

क्या नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्म को फायदा होता है?

फिल्मों के प्रमोशन में विवाद और सोशल मीडिया ट्रोलिंग कई बार चर्चा बढ़ाने का काम करते हैं। जब किसी फिल्म, कलाकार या पोस्टर को लेकर बहस शुरू होती है तो सोशल मीडिया पर उसका जिक्र बढ़ जाता है। इससे फिल्म की ब्रांड रिकॉल और लोगों की उत्सुकता बढ़ सकती है।खासकर बड़ी फिल्मों के मामले में लगातार सोशल मीडिया चर्चा फिल्म को रिलीज से पहले लोगों के बीच बनाए रखने में मदद कर सकती है। कई बार लोग विवाद के कारण फिल्म के बारे में जानने और उसका ट्रेलर या अन्य प्रमोशनल कंटेंट देखने पहुंचते हैं।

ज्यादा विवाद हुआ तो नुकसान भी संभव

हालांकि, नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा फिल्म के लिए फायदेमंद नहीं होती। अगर विवाद सिर्फ चर्चा तक सीमित रहता है तो मेकर्स को इसका फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर मामला इतना बढ़ जाए कि दर्शकों के मन में फिल्म को लेकर नकारात्मक धारणा बनने लगे, तो इसका सीधा असर फिल्म की छवि पर पड़ सकता है।'रामायण' जैसी धार्मिक और सांस्कृतिक विषय वाली फिल्म के लिए यह पहलू और भी संवेदनशील हो जाता है। ऐसे प्रोजेक्ट में दर्शकों की भावनाओं और प्रतिक्रिया को लेकर मेकर्स को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल

रावण के पोस्टर के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने पोस्ट के समय और कंटेंट को लेकर कई सवाल खड़े किए। कुछ लोगों ने इसे महज गलती माना, जबकि कुछ ने प्रमोशनल रणनीति पर सवाल उठाए।फिलहाल यह साफ नहीं है कि जन्माष्टमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर होना महज संयोग था या प्रमोशन से जुड़ा फैसला। लेकिन इतना जरूर है कि इस पोस्ट ने फिल्म 'रामायण' को एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।